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प्रदेश के विवि, शिक्षण व सरकारी संस्थानों के लिए रोल मॉडल बनेगी जीजेयू

Fri, 24 Feb 2017 12:31 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो/हिसार
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सोलर प्लांट - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
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प्रदेेश के सभी विश्वविद्यालय व सरकारी महकमों में बिजली बिलों को कम करने के लिए जीजेयू रोल मॉडल बनने जा रही है। जीजेयू की तरह सौर ऊर्जा संयंत्र लगाने का मॉडल अपनाकर प्रदेश के सरकारी संस्थान ही करोड़ों रुपये की बिजली बचा सकते हैं। बहरहाल जीजेयू के करीब 11 भवनों पर लगने वाले इस संयंत्र से जीजेयू हर वर्ष एक करोड़ रुपये बचाएगी। विश्वविद्यालय के मेकेनिकल इंजीनियरिंग वर्कशॉप की छत से संयंत्र स्थापित करने का काम शुरू कर दिया गया है। 31 मार्च तक विश्वविद्यालय में यह सौर ऊर्जा संयंत्र पूरी तरह से शुरू हो जाएगा। जीजेयू हरियाणा की संभवत: पहली यूनिवर्सिटी है।
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जीजेयू में सौर ऊर्जा संयंत्र स्थापित होने के बाद विश्वविद्यालय को रोजाना 5 हजार यूनिट बिजली देगा। जो कंपनी यह संयंत्र लगा रही है। वह विश्वविद्यालय को 5.37 रुपये प्रति यूनिट के हिसाब से बिजली देगी। इससे विश्वविद्यालय के करीब साढ़े पांच लाख रुपये प्रति माह की बचत होगी। वहीं विभिन्न तरीकों से विश्वविद्यालय सालाना एक करोड़ रुपये इस संयंत्र के कारण बचा लेगा। विश्वविद्यालय और कंपनी का इस 1 मेगावाट के संयंत्र के लिए 25 साल का करार है। संयंत्र का रखरखाव कंपनी द्वारा ही किया जाएगा। कंपनी केवल विश्वविद्यालय के भवनों की छतों का इस्तेमाल करेगी।

हर महीने का बिल 30 लाख के करीब
वर्तमान में सभी टीचिंग ब्लॉकों, हॉस्टलों, प्रोफेसर्स के क्वार्टरों आदि का हर महीने का 30 लाख के करीब बिजली बिल आता है। पूरी यूनिवर्सिटी का एक ही मीटर है। फिलहाल बिजली विभाग विश्वविद्यालय को 8.90 रुपये प्रति यूनिट के हिसाब से बिजली देता है। जबकि सौर ऊर्जा संयंत्र द्वारा दी जाने वाली बिजली इससे 3 रुपये 53 पैसे सस्ती पड़ेगी।
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यहां लगेगा सौर ऊर्जा संयंत्र
यह सौर ऊर्जा संयंत्र विश्वविद्यालय के 11 भवनों पर लगाया जा रहा है। इसकी शुरुआत मेकेनिकल इंजीनियरिंग विभाग से कर दी गई है। यह प्लांट विवि के 7 टीचिंग ब्लॉकों के अलावा ऑडिटोरियम, हरियाणा स्कूल ऑफ बिजनेस, प्रशासनिक भवन व मेकेनिकल इंजीनियरिंग वर्कशॉप पर लगाया जाएगा।

कंपनी अपने खर्च पर ही लगाएगी संयंत्र
इस प्लांट को कंपनी अपने खर्च पर ही लगा रही है। विश्वविद्यालय को किसी भी तरह का पैसा इस संयंत्र के लिए नहीं देना होगा। विश्वविद्यालय संयंत्र लगाने वाली कंपनी से 5.37 रुपये के हिसाब से बिजली खरीदेगा। भारत के सोलर एनर्जी कारपोरेशन ऑफ इंडिया ने सरकारी महकमों में इस कंपनी व बिजली के रेट को सोलर प्लांट लगाने के लिए फिक्स किया हुआ है।

बिजली विभाग को बिजली बेचेगा विवि
गर्मियों की छुट्टियों के दौरान विवि के हॉस्टल व टीचिंग ब्लॉक बंद रहते हैं। इसलिए बिजली की खपत आधी से भी कम हो जाएगी। जो बिजली इस संयंत्र से बचेगी। उसे विश्वविद्यालय द्वारा बिजली विभाग को बेच दिया जाएगा। इससे भी विश्वविद्यालय को लाखों रुपयों का फायदा होगा।
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यह होगा फायदा
- विश्वविद्यालय को बिजली सस्ती मिलेगी। 20 प्रतिशत बिल कम हो जाएगा।
- भवनों की छतों पर लगने वाले सोलर प्लांट केे कारण टॉप फ्लोर के कमरे गर्मियों में अधिक अपेक्षाकृत ठंडे रहेंगे और छतों का इस्तेमाल हो जाएगा।
- विश्वविद्यालय का हर साल करीब 1 करोड़ रुपये बचेगा।
- विश्वविद्यालय को नई बन रही बिल्डिंगों के लिए लोड बढ़वाने की जरूरत नहीं पड़ेगी।
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