हिसार। गुरु जंभेश्वर विश्वविद्यालय (जीजेयू) के मनोविज्ञान विभाग में नए सत्र से पोस्ट ग्रेजुएट डिप्लोमा इन रिहेबिलिटेशन साइकोलॉजी (पीजीडीआरपी) शुरू होने जा रहा है। एक साल के इस डिप्लोमा कोर्स में 30 सीटें होंगी। कोर्स का मुख्य उद्देश्य लर्निंग डिसेबलिटी वाले (सीखने में अक्षम) विद्यार्थियों के लिए लिए विशेष काउंसलर या ट्रेनर तैयार करना है। 30 से अधिक आवेदन आने पर एंट्रेस के आधार पर विद्यार्थियों को दाखिला दिया जाएगा।
बचपन से जो बच्चे मानसिक रूप से कमजोर हैं जिनका आईक्यू लेवल सामान्य बच्चे से कम हो, पढ़ाने-लिखने में परेशानी आ रही हो, ऐसे बच्चों को समाज की मुख्य धारा से जोड़ने के लिए ट्रेंड काउंसलर की जरूरत होती हैं। इसके लिए जीजेयू ने पीजीडीआरपी शुरू किया है। इस कोर्स में दाखिला लेने वाले विद्यार्थियों को सिखाया जाएगा कि कैसे सीखने में अक्षम बच्चों के साथ व्यवहार करना चाहिए, उनको किस तरह से समझाना पड़ता है।
जिन विद्यार्थियों को सीखने में समस्या आ रही है, उनकी साइकोलॉजी को कैसे समझाया जाए और उनको समाज की मुख्य धारा के साथ कैसे जोड़ा जाए। इस कोर्स में ऐसे विद्यार्थियों को समझने के लिए ट्रेनिंग दी जाएगी। कोर्स में 30 सीटें निर्धारित की गई है। - प्रो. संदीप राणा, डायरेक्टर सेंटर फॉर काउंसिलिंग एंड वेलबिंग जीजेयू
कुछ बच्चों का बचपन से आईक्यू कमजोर होता है, जिसका कारण आनुवांशिक होता है। इसको बौद्धिक दिव्यांगता कहते हैं। इसके अलावा ऑटिज्म बीमारी में बच्चा सामान्य बच्चों की तरह व्यवहार नहीं करता वह अकेला बैठा रहता है और सोशल नहीं होता। इसमें बच्चों की सोशल डेवलेपमेंट और स्पीच नहीं होती इन्हें बोलने में परेशानी होती है। ये सभी लक्षण 3 से 5 साल के बच्चों में दिखाई देने लगते हैं। जिन बच्चों में आनुवांशिक परेशानी होती हैं वो पूरी तरह से सामान्य नहीं हो सकते। इसके अलावा दूसरी समस्या होने पर दवाइयों व थैरेपी से इलाज संभव है। एक रिसर्च के मुताबिक ज्यादातर मंदबुद्धि के केस आनुवांशिक गुणों के कारण ही होते हैं। - डॉ. प्रशांत, मैनोचिकित्सक, नागरिक अस्पताल हिसार।