हांसी (हिसार)। किसान नेता प्रेम मलिक को दिल्ली में हिरासत में लिए जाने से किसान भड़क गए और रामायण टोल प्लाजा पर जाम लगा दिया। जाम की सूचना पाकर दिल्ली पुलिस ने प्रेम मलिक को छोड़ दिया। जिसके बाद किसानों ने जाम खोला। किसान आंदोलन के छह माह पूरे होने पर किसानों ने काला दिवस मनाया। किसानों ने टोल प्लाजा पर काले झंडे फहराए। प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री के पुतले फूंके।
बुधवार को सुबह नौ बजे किसानों के पास सूचना आई कि हांसी से समाजसेवी व किसान नेता प्रेम मलिक को दिल्ली में पुलिस ने हिरासत में ले लिया हैं। इसके साथ ही किसान रामायण टोल पर एकत्रित होने लगे और सुबह 10:30 बजे हाईवे को जाम कर दिया। जाम लगने से भारी संख्या में वाहनों की लंबी-लंबी कतार हाईवे पर लग गई और मौके पर भारी पुलिस बल पहुंच गया। जैसे ही जाम की सूचना दिल्ली पुलिस तक पहुंची तो किसानों के दबाव में आकर प्रेम मलिक को छोड़ना पड़ा। उसके बाद दोपहर 12 बजे किसानों ने रामायण टोल को खोला।
काले झंडे लगाकर व पुतले जलाकर किया प्रदर्शन
केंद्रीय कृषि कानूनों के विरोध में 180 दिनों से आंदोलनरत किसानों ने बुधवार को रामायण टोल प्लाजा पर विरोध दिवस मनाते हुए काले झंडे लगाकर व पुतले जलाकर सरकार के खिलाफ विरोध प्रदर्शन किया। इसके साथ ही धरने पर बुद्ध पूर्णिमा पर्व भी मनाया गया। किसान यूनियन के जिला अध्यक्ष कुलदीप खरड़ व दशरथ मलिक ने कहा कि आज सरकार पूरी तरह से दिशाहीन हो चुकी है। उन्हें किसी भी वर्ग की जरूरत नहीं और सरकार पूरे घमंड में चूर है। इस लिए किसानों से वार्ता करने को तैयार नहीं है। हम भी अपने वादे पर डटे हुए हैं। जब तक तीनों कानून वापस नहीं होते, तब तक हमारा आंदोलन चलता रहेगा। इसके लिए हमने 2024 तक की तैयारी की हुई है।
मैं जेल जाने से नहीं डरता
मैं मुकदमों व जेल जाने से डरने वाला नहीं हूं। एक किसान का बेटा हूं। किसानों के लिए अपनी जान भी देने के लिए तैयार हूं। बुधवार को मैं प्रीतमपुरा अपने घर से टीकरी बॉर्डर के लिए निकला तो मैंने उस समय काला कुर्ता पायजमा, काली पगड़ी पहनी हुई थी। इसके अलावा मैंने काले रंग की गाड़ी ली हुई थी, जिस पर काले झंडे लगे हुए थे। जब मुंडका पहुंचा तो वहां पर मुझे हिरासत मेें ले लिया। डेढ़ घंटे तक पुलिस ने मुझे बंधक बनाए रखा। झाड़ोदा पहुंचा तो वहां पर भी पुलिस ने मुझे रोक लिया। काले झंडे व अपने कपड़ों को बदलने के बाद ही आगे जाने की बात कही। गुरनाम सिंह चढूनी को इस बात की भनक लगी तो उन्होंने तुरंत थाना प्रभारी व डीसीपी से बात की। उसके बाद मुझे छोड़ा गया।
- प्रेम सिंह मलिक, किसान नेता।