हिसार। भारतीय महिला हॉकी टीम की गोलकीपर सविता पूनिया पद्मश्री पुरस्कार मिलने के बाद शनिवार को पहली बार अपनी कर्मभूमि हिसार पहुंचीं। राजगढ़ रोड स्थित चौधरी चरण सिंह हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय (सीसीएस एचएयू) परिसर के एस्ट्रो टर्फ हॉकी मैदान पर उनका समारोहपूर्वक स्वागत किया गया। इस दौरान उन्होंने अपना पद्मश्री पुरस्कार अपने कोच आजाद मलिक को समर्पित किया।
सविता पूनिया ने खिलाड़ियों को कठिन परिश्रम और अनुशासन के साथ आगे बढ़ने की प्रेरणा दी। उन्होंने कहा कि कोच के सही मार्गदर्शन से ही सफलता संभव है इसलिए खिलाड़ियों को अनुशासन में रहकर लगातार मेहनत करनी चाहिए और अपने से बेहतर प्रदर्शन करने का लक्ष्य रखना चाहिए।
उन्होंने अपनी सफलता का श्रेय पिता महेंद्र सिंह पूनिया, परिजनों और कोच आजाद मलिक सहित सभी प्रशिक्षकों को दिया। सविता ने बताया कि वह वर्तमान में एशियाई खेलों की तैयारी में जुटी हैं और इसी कारण उन्हें बेंगलुरु में प्रस्तावित राष्ट्रीय हॉकी प्रशिक्षण शिविर में शामिल होना है इसलिए वह यहां अधिक समय नहीं रुक सकीं जबकि वह खिलाड़ियों के साथ अधिक समय बिताकर पुरानी यादें साझा करना चाहती थीं।
सविता पूनिया ने कहा कि उन्होंने करीब नौ साल तक इसी मैदान पर अभ्यास किया है और आज वह अपने कोच आजाद मलिक के मार्गदर्शन से इस मुकाम तक पहुंची हैं। उन्होंने कहा कि यदि खिलाड़ी अनुशासन के साथ कठिन मेहनत करें और कोच की बातों को गंभीरता से लें तो सफलता निश्चित रूप से मिलती है।
उन्होंने खिलाड़ियों को यह भी समझाया कि खेल के दौरान कोच द्वारा दी जाने वाली डांट को नकारात्मक रूप से नहीं लेना चाहिए, बल्कि उसे सुधार का अवसर मानना चाहिए। उन्होंने कहा कि कोच भी अभिभावक की तरह ही खिलाड़ियों की गलतियों को सुधारने के लिए डांटते हैं। यदि खिलाड़ी समय रहते अपनी गलतियां सुधार लें तो इसका लाभ खिलाड़ी, टीम और देश सभी को मिलता है।
इस अवसर पर जिला खेल अधिकारी (डीएसओ) नरेश सैनी, भारतीय खेल प्राधिकरण (साई) के खेल प्रशिक्षण केंद्र (एसटीसी) के हॉकी कोच राजेश मलिक, खेल विभाग की हॉकी कोच रुचिका सहित अन्य कोचों ने खिलाड़ियों का उत्साह बढ़ाया। कार्यक्रम में हैंडबॉल कोच अनूप कस्वां, तैराकी कोच विशाल, सेवानिवृत्त ऑडिटर दिलबाग सिंह, राजेश मलिक, कुलदीप सहित अन्य गणमान्य लोग मौजूद रहे।