फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

जीजेयू में ईसी की मीटिंग 16 को, सेल्फ फाइनेंस टीचर्स को बजट में करने की तैयारी

Sat, 06 May 2017 12:27 AM IST
amarujala/Hisar
विज्ञापन
विज्ञापन
जीजेयू में ईसी (कार्यकारी परिषद) की मीटिंग 16 मई को होगी। इस बार मीटिंग में कुछ अहम एजेंडे रखे जाएंगे। एजेंडों को लेकर टीचर्स में उत्सुकता दिख रही है। सूत्रों की माने तो इस बार एजेंडे में टीचर्स से संबंधित कुछ अहम और नियमों के खिलाफ जाकर फैसले होने वाले हैं। इनमें सेल्फ फाइनेंस बेस पर लगे टीचर्स को बजट में शामिल किया जा सकता है। इसे ईसी की मीटिंग में पास करवाने की तैयारी है। ईसी में पास होने पर इस मामले को लेकर टीचर्स में आपसी विवाद हो सकता है। क्योंकि जिन लोगों को फायदा पहुंचाने की कोशिश की जा रही है। इसमें विशेषकर उन 12 टीचर्स को फायदा होगा, जो वर्ष 2004 में सेल्फ फाइनेंस बेस पर भर्ती हुए थे। 
विज्ञापन

      
प्रिंटिंग, मास कम्युनिकेशन के चार टीचर्स की भर्ती पर मुहर             
हाल ही में जीजेयू प्रशासन ने दो डिपार्टमेंट में भर्तियां निकाली थीं। इनमें मास कम्युनिकेशन में एक असिस्टेंट प्रोफेसर, एक प्रोफेसर को नियुक्त करना था। इसके अलावा प्रिंटिंग डिपार्टमेंट में भी दो टीचर भर्ती करने थे। इसको लेकर जीजेयू प्रशासन ने शॉर्ट लिस्ट से लेकर इंटरव्यू तक का काम पूरा हो चुका है। इंटरव्यू पास करने वाले लोगों का कमेटी ने रिजल्ट लिफाफे में बंद कर ईसी के पास भेज दिया है। यह बंद लिफाफा अब इस ईसी की बैठक में खुलेगा। हालांकि सूत्रों का कहना है कि इस भर्ती में सिलेक्ट होने वाले टीचर्स का नाम पहले ही तय है। इसको लेकर छात्रों ने प्रदर्शन भी किया था।     
 
मीटिंग की सूचना भेजी, एजेंडे भेजे ही नहीं       
जीजेयू प्रशासन ने ईसी की मीटिंग को लेकर सदस्यों के पास सूचना भेजी है, मगर इसके साथ एजेंडे की कॉपी नहीं है। दरअसल एजेंडा गुप्त रखने के लिए ऐसा किया जा रहा है। कहीं एजेंडा लीक न हो जाए, इसको लेकर ऐसा किया जा रहा है। हालांकि एजेंडा सदस्यों को मिलेगा मगर यह मीटिंग से चंद घंटे पहले मिलेगा या एक दो दिन पहले यह तय नहीं है।       
विज्ञापन

      
2015 की ईसी की मीटिंग में बनाई थी कमेटी      
वर्ष 2015 में भी ईसी की मीटिंग में यह एजेंडा रखा गया था। काउंसिल ने कमेटी बनाकर रिपोर्ट देने का फैसला किया था। कमेटी ने अपनी तरफ से अनुशंसा की थी कि इसे एट पार कर दिया जाए, यानी जो सुविधाएं बजट में शामिल टीचर्स के पास हैं, सेल्फ फाइनेंस वालों को भी वैसी ही सुविधाएं मिलेंगी, लेकिन यह टीचर्स को रास नहीं आया।  

सेल्फ फाइनेंस वालों का नहीं होता भविष्य सुरक्षित             
सेल्फ फाइनेंस वाले टीचर्स का एक तरह से भविष्य सुरक्षित नहीं रहता। ऐसे टीचर्स तब तक रहते हैं, जब तक डिपार्टमेंट चल रहे हैं। अगर किसी कारणवश डिपार्टमेंट बंद हो जाए या कोर्स बंद हो जाए तो उन्हें घर जाना पड़ सकता है। जो टीचर्स बजट में हैं, उनके साथ ऐसा नहीं है। यह प्रशासन की सिरदर्दी होगी कि उसी स्थिति में वे उन्हें कहां एडजस्ट करे। दूसरा दोनों की अन्य सुविधाओं में भी अंतर होता है। हालांकि वेतन लगभग दोनों का बराबर होता है।            
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें