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Haryana will take back your power from other states

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प्रदेश के लोगों को इस वर्ष गर्मी के सीजन में गर्मी से राहत दिलाने के लिए पर्याप्त बिजली आपूर्ति के प्रबंध विभाग की ओर से किए गए हैं।
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उपभोक्ताओं को निर्धारित शेड्यूल के अनुरूप बिजली आपूर्ति के लिए हरियाणा बिजली खरीद केंद्र की ओर से उपभोक्ताओं को राहत देने की योजना बनाई गई है।

निगम के प्रधान सचिव देवेंद्र सिंह ने बताया कि बिजली खरीद केंद्र ने पर्याप्त बिजली उपलब्धता के प्रबंध किए हैं, ताकि उद्योगों और शहरी घरेलू श्रेणी के लिए 22 से 24 घंटे प्रतिदिन और ग्रामीण घरेलू श्रेणी को प्रतिदिन 14 घंटे बिजली की आपूर्ति की जा सके।

आगामी 15 जून से धान की रोपाई शुरू होने के साथ ही कृषि उपभोक्ताओं को प्रतिदिन आठ घंटे बिजली आपूर्ति का निर्णय लिया गया है।

वर्तमान में उद्योगों को प्रतिदिन 20:30 घंटे, शहरी घरेलू श्रेणी को 20 घंटे, ग्रामीण घरेलू श्रेणी को 14 घंटे तथा कृषि क्षेत्र को प्रतिदिन आठ घंटे का शेड्यूल है।
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उन्होंने बताया कि गर्मी के मौसम और धान रोपाई के दौरान पिछले वर्ष की तुलना में औसत मांग में 15 प्रतिशत बढ़ोतरी की संभावना है, जिसे पूरा करने के प्रबंध किए जा चुके हैं।

प्रदेश में इस वर्ष मई से सितंबर तक की संभावित मांग के अनुरूप मांग से ज्यादा बिजली उपलब्ध होगी। प्रधान सचिव ने बताया कि बेहतर प्रबंधन के दृष्टिगत वितरण कंपनियों को लघु अवधि आधार पर बिजली खरीद की जरूरत नहीं होगी।

प्रदेश में मई, जून, जुलाई, अगस्त और सितंबर-2014 की परियोजित मांग के मुकाबले बिजली के कहीं ज्यादा प्रबंध हैं। इस वर्ष मानसून सामान्य से कम होने को भी ध्यान में रखा गया है।

मई के दौरान लोड की मांग के अनुरूप लगभग 5800 से 6000 मेगावाट बिजली की जरूरत होगी, जिसके विरुद्ध उपलब्धता 7800 से 8000 मेगावाट होगी।

इसी प्रकार जून के पहले पखवाड़े में परियोजित मांग 6000 से 6200 मेगावाट होगी, जबकि बिजली की उपलब्धता 8000 से 8200 मेगावाट होगी।

जून के दूसरे पखवाड़े में परियोजित मांग 7300 से 7500 मेगावाट होगी। इस दौरान बिजली की उपलब्धता 9100 से 9300 मेगावाट होगी।

जुलाई, अगस्त तथा सितंबर में बिजली की परियोजित मांग 7590, 6600 और 6640 मेगावाट होगी, जिसके लिए इन तीन महीनों में हरियाणा बिजली खरीद केंद्र ने पहले ही 9500 मेगावाट और 9300 मेगावाट और 8400 मेगावाट के प्रबंध कर लिए हैं।
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निगम के प्रधान सचिव देवेंद्र सिंह ने बताया कि सर्दी के दौरान हरियाणा के बिजली निगमों ने बैंकिंग प्रणाली के तहत हिमाचल प्रदेश, जम्मू और कश्मीर, मध्य प्रदेश, राजस्थान, मेघालय और असम को बिजली दी थी। अब ये प्रदेश गर्मी व धान के मौसम के दौरान हरियाणा को 50 मेगावाट से 1500 मेगावाट तक बिजली की वापसी करेंगे।
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