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Hisar News: बच्चों की शारीरिक बनावट बिगाड़ रहा भारी बस्ता

Sun, 26 Apr 2026 12:10 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, हिसार
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भारी बस्ता।
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शिवानी सेहरा
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हिसार। नियमों को लागू करवाने में शिक्षा अधिकारियों की विफलता बच्चों के कंधों पर भारी पड़ रही है। भारी वजन उठाने से बच्चों के कंधों और रीढ़ की हड्डी पर बुरा असर पड़ सकता है। हालत यह है कि पहली कक्षा के बच्चे भी तीन-चार किलोग्राम के बैग उठाकर स्कूल जा रहे हैं।
नियमों के मुताबिक तय वजन से अधिक भार उठाने से बच्चों को जो पीड़ा होती है उसे न तो स्कूल संचालक समझ रहे हैं और न विभागीय अधिकारी। हर साल आदेश जारी कर परंपरा का निर्वाह तो कर लिया जाता है लेकिन अब तक किसी भी स्कूल पर सख्ती नहीं की गई है। अभिभावक बताते हैं कि पहली से पांचवीं तक के बच्चों को जब भारी बैग लिए स्कूल जाते देखेत हैं तो मन में पीड़ा होती है पर मजबूरी है कि आवाज किसके सामने उठाएं। शिकायत करते हैं तो स्कूल संचालक यही कहते हैं कि आपके बच्चे के लिए कोई अगल से व्यवस्था तो नहीं कर सकते। शिक्षा विभाग के अधिकारी कहते हैं कि कुछ स्कूल जरूरत से ज्यादा किताबों और कॉपियों का बोझ बच्चों पर लाद रहे हैं। इससे बैग भारी हो जाता है।
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विशेषज्ञ की राय
रीढ़ का टेढ़ापन और स्लिप डिस्क का खतरा
फिजीशियन डॉ. मोनिका ने बताया कि लंबे समय तक भारी बैग ढोने से मांसपेशियों में खिंचाव, थकान, सिरदर्द और कमजोरी जैसी दिक्कतें सामने आती हैं। कुछ मामलों में बच्चों में रीढ़ से जुड़ी गंभीर समस्याएं जैसे रीढ़ का टेढ़ापन और स्लिप डिस्क का खतरा भी बढ़ जाता है। कम उम्र में इस तरह का दबाव बच्चों के शारीरिक विकास को प्रभावित कर सकता है और उनकी कार्यक्षमता पर भी असर डाल सकता है। स्वास्थ्य पर पड़ने वाले इस नकारात्मक प्रभाव का असर बच्चों की पढ़ाई पर भी दिखाई देता है। लगातार दर्द और असहजता के कारण बच्चों की एकाग्रता कम होती है और वे पढ़ाई में पूरा ध्यान नहीं दे पाते। इससे उनकी सीखने की क्षमता और आत्मविश्वास दोनों प्रभावित होते हैं।

क्या कहते हैं अभिभावक
मेरे बच्चे का स्कूल बैग इतना भारी हो जाता है कि उठाने में काफी परेशानी होती है। कई बार वह घर आकर कंधे और पीठ दर्द की शिकायत करता है। छोटे बच्चों के लिए इतना बोझ बिल्कुल ठीक नहीं है। इस पर सख्ती करने की जरूरत है। स्कूलों को भी ध्यान देना चाहिए कि बच्चों से हर दिन सभी किताबें न मंगवाई जाएं। टाइम-टेबल सही बनाया जाए और सिर्फ जरूरी किताबें ही मंगवाईं जाएं तो बच्चों को काफी राहत मिल सकती है।
- रेनुका, अभिभावक

नियम बनाना अच्छी बात है लेकिन उसका सही तरीके से पालन होना ज्यादा जरूरी है। पहले भी ऐसे निर्देश आए थे पर ज्यादा असर नहीं दिखा। बच्चों का बैग उनके लिए आरामदायक होना चाहिए ताकि चलने-फिरने में दिक्कत न हो। इसके लिए स्कूल और अभिभावकों दोनों को मिलकर काम करना होगा। हमें भी ध्यान रखना चाहिए कि बच्चे फालतू की किताबें या कॉपियां बैग में न रखें। स्कूल नियमित जांच करें और शिक्षक इस पर ध्यान दें तभी बच्चों का बोझ कम हो पाएगा।
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- कृष्ण कुमार, अभिभावक

कक्षावार निर्धारित बैग और बच्चे का वचन

कक्षा बच्चे का वजन बैग का वजन
कक्षा 1 16–22 1.6–2.2
कक्षा 2 16–22 1.6–2.2
कक्षा 3 17–25 1.7–2.5
कक्षा 4 17–25 1.7–2.5
कक्षा 5 17–25 1.7–2.5
कक्षा 6 20–30 2–3
कक्षा 7 20–30 2–3
कक्षा 8 25–40 2.5–4
कक्षा 9 25–45 2.5–4.5
कक्षा 10 25–45 2.5–4.5
कक्षा 11 35–50 3.5–5
कक्षा 12 35–50 3.5–5
नोट : वजन किलोग्राम में है।


बच्चों के लिए स्कूल बैग के वजन संबंधी नियम तय हैं। कई स्कूल इसका पालन भी कर रहे हैं। जिस विषय की कक्षाएं न हों उस दिन उसकी पुस्तकें और कॉपिया नहीं मंगवाते। कुछ स्कूल नियमों का उल्लंघन कर रहे हैं। ऐसे स्कूलों को चिह्नित कर बैग के वजन संबंधी नियमों का पालन करने को कहा जाएगा। -राकेश चराया, बीईओ, हिसार-2
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