पश्चिमी विक्षोभ के कारण वीरवार दोपहर को मौसम बदलने के साथ ही दो घंटे में लोगों ने एक साथ धूप, आंधी और बारिश का मिजाज देखा। मई में तीसरी बार ऐसा हुआ कि तापमान 40 डिग्री के पार जाते ही मौसम बदल गया। वीरवार को ढाई बजे अधिकतम तापमान 40.2 डिग्री सेल्सियस था और तीन बजे बादल छा गए।
साढ़े तीन बजे आंधी आई और इसके कुछ देर बार अंधड़ के साथ बारिश शुरू हो गई। फिर कई जगहों पर ओले गिरे। चार बजे फिर तेज धूप निकल आई और आंधी के साथ बारिश जारी रही। साढ़े चार बजे पूरी तरह धूप खिल गई। कुल 6.2 एमएम बारिश दर्ज की गई।
यह रहा आंधी-बारिश का कारण
पश्चिमी विक्षोभ के कारण हरियाणा और राजस्थान के ऊपर बने सर्कुलेशन सिस्टम से एक टर्फ रेखा बनी हुई है। जिसका प्रभाव हरियाणा में देखने को मिला और बारिश हुई। आमतौर पर हर माह चार से पांच पश्चिमी विक्षोभ आते हैं, लेकिन इस बार ये पश्चिमी विक्षोभ ज्यादा प्रभाव डाल रहे हैं। मई में ही अब तक तीन पश्चिमी विक्षोभ आ चुके हैं।
जलवायु परिवर्तन के कारण पहाड़ों के बजाय मैदानी क्षेत्रों में हो रहा प्रभाव
चौधरी चरण सिंह हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय के कृषि मौसम विज्ञान विभाग के अध्यक्ष डॉ. मदन खीचड़ के अनुसार पश्चिमी विक्षोभ आम तौर पर अक्तूबर से मार्च के बीच आते थे, लेकिन इस बार मई तक भी अधिक प्रभाव डाल रहे हैं। इसका कारण जलवायु परिवर्तन ही है। आमतौर पर ये पहाड़ों की तरफ जाते थे, लेकिन इस बार मैदानी क्षेत्रों की ओर मूव कर रहे हैं। इस कारण हवाओं के साथ बारिश हो रही है। शुद्ध हुए पर्यावरण और घटते प्रदूषण के कारण मौसम में परिवर्तन को लेकर उन्होंने कहा कि जलवायु परिवर्तन के विभिन्न घटक होते हैं, जिनमें से यह भी एक है, लेकिन इस पर विस्तृत अध्ययन के बाद ही इसका पता लग जाएगा।
हर माह आते हैं चार-पांच पश्चिमी विक्षोभ, इस बार मैदानी क्षेत्रों में अधिक प्रभावी
डॉ. खीचड़ के अनुसार पश्चिमी विक्षोभ हर महीने चार से पांच बार आते हैं, लेकिन दिसंबर से मार्च-अप्रैल तक ही अधिक प्रभावी होते हैं। ये पहाड़ों की तरफ हिमाचल, जम्मू-कश्मीर में अधिक प्रभावी होते हैं और वहां बारिश व बर्फबारी करते हैं, जबकि कुछ पश्चिमी विक्षोभ मैदानी क्षेत्रों में प्रभाव डालते हैं और यहां बारिश करते हैं। कभी-कभी ये मई व जून में भी प्रभावी रह जाते हैं। जब प्री-मानसून की बारिश 20 जून के आसपास मैदानी क्षेत्रों में आती है, तब ये अधिक प्रभावी नहीं रहते। हालांकि कई बार मानसून समय में भी ये पश्चिमी विक्षोभ मानसूनी हवाओं के साथ मिलकर अधिक बारिश कर देते हैं।
लगातार पश्चिमी विक्षोभ के कारण लेट हो रही कपास-नरमा की बिजाई
कृषि वैज्ञानिकों के अनुसार लगातार पश्चिमी विक्षोभ और बारिश आने से नरमा-कपास की बिजाई लेट हो रही है, जो किसानों के लिए नुकसानदायक है। जहां पहले बिजाई हो चुकी है, उन्हें फायदा हुआ है। क्योंकि अधिक गर्मी के कारण अंकुरण जलने की समस्या आती थी, जो कम तापमान के कारण नहीं आएगी। हालांकि जहां ओलावृष्टि हुई है, वहां अंकुरित फसल को थोड़ा नुकसान अवश्य हुआ है। इसके अलावा जहां पहले बारिश की संभावना जताए जाने के बावजूद मंडियों में तिरपाल आदि का प्रबंध नहीं किया, वहां फसल भीगने से नुकसान हुआ है।