हिसार। नगर निगम के डंपिंग स्टेशन पर प्रतिदिन कूड़े में आग लगाई जा रही है। इससे डंपिंग स्टेशन के पास स्थित केंद्रीय राज्य फार्म के स्टाफ व वहां रह रहे 70 परिवारों का बदबू के कारण सांस लेना मुश्किल हो गया है। समस्या के समाधान को लेकर फार्म के अधिकारी नगर निगम से लेकर एनजीटी में गुहार लगा चुके हैं। बावजूद इसके समस्या जस की तस बनी हुई है।
फार्म के एचआर इंचार्ज राजेश सिंह ने बताया कि उनका संस्थान सिरसा रोड पर है। साथ में ही उनके फार्म भी हैं। फार्म के साथ ही नगर निगम की 32 एकड़ जमीन है। पिछले 4 साल से फार्म के साथ लगती जमीन पर का इस्तेमाल डंपिंग स्टेशन व हड्डा रोड़ी के लिए किया जा रहा है। इस कारण से फार्म में कार्यरत कर्मचारियों व यहां बने स्टाफ क्वार्टर में रहने वाले परिवारों को बड़ी परेशानी उठानी पड़ रही है। यही नहीं निगम के कर्मचारी यहां रोज कचरे में आग लगवा देते हैं। आगे लगने से उठने वाले धुएं ने उनका जीना मुश्किल कर दिया है। इसी सप्ताह मंगलवार को यहां कचरे में आग लगाई थी। दमकल की 4 गाड़ियों ने मौके पर पहुंचकर आग पर काबू पाया।
बुजुर्ग दमा के होने लगे शिकार
राजेश सिंह के मुताबिक कचरे को जलाने से पैदा होने वाले धुएं के कारण परिवारों में रह रहे बुजुर्गों को सांस संबंधी बीमारियां होने लगी हैं। इसी को देखते हुए परिवारों ने बुजुर्गों को अपने रिश्तेदारों के घर भेज दिया है। यही नहीं पिछले वर्ष मार्च में यहां धुएं के कारण से कई वाहन आपस में टकरा गए थे, जिसमें दो लोगों की मौत भी हो गई थी।
निगम कचरा जलाने पर करता है जुर्माना
विडंबना यह है कि निगम प्रशासन कचरा जलाने पर न्यूसेंस का चालान करता है। मगर खुद निगम के डंपिंग स्टेशन पर कचरा जलाया जा रहा है, जिससे वह रोक नहीं पा रहा है। एनजीटी की गाइडलाइन के अनुसार भी कचरा जलाना गैर कानूनी है।
हमने नगर निगम पर कचरे का प्रबंध न करने पर 39 लाख रुपये का जुर्माना लगाया हुआ है। साथ ही उसे कचरे के प्रबंधन को लेकर जरूरी दिशा निर्देश भी दिए हुए हैं। फिलहाल यह मामला एनजीटी में गया हुआ है, जिसकी सुनवाई 6 सितंबर को है। - सुनील श्योराण, वरिष्ठ वैज्ञानिक, हरियाणा प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड
नगर निगम ने कचरा उठाने के लिए 20 ट्रैक्टर-ट्रॉली किराये पर लिए
नगर निगम ने कचरा उठाने के लिए 20 और ट्रैक्टर-ट्रॉली किराये पर लिए हैं। इसके साथ ही निगम के पास 50 ट्रैक्टर ट्रॉलियां हो गई हैं। अधिकारियों के अनुसार गाड़ियों की संख्या बढ़ने से कचरा उठान की व्यवस्था में सुधार आएगा। बता दें कि निगम के पास खुद के 10 ट्रैक्टर-ट्रॉली हैं, जबकि 20 ट्रैक्टर-ट्रॉली एजेंसी से किराये पर लिए हुए थे। इनमें से 10 ट्रैक्टर ट्रॉली का टेंडर पूरा हो गया था। इसे देखते हुए निगम की तरफ से 20 ट्रैक्टर-ट्रॉली किराये पर लेने के लिए टेंडर लगाया गया था। निगम की तरफ से एजेंसी को टेंडर अलॉट करने के बाद वर्क ऑर्डर भी जारी कर दिया गया है।
एजेंसी को 65 प्रतिशत राशि का भुगतान करने का प्रपोजल तैयार
निगम प्रशासन ने वार्ड 1 से 10 में डोर टू डोर कचरा उठाने वाली एजेंसी को 65 प्रतिशत राशि का भुगतान करने का प्रपोजल तैयार किया है। हालांकि एजेंसी ने 76 प्रतिशत राशि का भुगतान करने को कहा है। मुख्यालय से प्रपोजल को मंजूरी मिलने के बाद निगम एजेंसी को उक्त राशि का भुगतान कर देगा, जिसके बाद एजेंसी कचरा उठाने का काम फिर से शुरू कर देगी। अधिकारियों की मानें तो निगम ने 6.33 करोड़ रुपये में एजेंसी को ठेका दिया हुआ है। एजेंसी ने करीब ढाई माह तक कार्य किया था, उसके बाद भुगतान न होने पर काम बंद कर दिया था।
भुगतान न करने के पीछे निगम का तर्क है कि कचरे का निपटान न करने की वजह से एजेंसी को भुगतान नहीं किया जा सकता, वहीं एजेंसी का कहना है कि निगम ने उसे प्लांट लगाने के लिए जमीन उपलब्ध नहीं करवाई, जिस कारण वह कचरे का निपटान नहीं कर सका। पिछले दिनों यूएलबी मुख्यालय ने निगम प्रशासन को एजेंसी का भुगतान करने की अनुमति दे दी। एजेंसी के काम बंद करने के बाद से शहर की सफाई व्यवस्था गड़बड़ाई हुई है।