सुंदर नगर में उजागर हुए लिंग जांच प्रकरण में पुलिस ने आखिर चूड़ामणि अस्पताल की नर्स प्रेम को गिरफ्तार कर लिया है। मामले में यह सातवीं गिरफ्तारी है।
आरोप है कि वह गर्भवती महिलाओं को लिंग जांच के लिए तैयार कर उनको प्रवीन, धर्मेंद्र के पास भेजती थी। उसे इसमें पर्याप्त हिस्सा मिलता था। पूछताछ में पुलिस को उससे कई अहम क्लू मिले हैं।
कुछ नामों का खुलासा भी उसने किया है। पुलिस अब कुछ और लोगों जिनमें एक केमिस्ट भी है कि गिरफ्तारी के प्रयास में लगी है। मामले में जिस डॉक्टर का नाम बार-बार आया, पुलिस फिलहाल उसकी गिरफ्तारी के सवाल पर मुंह नहीं खोल रही है।
आईजी की स्पेशल टीम व स्वास्थ्य विभाग की संयुक्त कार्रवाई में 28 जून को सुंदनगर में एक स्टिंग के बाद पुलिस ने धर्मेंद्र व जयबीर को गिरफ्तार कर बड़े लिंग जांच प्रकरण का भंडाफोड़ किया था।
पुलिस ने हालांकि इसके बाद सोमवार सायं हांसी में भी छापा मार कर वहां भी एक अस्पताल में लिंग जांच का खुलासा किया है, लेकिन हिसार प्रकरण को भी पुलिस की कार्रवाई जारी रही। मंगलवार को पुलिस ने चूड़ामणी अस्पताल में छापा मार कर नर्स प्रेम को गिरफ्तार कर लिया।
पुलिस एक सप्ताह पहले ही उसके क्वार्टर को खंगाल चुकी थी, पर उसे गिरफ्तार नहीं किया जा सका था। गिरफ्तारी के बाद पुलिस ने उससे पूछताछ की और कई अहम जानकारी हाथ लगने के बाद उसे कोर्ट में पेश कर न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया गया।
अब तक इनकी गिरफ्तारी
हिसार के सुंदरनगर लिंग जांच प्रकरण में पुलिस अब तक सात आरोपियों को गिरफ्तार कर चुकी है। इनमें एक महिला है। गिरफ्तार हुए व्यक्तियों में धर्मेंद्र व जयबीर को जहां पहले ही दिन पकड़ा गया, वहीं तीन दिन बाद प्रकरण का मुख्य सरगना प्रवीन पुलिस के हत्थे चढ़ा।
इसके बाद पुलिस ने राजेश, सुरेंद्र व सतीश को भी गिरफ्तार किया। अब अंत में महिला नर्स प्रेम की गिरफ्तारी हुई है। पुलिस इस मामले में गर्भपात कराने वाली महिला को तलाश कर उसके बयान भी कोर्ट में दर्ज करा चुकी है।
डॉक्टर की गिरफ्तारी पर चुप्पी
लिंग जांच प्रकरण मे पकड़े गए आरोपियों के मुंह से एकचिकित्सक का नाम भी कई बार निकला है। आरंभ में पुलिस जहां इस मामले में उनकी अहम भूमिका मान कर चल रही थी, वहीं अब उनसे पूछताछ व गिरफ्तारी के सवाल पर पुलिस मुंह नहीं खोल रही है।
गर्भपात के लिए जिस केमिस्ट से दवा ली जाती थी पुलिस उस पर छापा मार कर उसे सील कर चुकी है, लेकिन केमिस्ट की गिरफ्तारी नहीं हो पाई है। मामले का सबसे अहम पहलु यह है कि पुलिस ने आरंभ में पोर्टेबल अल्ट्रासाउंड मशीन होने का दावा किया था, लेकिन अब तब न तो मशीन का पता चला है और न ही फेंके गए भ्रूणों के बारे में कोई ठोस बात सामने आई है।