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एचएयू छेड़छाड़ मामला: निलंबन के बाद कैंपस में नजर नहीं आए दोनों असिस्टेंट प्रोफेसर

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हिसार। चौधरी चरण सिंह हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय (एचएयू) में छात्रा से छेड़छाड़ के आरोप में दो असिस्टेंट प्रोफेसरों के निलंबन के बाद शुक्रवार को दोनों आरोपी शिक्षक कैंपस परिसर में नजर नहीं आए। वहीं, विश्वविद्यालय प्रशासन ने मामले की जांच के लिए गठित कमेटी के सदस्यों के नाम सार्वजनिक करने से इन्कार कर दिया है।
मामले को लेकर जब मीडिया कर्मी संबंधित कॉलेज के डीन से मिलने पहुंचे तो उन्हें कॉलेज परिसर में प्रवेश की अनुमति नहीं दी गई। निलंबन के बावजूद प्रशासन की ओर से अब तक न तो निलंबन आदेश सार्वजनिक किए गए हैं और न ही जांच प्रक्रिया से जुड़ी कोई आधिकारिक जानकारी दी जा रही है।
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छेड़छाड़ प्रकरण में दो सहायक प्रोफेसरों को निलंबित किए जाने के बावजूद विश्वविद्यालय प्रशासन हर स्तर पर तथ्य छिपाता नजर आ रहा है। जांच कमेटी के सदस्यों के नाम सार्वजनिक न करने के पीछे छात्रा की पहचान गोपनीय रखने का हवाला दिया जा रहा है। हालांकि, इसको लेकर कैंपस में असमंजस और चर्चाओं का दौर जारी है।
एक छात्रा ने छेड़छाड़ की शिकायत लेकर वीरवार को कुलपति प्रो. बी.आर. कांबोज से मुलाकात की थी। इसके बाद कुलपति के आदेश पर असिस्टेंट प्रोफेसर नवीन कौशिक और अजीव सांगवान को निलंबित कर दिया गया। साथ ही मामले की जांच के लिए एक कमेटी का गठन भी किया गया है।
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डेढ़ वर्ष पहले ही हुए थे नियुक्त
शुक्रवार को यह मामला पूरे विश्वविद्यालय में चर्चा का विषय बना रहा। यूनिवर्सिटी कर्मी एक-दूसरे से व्हाट्सएप कॉल के जरिए जानकारी जुटाने की कोशिश करते रहे। कई वरिष्ठ शिक्षक इस मामले में निष्पक्ष जांच के बाद कड़ी कार्रवाई के पक्ष में हैं। निलंबित दोनों असिस्टेंट प्रोफेसर करीब डेढ़ वर्ष पूर्व ही विश्वविद्यालय में नियुक्त हुए थे। यह भी सामने आया है कि दोनों में से एक प्रोफेसर छात्र आंदोलन के दौरान रात के समय छात्राओं से मोबाइल पर लंबे समय तक बातचीत करता था। एक छात्रा के पास इससे संबंधित डिजिटल साक्ष्य भी मौजूद बताए जा रहे हैं।
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