डाबड़ा स्थित चौधरी बजेसिंह कुश्ती एवं शिक्षा प्रशिक्षण केंद्र में कुश्ती का अभ्यास करता सचिन
हिसार। जोश, लगन और किसी लक्ष्य को हासिल करने का जज्बा हो तो विपरीत परिस्थितियों में भी आगे बढ़ने से कोई नहीं रोक सकता। माता-पिता का साथ मिले और कोच के निर्देशन में कड़ी मेहनत की जाए तो सफलता जरूर मिलेगी। मैं किसान परिवार से हूं। परिवार की आर्थिक स्थिति सामान्य है। बावजूद इसके पिता सुरेश कालीरावण ने मुझे कुश्ती में कॅरियर बनााने का हौसला दिया। मैंने भी मेहनत में कमी नहीं रखी और नेशनल स्तर पर स्वर्ण पदक जीते।
अब मेरा सपन अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पदक जीतकर माता-पिता, कोच और देश का नाम रोशन करना है। इसके लिए मैं डाबड़ा स्थित चौधरी बजेसिंह शिक्षा एवं कुश्ती प्रशिक्षण केंद्र में कोच राहुल बेरवाल के पास अभ्यास कर रहा हूं। मुझे बचपन से ही कुश्ती देखने का शौक था। पहलवान सुशील कुमार का मुकाबला देखता था। 2010 में सुशील वर्ल्ड चैंपियन बने तो उनसे काफी प्रेरित हुआ। परिवार ने साथ दिया तो कुश्ती में ही कॅरिअर बनाने की ठान ली और 2017 में मैट पर उतर गया। अब तक नेशनल स्तर पर सात टूर्नामेंट खेल चुका हूं। सभी में पदक हासिल किए हैं। (जैसा कि डाबड़ा के पहलवान सचिन ने बताया)
-
ये हैं सचिन की उपलब्धियां
- सीनियर नेशनल चैंपियनशिप में स्वर्ण पदक
- सब जूनियर नेशनल चैंपियनशिप में स्वर्ण पदक
- खेलो इंडिया यूनिवर्सिटी गेम्स में स्वर्ण पदक
- ऑल इंडिया यूनिवर्सिटी चैंपियनशिप में स्वर्ण पदक
- खेलो इंडिया यूथ गेम्स में कांस्य पदक
- दो बार ग्रैंड प्रिक्स नेशनल चैंपियनशिप में कांस्य पदक