नगर निगम के अधिकारी आरटीआई के जवाब में भी प्रॉपर्टी टैक्स संबंधी पुख्ता जानकारी उपलब्ध नहीं करवा रहे हैं। 31 मार्च तक प्रॉपर्टी टैक्स पर कितना ब्याज माफ किया गया, यह जानकारी भी छुपाने की कोशिश की जा रही है। अधिकारियों द्वारा जानकारी छुपाने के लिए प्रॉपर्टीधारकों को ही ढाल बनाया जा रहा है।
दरअसल, शहर के आरटीआई कार्यकर्ता तिलकराज ने नगर निगम प्रशासन से विद्युत नगर, सनसिटी, डाबड़ा चौक स्थित ग्रेस होटल सहित कुछ प्रॉपर्टीज की आरटीआई के जरिये यह जानकारी मांगी थी कि इन प्रॉपर्टी का 31 मार्च तक प्रॉपर्टी टैक्स का कितना ब्याज माफ किया गया और इनका कितना टैक्स जमा हुआ।
यह मिला अधिकारियों से जवाब
आरटीआई कार्यकर्ता को दिए जवाब में प्रॉपर्टी टैक्स ब्रांच के अधिकारियों का कहना है कि इन प्रॉपर्टीधारकों ने लिखित में दिया है कि उनकी प्रॉपर्टी से संबंधित जानकारी का खुलासा न किया जाए। इसलिए निगम प्रशासन यह जानकारी देने में असमर्थ है। बुधवार को आरटीआई कार्यकर्ता इस मामले में प्रॉपर्टी टैक्स ब्रांच के अधीक्षक से भी मिलने पहुंचे। आरटीआई कार्यकर्ता का कहना है कि उन्होंने प्रॉपर्टीधारक की कोई निजी जानकारी नहीं मांगी है। सिर्फ यह जानना चाहा है कि नगर निगम प्रशासन ने कितना टैक्स जमा करवाया और कितना ब्याज माफ किया है। यह जानकारी तो सार्वजनिक होनी ही चाहिए।
विद्युत नगर की सड़कों का नहीं लिया जा रहा प्रॉपर्टी टैक्स
आरटीआई कार्यकर्ता का आरोप है कि विद्युत नगर बिजली निगम के कर्मचारियों की रिहायशी कॉलोनी है। इस कॉलोनी में अन्य किसी व्यक्ति का आवागमन नहीं होता है। ऐसे में यह कॉलोनी निजी मानी जाएगी। मगर नगर निगम प्रशासन इन निजी कॉलोनी की सड़कों का प्रॉपर्टी टैक्स जमा नहीं करवा रहा है।
मुझे मामले की ज्यादा जानकारी नहीं है। एक्ट में शायद ऐसा है कि जानकारी देने से कोई उपभोक्ता मना करने को कहे तो नहीं दी जा सकती। बाकी आरटीआई कार्यकर्ता प्रथम व द्वितीय स्तर पर भी अपील कर सकता है।
- डॉ. प्रदीप कुमार, डीएमसी, नगर निगम