गुरु जंभेश्वर विश्वविद्यालय में गत दिवस इंटर यूनिवर्सिटी हैंडबाल चैंपियनशिप के लिए टीम का चयन किया गया। इस चयन प्रक्रिया की हद ये रही विश्वविद्यालय के खेल निदेशालय ने ये पूरी प्रक्रिया मात्र एक दिन में ही निपटा दी, जबकि इंटर कॉलेज हैंडबाल चैंपियनशिप के बाद विभाग को खिलाड़ियों का कैंप लगवाना था, जो एक सप्ताह से 15 दिन के बीच तक का होता है। यही हाल विश्वविद्यालय के खेल विभाग ने अन्य खेलों के साथ किया। ऐसे में सवाल उठता है कि बिना कैंप के एक ही दिन में कैसे खिलाड़ियों का चयन किया गया और वे बिना सामंजस्य और अभ्यास के ये खिलाड़ी कैसे गोल्ड मेडल जीतेंगे।
कॉलेजों पर निर्भर है खेल विभाग की उपलब्धियां
विश्वविद्यालय का खेल विभाग उपलब्धियों के मामले में काफी हद तक कॉलेजों पर ही निर्भर है। कॉलेजों के खिलाड़ी विश्वविद्यालय के लिए पदक जीतते हैं। कालेजों में ही प्रैक्टिस करते हैं। विश्वविद्यालय की टीम में चयन होने और विश्वविद्यालय में खेल का बड़ा इंफ्रास्ट्रक्चर और फंड होने के बाद भी खेल विभाग इन खिलाड़ियों को कोई सुविधा नहीं देता। इसी का नतीजा रहा कि खिलाड़ी कैंप का हिस्सा नहीं बन पाए।
क्या होता है कैंप में
इंटर कॉलेज प्रतियोगिता के बाद खिलाड़ियों के ट्रॉयल के आधार पर इंटर यूनिवर्सिटी चैंपियनशिप के लिए कैंप का आयोजन किया जाता हैक, जिसमें टीम में निर्धारित संख्या से 5-6 अधिक खिलाड़ियों को चुना जाता है। सभी खिलाड़ी अलग-अलग कॉलेजों से होते हैं, इसलिए खेल में उनका सामंजस्य बनाए रखने के लिए कैंप में अभ्यास करवाया जाता है और उनके खेल को तराशा जाता है। इसके बाद कैंप में किए गए प्रदर्शन के आधार पर इन्हीं खिलाड़ियों में से टीम में जाने वाले खिलाड़ियों का चयन किया जाता है। गुजवि द्वारा चुनी गई हैंडबाल की टीम में ऐसा कुछ नहीं हुआ।
प्रतियोगिताओं की तारीख स्थगित होती रहती है, इसलिए कई बार टीम अंत तक फाइनल हो पाती है। इसी कारण दिक्कत आई। वैसे अब विद्यार्थियों का कैंप शुरू करवा दिया है।
- डॉ. एसबी लूथरा, खेल निदेशक, गुजवि