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रेफरी ने क्वेश्चन प्वाइंट देकर बना दिया था प्रेशरः गीतिका

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ग्लासगो कॉमनवेल्थ गेम्स में वीमैन फ्री स्टाइल कुश्ती के 63 किलोग्राम भार वर्ग में सिल्वर मेडल हासिल करने वाली गीतिका जाखड़ शनिवार को यहां लौट आई। गीतिका को इस बात की खुशी भी थी कि उसने देश के लिए सिल्वर जीता है, लेकिन इस बात का दुख भी साफ नजर आया कि वह गोल्ड नहीं ला सकी। पेरिस लॉज में पत्रकारों से बातचीत में गीतिका ने फाइनल में कनाडा की पहलवान डेनियल लैपेज से अपनी हार का ठीकरा रेफरी पर फोड़ा।
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गीतिका ने कहा कि उसकी और उसके कोच की नजर में रेफरी द्वारा पहले ही राउंड में डेनियल को दो बार 2-2 अंक के क्वेश्चन प्वाइंट दिया जाना गलत था। यही वजह थी कि वह इतने दबाव में आ गई कि 7-0 के अंतर से हार हुई। रेफरी के इस निर्णय से वह बेहद दबाव में आ गई थी। दूसरी बार क्वेश्चन प्वाइंट के दौरान 30 सेकेंड का वक्त भी नहीं चलाया गया। गीतिका ने कहा कि उसके व उसके कोच के हिसाब से रेफरी का ये निर्णय गलत था। उन्होंने कहा कि हालांकि रेफरी के कई फैसलों को चैलेंज भी किया जा सकता है, लेकिन क्वेश्चन प्वाइंट का फैसला चैलेंज भी नहीं किया जा सकता। ये खालिस तौर पर रेफरी की अपनी सोच के मुताबिक होता है।

गीतिका कहती हैं कि रेफरी के फैसले ने उसकी पूरी कुश्ती बदल दी। डेनियल की लीड हो गई थी और मुझ पर ज्यादा प्रेशर हो गया था, उसके बाद अटैक नहीं हो पाया। उन्होंने कहा कि रेफरी के बीच फैवरिज्म भी रहता है, जिसका खामियाजा भारतीयों को भुगतना पड़ता है।
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दरअसल जब रेफरी को लगता है कि कोई पहलवान जान-बूझकर वक्त बर्बाद कर रही हैं और पीछे हट रही हैं तो वह दूसरी पहलवान को दो अंक का क्वेश्चन प्वाइंट देता है। इससे पहले बाकायदा उस पहलवान को दो अंक अर्जित करने के लिए 30 सेकेंड का वक्त दिया जाता है। अगर वह ऐसा नहीं कर पाता है तो दूसरे पहलवान को फायदा पहुंचता है और उसे दो अंक दे दिए जाते हैं।

गीतिका कहती हैं कि इस दौरे से उन्होंने कई नई बातें सीखी हैं। अगली बार जब भी वे किसी गेम्स में हिस्स लेंगी तो प्रतिद्वंद्वी बराबर की रहने पर वे शुरू से ही अटैकिंग मोड में रहेंगी। उन्हें इस बात का अहसास हो गया है कि क्वेश्चन प्वाइंट से कुश्ती खराब हो सकती है। गीतिका कहती है कि वे अब सितंबर में होने वाले एशियन गेम्स की तैयारी में जुट जाएंगी। उन्होंने उम्मीद जताई कि एशियन गेम्स में भारत की झोली में गोल्ड लाना उनका लक्ष्य रहेगा।
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