फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Haryana: फरवरी में सताने लगी अप्रैल जैसी गर्मी, फरवरी में 32 डिग्री पहुंचा पारा; आगे कैसा रहेगा मौसम?

Thu, 26 Feb 2026 10:40 PM IST
शाहिल शर्मा प्रिया पंवार, हिसार

सार

कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि इस प्रकार के उच्च तापमान से निपटने के लिए किसानों को बेहतर जल प्रबंधन और कृषि की नई तकनीकों को अपनाने की जरूरत है।
विज्ञापन
बढ़ने लगी गर्मी - फोटो : Adobe Stock
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

फरवरी के अंतिम सप्ताह में अप्रैल जैसी गर्मी लोगों को सताने लगी है। इस महीने में अधिकतम तापमान 30 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया है। अगले दो दिनों में तापमान में और बढ़ोतरी देखने को मिलेगी। पिछले चार वर्षों में वर्ष 2023 में फरवरी सबसे ज्यादा गर्म रहा। 
विज्ञापन


इस दौरान अधिकतम तापमान 21 फरवरी को 32.5 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया था। तीन साल बाद वर्ष 2026 में 26 फरवरी को दिन का तापमान 30 डिग्री तक पहुंच गया है। मौसम वैज्ञानिक प्रो. चंद्रमोहन ने बताया कि फरवरी महीने की समाप्ति से पहले ही तापमान में उछाल देखने को मिल रहा है। समय से पहले गर्मी ने दस्तक दे दी है।

हरियाणा, एनसीआर-दिल्ली और हिसार में विशेषकर गर्मी पड़ने लगी है। उन्होंने बताया कि आने वाले दिनों में गर्मी का प्रकोप बढ़ने की संभावना है। हिसार जिले में तापमान 35 डिग्री सेल्सियस से ऊपर पहुंच सकता है। साथ ही तेज हवाओं के चलने की प्रबल संभावना है। डॉ. चंद्रमोहन ने जलवायु परिवर्तन को अप्रत्याशित मौसम उतार-चढ़ाव का मुख्य कारण बताया। उनका कहना है कि पिछले साल मानसून के मौसम में रिकॉर्ड बारिश हुई थी, जबकि इस साल जनवरी में कड़ाके की सर्दी पड़ी थी। उन्होंने बताया मिक इस बार गर्मी रिकॉर्ड तोड़ सकती है।
विज्ञापन


मौसम विभाग के अनुसार इस साल फरवरी में हिसार का तापमान सामान्य से अधिक रहा है। कृषि विशेषज्ञों के मुताबिक 30 डिग्री सेल्सियस तक का तापमान गेहूं, चना और ज्वार जैसी फसलों के लिए अधिक नुकसानदायक नहीं होता। अगर औसतन तापमान 35 डिग्री या उससे ऊपर जाता है, तो यह फसल की वृद्धि में बाधा डाल सकता है।

कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि इस प्रकार के उच्च तापमान से निपटने के लिए किसानों को बेहतर जल प्रबंधन और कृषि की नई तकनीकों को अपनाने की जरूरत है। आने वाले समय में जलवायु परिवर्तन के कारण ऐसे मौसमी बदलाव को ध्यान में रखते हुए कृषि रणनीतियों को अपडेट करना जरूरी होगा।
विज्ञापन


 
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें