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लाडवा गौशाला में शुरू हुआ उत्तर भारत का पहला प्राकृतिक चिकित्सा संस्थान

Wed, 02 Mar 2016 02:08 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला हिसार
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श्री लाडवा गौशाला में मंगलवार को प्राकृतिक योग चिकित्सा संस्थान शुरू किया गया। प्राकृतिक चिकित्सा के साथ पारंपरिक भोजन, गौ अर्क से उपचार का यह प्रदेश का पहला संस्थान होगा, जिसमें राशि प्रभाव और वास्तु शास्त्र को भी शामिल किया जाएगा।
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लाडवा गौशाला के प्रधान आनंदराज ने बेहद सादे कार्यक्रम में इस संस्थान को जनता को समर्पित किया। इसमें स्टीम बाथ, शॉवर बाथ, सन बाथ, फिजियोथैरेपी, एक्यूप्रेशर, बमन क्रिया, अनीमा, रबड़ नेती, जल नेती, शिरोधारा, पंचकर्म, पंचगाव्य को अपनाकर प्राकृतिक उपचार दिया जाएगा।



इसमें लीवर, माइग्रेन, साइनेस, पैरालायसिस, स्किन एलर्जी, मोटापा, अकड़न, हाथ-पैर सूनापन, शुगर, कैंसर, एड्स सहित अन्य बीमारियों का उपचार किया जाएगा।




नेचुरोपैथी की चिकित्सक डॉ. रीतू जैन ने कहा कि ओपीडी की सेवाएं भी शुरू हो गई हैं। अपनी बीमारी के अनुसार यहां उपचार प्राप्त कर सकते हैं। बीमारी के अनुसार एक संस्थान में रहकर उपचार ले सकते हैं। यहां किसी तरह की एलोपैथिक दवा का उपयोग नहीं किया जाएगा। प्राकृतिक संसाधनों का उपयोग करते हुए चिकित्सा दी जाएगी। गौशाला के टोल फ्री नंबर, वेबसाइट से भी इसकी जानकारी हासिल कर सकते हैं।
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ऐसा बनाया संस्थान......
 गौशाला के समन्वयक महेंद्र पारता ने बताया कि संस्थान में कुल 21 कमरे तैयार किए गए हैं, जिनमें सात कक्ष राशि के रंग के अनुसार और वास्तु के हिसाब से बनाए गए हैं। इसके अलावा मेडिटेशन हॉल, योगा हॉल, बाथ के लिए अलग कक्ष तैयार किए गए हैं। ओपीडी रूम,  इंडोर स्पोर्ट्स रूम, प्राकृतिक रसोई भी तैयार की गई है।
बिना एसी कूल रहेंगे कक्ष..........
इस पूरे केंद्र में कहीं पर एयर कंडीशनर नहीं लगाया जाएगा। हर कमरे की दीवारों के बीच डस्ट डाला गया है। छत पर पानी की टंकी रखी जाएगी, जिससे पानी सप्लाई होकर दीवारों में जाएगा। दीवार प्राकृतिक तौर पर ठंडी रहेंगी। कुछ कमरों को गाय के गोबर-मिट्टी से लेप तैयार बनाया गया है। यहां गाय के घी का दीपक जलाया जाएगा। मनोरंजन के लिए हर कक्ष में एलईडी लगाई है।


पारंपरिक तरीके से बनेगा देसी भोजन
यहां गौशाला में जैविक खेती से तैयार किए गए अन्न-सब्जियों को रसोई में पकाया जाएगा। पकाने के लिए प्राकृतिक तरीके, मिट्टी, तांबे, लोहे के बर्तनों का उपयोग किया जाएगा। तांबे-पीतल के बर्तनों में ही इसे परोसा जाएगा। हर खाद्य सामग्री में गाय का दूध, गाय का घी उपयोग होगा।

जनता की सेवा के लिए इसे शुरू किया गया है। गौशाला परिसर में बने इस संस्थान को बेहतर तरीके से चलाया जाएगा। उत्तर भारत का  अपनी तरह का यह पहला संस्थान होगा, जिसमें प्राकृतिक चिकित्सा, मेडिटेेशन, योगा, आयुर्वेद, प्राकृतिक जैविक भोजन, राशि प्रभाव, वास्तु को एक साथ अपनाया जाएगा।
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आनंदराज, प्रधान लाडवा गौशाला
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