हिसार। मत्स्य पालकाें के लिए खुशखबरी है। अब उन्हें प्रधानमंंत्री मत्स्य किसान समृद्धि सह योजना के तहत बीमा सुविधा दी जाएगी। ऐसे में वह मछलियों का बीमा भी करवा सकेंगे। यह भारत सरकार की योजना है। यह पहली ऐसी योजना है, जिसमें बीमे की सुविधा भी दी गई है। हालांकि अभी तक बीमा के लिए किसी मत्स्य पालक ने आवेदन नहीं किया है।
इस योजना के तहत मछलियों को बीमा करवाने व योजना का लाभ उठाने के लिए मत्स्य पालकों को एनएफडीपी (नेशनल फिशरिज डिस्ट्रिक्ट प्लेटफार्म) पर आवेदन करना होगा। इस योजना का लाभ गांव स्तर पर बने संगठन, सेल्फ हेल्प ग्रुप और फार्मर प्रोड्यूसर ऑर्गेनाइजेशन (एफपीओ) व स्टार्टअप उठा सकते हैं। हालांकि बीमा सुविधा का लाभ कोई भी मत्स्य पालक उठा सकता है।
योजना के तहत लगाई जा सकती हैं ये यूनिट
- फिश फीड
- कोल्ड स्टोर
- फिश कल्चर
- बीज का उत्पादन
परफॉर्मेंस ग्रांट की भी सुविधा
इस योजना के लाभार्थियों को परफॉर्मेंस ग्रांट की सुविधा भी दी जाएगी। इसके तहत विभाग लाभार्थियों की परफॉर्मेंस की जांच करेगी। अगर विभाग उनकी परफॉर्मेंस से संतुष्ट नजर आता है तो उन्हें परफॉर्मेंस ग्रांट दी जाएगी।
हिसार से दिल्ली व फरीदाबाद जाती हैं मछलियां
जिले में मीठे व खारे पानी दोनों में मछली उत्पादन किया जाता है। खारे पानी में झींगा मछली पालन किया जाता है। मीठे पानी की मछलियां यहां से दिल्ली और फरीदाबाद भेजी जाती है। वहीं, झींगा मछली गुजरात और आंध्रप्रदेश जाती है। दोनों ही जगह कोल्ड स्टोर बने हुए हैं। यहां से फिर मछलियां विदेश में भेजी जाती हैं।
जिले में बढ़ रहा मछली उत्पादन
अधिकारियों की मानें तो लॉकडाउन से पहले जिले में 17 किसान ही मछली उत्पादन करते थे। मगर लॉकडाउन के बाद मछली उत्पादन के प्रति लोग आकर्षित हुए। आज के समय में जिले में करीब 250 किसान मछली पालन का व्यवसाय कर रहे हैं। जिले में 60 एकड़ में झींगा पालन व एक हजार एकड़ में मीठे पानी की मछलियों का पालन किया जाता है।
पहली बार मत्स्य पालकों के लिए मछलियों के बीमा की योजना शुरू हुई है। ऐसे में मछलियां मरने पर मत्स्य पालक इस योजना का लाभ उठा सकते है। भारत सरकार की इस योजना को पहली बार लागू किया गया है। - भीमसैन बेनीवाल, जिला मत्स्य अधिकारी