नहरी पानी की मांगों को लेकर विरोध मार्च निकालते किसान।
हिसार। पंजाब सरकार के भाखड़ा बांध से पानी रोकने से हरियाणा में नहरी पानी की किल्लत पर शुक्रवार को किसानों का गुस्सा फूट पड़ा। किसानों ने प्रदेश सरकार को पांच दिन का अल्टीमेटम देते हुए चेतावनी दी है कि यदि इस मुद्दे का समाधान जल्द नहीं किया गया तो वे बड़े स्तर पर आंदोलन का निर्णय लेंगे। किसानों का आरोप है कि हरियाणा, पंजाब और केंद्र सरकार मिलकर किसानों के खिलाफ साजिश रच रही हैं और दोनों राज्यों के किसानों को आपस में लड़ाने का प्रयास किया जा रहा है।
संयुक्त जल संघर्ष समिति के आह्वान पर जिले भर के गांवों से आए किसान संगठन एचएयू गेट नंबर चार के सामने स्मृति वन पार्क में एकत्र हुए। इसके बाद लघु सचिवालय तक प्रदर्शन मार्च निकाला। प्रदर्शन का नेतृत्व सूबेदार हरिसिंह, सूरजभान डाया, पूर्व सरपंच जगदीश लौरा और संदीप सिवाच ने किया।
समिति के प्रधान विजेंद्र बेनीवाल ने बताया कि गांवों के जलघर सूखे पड़े हैं और लोगों को तीन से चार दिन में केवल एक बार पानी मिल रहा है। वह भी खारा। बोरवेल का पानी पीने और सिंचाई के योग्य नहीं है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकारें पानी की आपूर्ति के गलत आंकड़े पेश कर जनता को गुमराह कर रही हैं।
पगड़ी संभाल जट्टा किसान संघर्ष समिति के प्रदेशाध्यक्ष मनदीप नथवान ने कहा कि यह किसानों को आर्थिक रूप से कमजोर करने की साजिश है। यदि समय पर पानी नहीं मिला तो किसान कपास की बिजाई नहीं कर पाएंगे। इस मौके पर सत्यवीर गढ़वाल, सत्यवीर पूनिया, दिलबाग हुड्डा, सुरेंद्र आर्य, सतपाल काजला, बलराज बिजला, सुरेश कामरेड, राजू खरड़, हर्षदीप गिल, रणधीर बामल, महावीर सिंघवा, सरपंच पवन बासड़ा, रोहतास, आशीष गोदारा, तारीफ सेवदा, कपूर सिंह आर्य आदि मौजूद रहे।