दूध-दही उत्पादन में देश में विशेष पहचान रखने वाला हरियाणा अब जल संरक्षण और मछली उत्पादन में इतिहास रच रहा है। विगत दस वर्षों से इस मैदानी प्रदेश में जिस तेजी से मछली उत्पादन बढ़ा है, वह मत्स्य क्रांति सरीखा है। खास बात यह कि खारे पानी वाले इलाके में 1497 महिला किसानों ने भी उद्यमशीलता दिखाते हुए स्वावलंबन की गाथा लिखी है।
उनके अलावा 5512 पुरुष किसान भी प्रदेश में मछली उत्पादन कर खासी कमाई कर रहे हैं। मछली उत्पादन में सिरसा जिला प्रदेश में सबसे आगे है। प्रदेश में महिला मछली उत्पादकों की संख्या भी सिरसा जिले में सबसे अधिक है। कृषि मंत्री का गृह जिला भिवानी इस मामले में प्रदेश में चौथे नंबर पर है।
हाल में इंदौर से केंद्रीय मत्स्य पालन मंत्री पुरुषोत्तम रूपाला ने वर्चुअल माध्यम से चरखी दादरी जिले की सुनीता, जींद जिले की सुमनदीप कौर व रितु समेत हरियाणा की कई महिलाओं को झींगा पालन के लिए प्रोत्साहित किया। उन्होंने प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना के तहत कोल्ड स्टोर, एक्वाकल्चर सिस्टम, बायोफ्लॉक यूनिट आदि का उद्घाटन कर महिला सशक्तीकरण की दिशा में बड़ा कदम उठाया।
यही नहीं, हरियाणा सरकार भी खारे पानी वाले जिलों में सफेद झींगा मछली के उत्पादन में विशेष मदद कर रही है। सरकार की ओर से मछली बीज के लिए प्रदेश में 16 केंद्र खोले गए हैं। केंद्र सरकार की योजना में हरियाणा सरकार की ओर से लाभार्थियों को पहले ही सब्सिडी दी जा रही है।
लाभार्थियों को सरकार 60 प्रतिशत तक अनुदान दे रहे हैं। इसका नतीजा है कि मछली उत्पादन विगत दस साल में दोगुना बढ़ गया है। मत्स्य पालन विभाग हरियाणा ने मत्स्य पालकों की आय दोगुनी करने के उद्देश्य से प्रदेश में 2002-23 में 24 रिसर्कुलेटरी एक्वाकल्चर सिस्टम तथा 73 बायोफ्लॉक यूनिट स्थापित की हैं।
आठ मत्स्य फीड मिल प्लांट की स्थापना की जा चुकी है। पानीपत के निम्बरी में कोल्ड स्टोर यूनिट की भी स्थापना की गई है। आंकड़े बताते हैं कि वित्तीय वर्ष 2022-23 में प्रदेश में 45015 एकड़ जलक्षेत्र को मत्स्य पालन के अधीन लाकर 2.12 लाख मीट्रिक टन मछली का उत्पादन किया। 2014-15 में मत्स्य विभाग का बजट सिर्फ 6.99 करोड़ का था, वहीं 2023-24 इसका बजट 250 करोड़ का रखा गया है। 2013-14 में प्रदेश में 1.05 लाख मीट्रिक टन मछली का उत्पादन हुआ था, जो अब बढ़कर 2.12 लाख मीट्रिक टन हो गया है।
भविष्य में मत्स्य क्रांति आएगी। किसानों को फायदा दिलाने के लिए कोल्ड स्टोर और प्रोसेसिंग यूनिट की चेन बनाएंगे। सिरसा, फतेहाबाद, भिवानी समेत कई जिलों में ऐसी यूनिट लगने से किसानों को फायदा होगा। गन्नौर में पैकेजिंग सुविधा भी देंगे। सफेद झींगा पालन को प्रोत्साहित करने के लिए भिवानी के गरवा में करीब 100 करोड़ की लागत से इंटीग्रेटेड एक्वा पार्क बनाएंगे।
- जेपी दलाल, कृषि मंत्री, हरियाणा
इन शहरों में हैं सरकारी मछली बीज फार्म
ज्योतिसर (कुरुक्षेत्र), दादूपुर (यमुनानगर), जनसुई (अंबाला), मुंदरी (कैथल) झज्जर, रोहट, काकरोई (सोनीपत) सैदपुरा (करनाल), सांपला (रोहतक), हिसार, टोहाना, ओटू (सिरसा), दमदमा (गुरुग्राम), लिसाना (रेवाड़ी) और बढ़कल। प्रदेश में बीते वित्तीय वर्ष में 2,272.05 लाख टन मछली बीज का उत्पादन किया गया है।
जिला उत्पादन (मी.टन) पुरुष महिला
- अंबाला 4826 161 26
- भिवानी 14112 423 113
- च. दादरी 1280 160 93
- फरीदाबाद 5960 115 62
- फतेहाबाद 13046.61 185 62
- गुरुग्राम 2862 137 51
- हिसार 12236 327 110
- झज्जर 13820.50 323 91
- जींद 10510 138 85
- कैथल 11037 181 42
- करनाल 11014 451 40
- कुरुक्षेत्र 7080 221 35
- मेवात (नूंह) 18663.08 710 63
- नारनौल 1541 60 19
- पलवल 13804 475 130
- पंचकूला 902.70 37 8
- पानीपत 9768 131 6
- रेवाड़ी 9144.25 61 12
- रोहतक 8629.80 435 110
- सिरसा 21200 325 270
- सोनीपत 15272.57 272 47
- यमुनानगर 5333 184 22
- कुल 212042.51 5512 1497