पुलिस का कहना है कि यही बात डीएसपी अभिमन्यु और डीएसपी हरप्रीत द्वारा जब आंदोलनरत किसान जिंदल पुल के नीचे से अस्पताल की ओर जाने वाले रास्ते पर आगे बढ़ रहे थे, तब भी बार बार कही गई और उनको आगे बढ़ने से रोकने का भरसक प्रयत्न किया गया।
पुलिस का कहना है कि यह बात भी सही है कि वरिष्ठ किसान नेताओं द्वारा भी आंदोलरत किसान भाइयों में सम्मिलित शरारती तत्वों और नवयुवकों को उस रास्ते पर जाने से रोकने का बहुत प्रयास किया था, लेकिन आंदोलन में सम्मिलित नौजवान आंदोलनकारियों ने किसी की नहीं सुनी।
उन्होंने जिंदल पुल के पास लगाए नाके को तहस-नहस करते हुए आगे बढ़ते हुए वहां पर नियुक्त डीएसपी और अन्य पुलिस बल के साथ धक्कामुक्की की और नवनिर्मित चौधरी देवीलाल संजीवनी अस्पताल के प्रवेश द्वार तक पहुंच गए।
पुलिस का कहना है कि वहां पर जब आंदोलनरत नौजवान शरारती तत्वों को डीआईजी, एएसपी और डीएसपी ने अन्य पुलिस बल सहित रोकने का प्रयास किया तो शरारती तत्वों ने पुलिस अधिकारियों व पुलिस बल पर कई बार गाड़ियों और ट्रैक्टर से टक्कर मारकर घायल करने का प्रयास किया और पुलिस कर्मचारियों पर भारी पथराव कर दिया।
अस्पताल को तोड़फोड़ से बचाने के लिए व कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए इन शरारती तत्वों को अस्पताल के अंदर घुसने से रोकने के लिए मजिस्ट्रेट के आदेश पर प्रथम आंसू गैस का प्रयोग किया गया और उसके बाद हल्का बल प्रयोग किया गया।
पुलिस का कहना है कि शरारती तत्वों ने किसी की भी न सुनते हुए कानून व्यवस्था बिगड़ने की स्थिति पैदा की। पुलिस ने कहा कि आंदोलनरत किसान नेताओं द्वारा अधिकारियों से शाम को 7:00 बजे के बाद बात हुई, जबकि यह घटना दोपहर 12:30 बजे की है।
पुलिस द्वारा ऑनलाइन किसी भी हिंसक घटना व अपराध से संबंधित सभी गतिविधियां स्वत ही रियल टाइम पर कंप्यूटर में दर्ज की जाती है और इस घटना से संबंधित सभी प्रविष्टियां भी कंप्यूटर में दर्ज की जा रही थीं और एफआईआर से संबंधित सभी प्रविष्टियां दर्ज की जा चुकी थीं। वहीं किसानों के साथ हुई बैठक के दौरान आईजी ने एफआईआर नहीं होगी, इस तरह का कोई आश्वासन नहीं दिया था।