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Haryana: CIRB ने नेपाल को सौंपे मुर्राह नस्ल के 15 झोटे, इंडो-नेपाल एग्रीकल्चर वर्किंग ग्रुप में हुआ था फैसला

Tue, 07 Nov 2023 10:53 PM IST
भूपेंद्र सिंह अमर उजाला ब्यूरो, हिसार (हरियाणा)

सार

इंडो-नेपाल एग्रीकल्चर वर्किंग ग्रुप में हुए फैसले के तहत मुर्राह नस्ल के झोटे प्रदान किए गए हैं। नेपाल ने जी 20 सम्मेलन के दौरान अनुरोध किया था। 
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सीआईआरबी के निदेशक डॉ. टीके दत्ता नेपाल के प्रतिनिधि मंडल को एमओयू सौंपते हुए। - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
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विस्तार
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भारत-नेपाल के बीच सहयोग के लिए बने इंडो-नेपाल एग्रीकल्चर वर्किंग ग्रुप में हुए फैसले के तहत केंद्रीय भैंस अनुसंधान संस्थान (सीआईआरबी) ने नेपाल को भैंस की नस्ल सुधार के लिए मुर्राह नस्ल के 15 झोटे प्रदान किए हैं। नेपाल में उपलब्ध भैंसों की प्रजातियों में दूध की उपलब्धता 1500 किलोग्राम प्रति वर्ष है। सीआईआरबी की ओर से दिए गए झोटों की मां का न्यूनतम दूध उत्पादन 3000 लीटर है। केंद्रीय भैंस अनुसंधान केंद्र के निदेशक डॉ. टीके दत्ता ने नेपाली प्रतिनिधिमंडल का प्रतिनिधित्व करने वाले डॉ. समझान को यह प्रक्रिया पूरी करने के बाद पत्र की प्रति सौंपी।

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केंद्रीय भैंस अनुसंधान संस्थान केंद्र के निदेशक डॉ. टीके दत्ता ने मीडिया से बातचीत में बताया कि नेपाल सरकार के साथ एक सहयोगात्मक विनिमय कार्यक्रम शुरू किया है। जी 20 सम्मेलन में नेपाल ने भारत से मुर्राह नस्ल के झोटों की मांग रखी थी। जिसके बाद भारत सरकार ने पशुपालन विभाग, आईसीएआर ने हिसार स्थित सीआईआरबी को निर्देश जारी किए हैं।

मुर्राह नस्ल के झोटे प्रदान करने के लिए नेपाल ने करीब 4 साल पहले अनुरोध किया था। इस आदान-प्रदान का मुख्य उद्देश्य नेपाल के साथ मुर्राह नस्ल की भैंस को साझा करने की सुविधा प्रदान करना है, ताकि उनके प्रजनन कार्यक्रम को आगे बढ़ाया जा सके। उन्होंने बताया कि इन सभी झोटों के कई तरह के टेस्ट किए गए हैं।
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इन सभी टेस्ट की रिपोर्ट नेपाल के वैज्ञानिकों को उपलब्ध कराई गई है। जिसके बाद नेपाल के प्रतिनिधिमंडल ने इन्हें मंजूर किया। दिवाली के बाद इन झोटों को नेपाल भेजा जाएगा। नेपाली प्रतिनिधिमंडल का प्रतिनिधित्व करने वाली डॉ. समझान ने कहा कि वह हिसार के एचएयू की छात्रा रह चुकी हैं। ऐसे में उन्हें यहां की मुर्राह नस्ल की पूरी जानकारी है। मुर्राह भैंस देश की सबसे बेहतरीन नस्लों में एक है। भारत का सहयोगी का रवैया नेपाल के पशुपालन क्षेत्र में काफी बदलाव लाएगा।

डॉ. टीके दत्ता ने बताया कि एक झोटे से एक साल में 20 हजार डोज तैयार होती है। झोटे की उत्पादन आयु औसतन दस साल मानी जाती है। इस हिसाब से एक झोटे से दो लाख सीमन तैयार किए जा सकते हैं। उन्होंने बताया कि उनकी 15 लीटर की भैंस के साथ 30 लीटर दूध वाली भैंस के झोटे से गर्भाधान कराया जाएगा तो औसत 22 लीटर दूध वाली भैंस तैयार होगी। नेपाल की लीमे, पारकोटे, तराई, गड़ी नस्ल की भैंस की अधिकतम दूध उत्पादन क्षमता 15 लीटर है। भारत में भैंसों की 20 प्रमुख प्रजाति हैं।

कृत्रिम गर्भाधान को बढ़ाना होगा
डॉ. टीके दत्ता ने कहा कि भैंस नस्ल सुधार के लिए कृत्रिम गर्भाधान को बढ़ाना होगा। भारत में फिलहाल करीब 50 प्रतिशत पशुपालन कृत्रिम गर्भाधान को अपना रहे हैं। नेपाल में यह आंकड़ा 6 से 7 प्रतिशत के बीच है। नेपाल में भैंसों की संख्या 51 लाख से अधिक है।

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