हाउस टैक्स को लेकर बार-बार कंपनी पर आरोप लगाने वाले मामले में वीरवार को आयोजित हाउस की मीटिंग में कंपनी के प्रोजेक्ट मैनेजर ने चौंकाने वाले खुलासे किए हैं। उन्होंने कहा कि नगर निगम की तरफ से उन्हें डीसी एवं तत्कालीन निगम आयुक्त का लेटर मिला था। इसमें सर्वर से पांच हजार से ज्यादा रसीदों का पोस्टिंग रिकॉर्ड हटाने के लिए कहा था। इन पांच हजार से ज्यादा प्रॉपर्टी मालिकों का कितना बकाया टैक्स था, अथवा अभी तक उन्होंने कितना भरा था, इसका पूरा रिकॉर्ड सर्वर से हटवा दिया गया। पांच हजार प्रॉपर्टी का रिकॉर्ड इस तरह से गायब करना लाखों रुपये के घपले की आशंका जता रहा है।
मीटिंग में टैक्स ब्रांच के कारिंदे कंपनी पर आरोप लगाते रहे, लेकिन कमिश्नर अशोक बंसल ने भी कंपनी के प्रोजेक्ट मैनेजर की बात सुनने के बाद उसका ही पक्ष लिया। कमिश्नर ने हाउस के सामने भी साफ कहा कि गलती निगम की है। कंपनी ने जो काम किया, वह सही था। निगम को जो काम करके देना था, अथवा किसी काम को ठीक करवाना था, उस टाइम पीरियड पर उन्होंने कंपनी को नहीं बताया। इस मामले के बाद नगर निगम में हंगामा मच गया है। 51 के करीब जी-8 बुक का रिकॉर्ड सर्वर से हटाने का आखिर कारण क्या था। निगम के छोटे से लेकर बड़े अधिकारी सवालों के घेरे में आ गए।
क्या असली है डीसी का हस्ताक्षर वाला लेटर
इस मामले के बाद निगम में सवाल पर सवाल उठने लगे हैं। कर्मचारी आपस में बातचीत कर रहे हैं कि आखिर सर्वर से हटाए गए 51 जी-8 (एक जी-8 में 100 रसीद होती है) के रिकॉर्ड असल में डीसी के आदेश पर हटाए गए हैं। जो लेटर कंपनी को थमाया गया था, क्या वह भी असल में डीसी ने ही भिजवाया था या उस पर भी किसी के फर्जी हस्ताक्षर हैं।
कमिश्नर ने चलाईं 10 से ज्यादा जांच की फाइलें
मामले को लेकर जनप्रतिनिधियों ने सवाल उठाए। मेयर शकुंतला राजलीवाला, सीनियर डिप्टी मेयर दयानंद सैनी, भीम महाजन ने कहा कि अगर ऐसा है तो आप संबंधित अधिकारियों को चार्जसीट क्यों नहीं करते। इस पर कमिश्नर ने कहा कि ये नहीं कि मैं इस पूरे मामले को अनदेखा कर रहा हूं। मैंने 10 से अधिक फाइलें चला दी हैं। जांच होगी, जो भी दोषी मिलेगा, उसे किसी हालात में बख्शा नहीं जाएगा।
हमने नहीं किया सर्वर बंद, खुद हो गया : प्रोजेक्ट मैनेजर
प्रोजेक्ट मैनेजर ने कहा कि पिछले साल हमने सारे रजिस्टर, सीडी सहित पूरा रिकॉर्ड जमा करवा दिए। हमने वर्ष 2014-15, 2015-16 के बिल तैयार किए थे। हमने दो दिन के अंदर बिल बनवाकर दे दिए। कंपनी की कोई गलती नहीं। हमने सीडी में डाटा दे दिया था, लेकिन डीसी ने कहा कि हमारे पास सर्वर नहीं, दिसंबर तक आप अपने सर्वर पर डाटा ऑनलाइन कर दो, हम आपको एनुअल मेंटेनेंस कॉस्ट दे देंगे। हमने सर्वर किराये पर 31 मार्च तक ले रखा था। जैसे ही टाइम पीरियड खत्म हो गया, हमारा सर्वर बंद हो गया। निगम ने आरोप लगाए कि कंपनी ने सर्वर बंद कर दिया। मैनेजर ने कहा कि हमें बंद करना होता तो निगम के साथ सर्वर उपलब्ध करवाने का दिसंबर तक का एग्रीमेंट था, लेकिन बाद तक हमने अपने सर्वर पर ही निगम का टैक्स रिकॉर्ड रखा।
हो सकता है रिवर्ट डाटा
प्रोजेक्ट मैनेजर का कहना है कि ये नहीं कि ये डाटा रिकवर नहीं होगा। ये डाटा रिवर्ट हो जाएगा। रिकवरी सॉफ्टवेयर के जरिये इसे वापस लाया जा सकता है, लेकिन ये होगा तभी, जब निगम के अधिकारी चाहेंगे और लिखित में कंपनी को देंगे।
हम मामले की जांच करवा रहे हैं। इसको लेकर कई फाइलें चला रखी हैं। हाउस ने एक बार 10 लाख रुपये कंपनी को देने के एजेंडे पर मुहर लगा दी है। कंपनी को पेमेंट करने के बाद कंपनी पूरा डाटा अपडेट करके देगी।
- अशोक बंसल, कमिश्नर नगर निगम