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हरियाणा मौसम: इस बार 21 जिलों में मानसून सामान्य से कम, 10 रेड जोन में; अगले एक सप्ताह ये रहेगा मौसम का हाल

Fri, 11 Sep 2026 09:56 PM IST
मयूर शर्मा माई सिटी रिपोर्टर, हिसार

सार

कम बारिश के कारण किसानों को धान, कपास, मूंग और बाजरा की फसलों को बचाने के लिए अतिरिक्त संसाधनों का इस्तेमाल करना पड़ा। इसके बावजूद फसल उत्पादन सामान्य से कम रहने की आशंका है। मानसून अगले सप्ताह विदाई से पहले फिर सक्रिय हो सकता है लेकिन दक्षिणी और मध्यवर्ती जिलों में बारिश के आसार कम हैं।
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हरियाणा मौसम - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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प्रदेश के 21 जिलों में इस बार मानसून की बारिश सामान्य से कम रही है जबकि केवल पलवल में सामान्य से 28 प्रतिशत अधिक बारिश दर्ज की गई। 10 जिलों को रेड जोन में रखा गया है जहां सामान्य से 22 से 59 प्रतिशत तक कम बारिश हुई। कम बारिश के कारण किसानों को धान, कपास, मूंग और बाजरा की फसलों को बचाने के लिए अतिरिक्त संसाधनों का इस्तेमाल करना पड़ा। इसके बावजूद फसल उत्पादन सामान्य से कम रहने की आशंका है। मानसून अगले सप्ताह विदाई से पहले फिर सक्रिय हो सकता है लेकिन दक्षिणी और मध्यवर्ती जिलों में बारिश के आसार कम हैं। मौसम विशेषज्ञों के अनुसार 20 सितंबर तक मानसून प्रदेश से लौट जाएगा।
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इन जिलों में कम बरसे बादल

एक जून से 10 सितंबर तक के आंकड़ों के अनुसार 12 जिलों में सामान्य से 21 प्रतिशत तक कम बारिश हुई। जींद में सामान्य से सबसे कम 59 प्रतिशत बारिश हुई। सिरसा में 56, कैथल में 53, अंबाला में 48, करनाल में 47 और रोहतक में 46 प्रतिशत कम बारिश हुई। इस बार पूरे प्रदेश में एक साथ मानसून सक्रिय नहीं रहा। एनसीआर और उत्तरी जिलों में बारिश अधिक रही जबकि गर्मी और उमस से लोग परेशान रहे। मौसम विशेषज्ञों ने कमजोर मानसून के लिए अल नीनो के प्रभाव को जिम्मेदार बताया। वैज्ञानिकों ने पहले ही मानसून कमजोर रहने का अनुमान जताया था। हरियाणा के अलावा देश के अन्य राज्यों में भी मानसून कमजोर रहा।

16 सितंबर तक बारिश के आसार

शुक्रवार दोपहर बाद प्रदेश के छह जिलों में धूलभरी आंधी के चलते मौसम बदला। मौसम विशेषज्ञ डॉ. चंद्रमोहन ने बताया कि 16 सितंबर तक पश्चिमी विक्षोभ के प्रभाव से प्रदेश में बारिश के आसार हैं। उत्तरी जिलों में बारिश की संभावना अधिक है। इसके बाद 20 सितंबर तक मानसून लौट जाएगा।
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जिलावार बारिश का आंकड़ा

          जिला    बारिश (एमएम)      सामान्य से कमी
  • जींद        143                    59 प्रतिशत
  • सिरसा       86                    56 प्रतिशत
  • कैथल      160                    53 प्रतिशत
  • अंबाला     391                   48 प्रतिशत
  • करनाल    253.5                47 प्रतिशत
  • रोहतक    232.2                 46 प्रतिशत
  • पानीपत    286                   32 प्रतिशत
  • सोनीपत   300                    31 प्रतिशत
  • हिसार     198.3                  27 प्रतिशत
  • पंचकूला   625                    22 प्रतिशत
  • यमुनानगर 677                   19 प्रतिशत
  • महेंद्रगढ़   300                    19 प्रतिशत
  • झज्जर      284                    16 प्रतिशत
  • रेवाड़ी     360.6                  10 प्रतिशत
  • फरीदाबाद 470                     9 प्रतिशत
  • कुरुक्षेत्र    354.5                   6 प्रतिशत
  • फतेहाबाद 222.1                  6 प्रतिशत
  • भिवानी 261.4                      3 प्रतिशत
  • गुरुग्राम 467                        2 प्रतिशत
  • नूंह 440.2                           2 प्रतिशत
  • चरखी-दादरी 326.2             12 प्रतिशत

अगस्त में हुई 138.5 एमएम बारिश

अगस्त में प्रदेश में 138.5 एमएम बारिश हुई, जबकि सामान्य आंकड़ा 146.1 एमएम है। इस तरह सामान्य से पांच प्रतिशत कम बारिश हुई। करनाल में सामान्य से 68 प्रतिशत अधिक बारिश हुई जो प्रदेश में सबसे ज्यादा रही। वहीं जींद में सामान्य से 51, कैथल में 49, अंबाला में 37 और सिरसा में 24 प्रतिशत कम बारिश हुई।

पिछले साल जुलाई में हुई थी 141 एमएम बारिश

पिछले साल जुलाई में 141 एमएम बारिश हुई थी जो सामान्य से 33 प्रतिशत अधिक थी। इस बार जुलाई में 58.3 एमएम बारिश हुई, जो सामान्य से 45 प्रतिशत कम है। पिछले 27 वर्षों में जुलाई की सर्वाधिक बारिश का रिकॉर्ड 2003 में बना था। उस वर्ष 344.1 एमएम बारिश हुई थी, जो सामान्य से 182 प्रतिशत अधिक थी।

कृषि विभाग के अतिरिक्त निदेशक डॉ. आरपी सिहाग ने बताया कि इस बार मानसून की बारिश कम रही है। किसानों ने फसलों को बचाने के लिए बोरवेल सहित अन्य संसाधनों का इस्तेमाल किया। कम बारिश का असर फसलों पर कुछ हद तक पड़ना तय है। अभी यह नहीं बताया जा सकता कि उत्पादन कितने प्रतिशत प्रभावित होगा।
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