हिसार। बौद्धिक संपदा का अर्थ किसी नई खोज, शोध का पेटेंट व कॉपीराइट लेना है। हर साल 26 अप्रैल को बैद्धिक संपदा दिवस मनाया जाता है। लाला लाजपतराय विश्वविद्यालय में अब तक 10 नेशनल, एक इंटरनेशनल पेटेंट और एक कॉपीराइट है। 2023 में ही पशुओं में गलघोंटू बीमारी के बारे में लुवास के वैज्ञानिकों को पेटेंट मिला था। प्रो. नरेश कक्कड़ ने बताया कि विवि के कुलपति प्रो. विनोद कुमार वर्मा की देखरेख में वैज्ञानिक लगातार शोध कार्य कर रहे हैं।
पशुओं में गलघोंटू की बीमारी का पता लगाने के लिए नया पेटेंट लिया है। इस तकनीक के माध्यम से गलघोंटू संक्रमित पशुओं के खून के सैंपल लेकर पेटेंट की गई नई तकनीक के साथ मिलाया जाता है। जिसके बाद 5 से 7 मिनट में वह बीमारी के बारे में रिपोर्ट दे देगा। पहले इसी बीमारी के लिए लैब में 2 से 3 दिन का समय लग जाता था। यह तकनीक पोर्टेबल भी है। इसे ग्रामीण इलाकों में आसानी से ले जाया जा सकता है।
इसके अलावा दूध में यूरिया का पता लगाने के लिए भी पेटेंट लिया हुआ है। पशुओं के दूध में यूरिया की मात्रा होने से हेल्थ को नुकसान पहुंचाता है। इसको जांचने के लिए एक फिल्टर पेपर पर दूध की कुछ बूंदों को डाला जाता है और उसके बाद पेटेंट की इस तकनीक के माध्यम से दूध में यूरिया की कितनी मात्रा है या नहीं। इसके बारे में एक मिनट में ही पता चल जाएगा। पेपर पर दूध की बूंद डालते ही यूरिया होने पर उसका कलर बदल जाएगा।
जीजेयू को मिल चुके 16 पेटेंट
वहीं गुरु जंभेश्वर विश्वविद्यालय में पिछले कई सालों से पेटेंट किए जा रहा हैं। अभी तक कुल 16 पेटेंट आ चुके हैं। जिनमें से 3 पेटेंट तो 2023-24 के हैं। पेटेंट सेल के को-ऑर्डिनेटर प्रो. अश्वनी कुमार ने बताया कि जीजेयू में अक्तूबर माह में बौद्धिक संपदा (आईपी) के अधिकारों की जानकारी के लिए एक अवेयरनेस कार्यशाला का आयोजन किया गया था। इसमें करीब 250 से अधिक प्रतिभागियों ने हिस्सा लिया था। कार्यशाला के दौरान प्रतिभागियों को पेटेंट के तरीकों के बारे में जानकारी दी गई थी। पेटेंट करने के लिए अप्लाई कैसे किया जाए इसके लेकर मई माह में एक वर्कशॉप का आयोजन किया जाएगा।