मॉड्यूल तैयार करने वाली पूरी टीम की फाइल फोटो।
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हिसार। हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय (एचएयू) के वैज्ञानिकों को ऑनलाइन सांख्यिकी विश्लेषण के मॉड्यूल के लिए कॉपीराइट मिला है। मौलिक विज्ञान एवं मानविकी महाविद्यालय के अधिष्ठाता डॉ. राजबीर सिंह ने बताया कि ये मॉड्यूल गणित एवं सांख्यिकी विभाग के प्रो. ओपी श्योराण व उनके सहयोगी डॉ. मंजू सिंह टोंक, डॉ. रामनिवास, डॉ. मनोज गोयल व डॉ. हेमंत पूनिया के द्वारा तैयार किए गए हैं।
क्लाइंट सर्वर आर्किटेक्चर विधि पर हैं आधारित
प्रो. ओपी श्योराण ने बताया कि ये मॉड्यूल एक्टिव सर्वर पेजिस (एएसपी) भाषा का उपयोग करते हुए क्लाइंट सर्वर आर्किटेक्चर विधि पर आधारित हैं। इन मॉड्यूल का उपयोग इंटरनेट के माध्यम से कोई भी वैज्ञानिक अनुसंधान में आंकड़ों का विश्लेषण करने के लिए कर सकता है। कृषि वैज्ञानिकों व शोध विद्यार्थियों के लिए ये मॉड्यूल बहुत ही लाभदायक होंगे। वर्तमान समय में अनुसंधान में ऑनलाइन आंकड़ा विश्लेषण की तकनीकों की बहुत अधिक जरूरत है।
रसायन की प्रभावी मात्रा का पता लगाने में होंगे सहायक
मॉड्यूल तैयार करने वाली टीम के इंचार्ज ने बताया कि इन मॉड्यूल के माध्यम से शोधकर्ता कीट विज्ञान, रसायन विज्ञान व सस्य विज्ञान में किसी रसायन की प्रभावी मात्रा का पता लगाने में सक्षम होगा। इसके अलावा बहुत अधिक आंकड़ों के सेट को (महत्वपूर्ण सूचना को बिना नुकसान पहुंचाए) छोटे आंकड़ा सेट में परिवर्तित करने में सहायक होगा। साथ ही कई स्थानों पर अनुसंधान के लिए कई वर्षों व कई स्थानों पर लगाए गए परीक्षणों के विश्लेषण के लिए भी अत्यंत प्रभावी होंगे।
इन मॉड्यूल में नहीं कर सकता कोई बदलाव
गणित एवं सांख्यिकी के विभागाध्यक्ष डॉ. मंजू सिंह टोंक ने बताया कि इन मॉड्यूल की कोडिंग में कोई अपने अनुसार बदलाव नहीं कर सकता। अगर इन मॉड्यूल का कोड बदलना है तो इसके लिए विश्वविद्यालय के संबंधित विभाग से लिखित में अनुमति लेनी पड़ती है।
विवि के लिए गौरव की बात
यह विश्वद्यिालय के लिए गौरव की बात है। विश्वविद्यालय के वैज्ञानिकों पर भी गर्व है कि वे निरंतर कुछ बेहतर करने के लिए प्रयासरत हैं।
प्रो. समर सिंह, कुलपति, एचएयू।