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हरियाणा निकाय चुनाव: सबसे युवा नगर पालिका चेयरपर्सन बनीं उकलाना की रीमा सोनी, बेबाक अंदाज से मिला ताज

Wed, 13 May 2026 02:37 PM IST
Naveen मनोज कौशिक, हिसार (हरियाणा)

सार

भाजपा प्रत्याशी निकिता गोयल को निर्दलीय प्रत्याशी 23 वर्षीय रीमा सोनी ने 2806 वोटों से हरा दिया। रीमा सोनी के बेबाक अंदाज, मुद्दों की बात और युवा पहचान ने उनको जीत दिलवाने में अहम भूमिका निभाई। कांग्रेस का समर्थन भी उनके काम आया और उनके पिता की मेहनत भी रंग लाई। 
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कांग्रेस समर्थित निर्दलीय प्रत्याशी रीमा सोनी - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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उकलाना नगर पालिका चेयरपर्सन के चुनाव में कांग्रेस समर्थित निर्दलीय प्रत्याशी रीमा सोनी ने भाजपा की प्रत्याशी निकिता गोयल को वोटों के बड़े अंतर से हरा दिया। 2806 वोटों से जीत हासिल कर रीमा सोनी महज 23 साल की उम्र में नगर पालिका चेयरपर्सन बन गई। दावा किया जा रहा है कि वे नगर पालिका चेयरपर्सन बनने वाली वे सबसे कम उम्र की प्रत्याशी हैं।

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रीमा सोनी के बेबाक अंदाज, मुद्दों की बात, युवा पहचान और उनके पिता की राजनीतिक सूझबूझ ने उनको जीत दिलवाने में अहम भूमिका निभाई है। समर्थन में कांग्रेस के उकलाना से विधायक नरेश सेलवाल लगातार प्रचार कर रहे थे। हालांकि भाजपा प्रत्याशी के लिए सीएम नायब सिंह सैनी सहित 5 मंत्रियों ने प्रचार किया था। भाजपा प्रत्याशी निकिता गोयल के ससुर भी नगर पालिका के पूर्व चेयरमैन रहे हैं लेकिन बात नहीं बनी और आखिर में बाजी रीमा सोनी मार गईं।

सोशल मीडिया की सुर्खियों में थी रीमा सोनी 

रीमा सोनी अपने अच्छे वक्तव्य और अलग अंदाज के लिए सोशल मीडिया की सुर्खियों में बनी हुई थी। वे शुरू से ही जीत को लेकर आश्वस्त नजर आ रही थी और जहां भी प्रचार के लिए जाती तो यही बात कहती कि विधायक बनने जैसी फीलिंग आ रही है। दूसरी और पहली बार चुनावी में मैदान में उतरीं भाजपा प्रत्याशी निकिता गोयल भाषण और प्रचार में थोड़ी पीछे नजर आईं। रीमा सोनी ने उकलाना के विकास को गति देने के विषय में बार-बार दावे और वादे किया जिन पर जनता ने भरोसा किया और जीत हासिल की। 

निकिता गोयल-रीमा सोनी के बीच थी कड़ी टक्कर

उकलाना नगर पालिका में चेयरपर्सन पद के चुनाव में भाजपा की प्रत्याशी निकिता गोयल को निर्दलीय प्रत्याशी रीमा सोनी जबरदस्त टक्कर थी। भाजपा कैडर का मजबूत आधार और ससुर की वर्षों की मेहनत से निकिता गोयल को बढ़त मिलती दिखाई दे रही थी। दूसरी तरफ पिता की विरासत और कांग्रेस के समर्थन से अपने बेबाक अंदाज से रीमा सोनी इस चुनाव में सुर्खियों में बनी हुई थी। निर्दलीय प्रत्याशी सीमा बतरा चुनाव को त्रिकोणीय बनाने की कोशिश कर रही थी। आखिर में जीत का सेहरा रीमा सोनी के सिर पर सजा। 

 

निकिता के सुसर चार दशक से कर रहे राजनीति 

उकलाना नगर पालिका 15507 वोट हैं, जिसमें सबसे अधिक वोट अग्रवाल समाज के हैं। दूसरे नंबर पर पंजाबी समाज के वोट हैं। यह दोनों समाज ही निर्णायक साबित हुए हैं। निकिता के ससुर श्रीनिवास गोयल पिछले चार दशक से भी लंबे समय से भाजपा की राजनीति कर रहे हैं। पूर्व पीएम स्वर्गीय अटल बिहारी के समय से भाजपा की राजनीति में अपना वजूद रखने वाले श्रीनिवास गोयल ने अपनी पुत्रवधू निकिता गोयल को नगर पालिका चेयरपर्सन का टिकट दिलाया था। 12 वीं पास निकिता गोयल पहली बार चुनावी मैदान में उतरी थी। उनके पति संदीप भाजपा में जिला प्रभारी के तौर पर काम कर रहे हैं।

रीमा सोनी के पिता 400 वोट से हारे थे 

निर्दलीय प्रत्याशी रीमा सोनी बीए पास हैं। इनके पिता महेंद्र सोनी इनेलो तथा कांग्रेस की राजनीति में सक्रिय रहे हैं। इन चारों प्रत्याशियों में सबसे कम आयु की हैं। महेंद्र सोनी ने पिछला नगर पालिका चेयरमैन का चुनाव लड़ा था। पिछले चुनाव में करीब 400 वोट से हार गए थे। पिता की राजनीतिक विरासत व कांग्रेस के समर्थन से रीमा सोनी टक्कर में हैं। रीमा सोनी के पिता पिछले दो साल से मैदान पर काम रहे हैं। चौथी प्रत्याशी मीनू रानी को रीमा सोनी को समर्थन दे चुकी थी।
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सोनिया बतरा ने देरी से शुरू किया था प्रचार

चुनाव को त्रिकोणिय बनाने वाली डॉ. सोनिया बतरा आयुर्वेदिक चिकित्सक हैं। इनके पति दिल्ली में बिजनेस करते हैं। सोनिया बतरा के पिता शेर सिंह बतरा उकलाना से इनेलो व जजपा में सक्रिय रहे हैं। सोनिया खुद भी जजपा में महिला विंग में प्रदेश सचिव हैं। पिछले दो साल से सक्रिय राजनीति में हैं। सोनिया बतरा चुनाव को लेकर आखिरी समय सक्रिय हुईं। उन्होंने 24 अप्रैल को नामांकन भरने के साथ ही प्रचार शुरु किया। देरी से सक्रिय होने के चलते मुकाबले में पिछड़ गईं।
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