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Hisar News: राखीगढ़ी में साइट नंबर-2 पर खोदाई से खुले औद्योगिक रहस्य

Tue, 05 May 2026 01:20 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, हिसार
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नारनौंद क्षेत्र के गांव राखीगढ़ी में खोदाई के दौरान साइट-2 पर निकला चूल्हा। 
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बास। विश्व की प्राचीनतम सभ्यताओं में शुमार राखीगढ़ी में खोदाई से वहां औद्योगिक गतिविधियों के संकेत मिले हैं। पुरातत्व विभाग की ओर से हो रही खोदाई में कई अहम तथ्य उजागर हो रहे हैं। ताजा खोज में साइट नंबर-2 पर विभिन्न प्रकार के चूल्हों और भट्ठियों के अवशेष मिले हैं जिन्हें देखकर शोधकर्ताओं में उत्साह है। इन संरचनाओं का अध्ययन कर इनके उपयोग और उद्देश्य को समझने का प्रयास किया जा रहा है।
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प्रारंभिक जांच में विशेषज्ञों का मानना है कि ये चूल्हे सामान्य घरेलू इस्तेमाल के नहीं हैं बल्कि इनका उपयोग औद्योगिक गतिविधियों के लिए किया जाता रहा होगा। खोदाई में मिले साक्ष्य बताते हैं कि यहां बड़े स्तर पर उत्पादन कार्य संचालित होता था। चूल्हों की बनावट और संख्या इस बात का संकेत देती है कि यहां किसी विशेष वस्तु का निर्माण संगठित तरीके से किया जाता था।



मनकों के निर्माण का प्रमुख केंद्र होने के साक्ष्य
शोधकर्ताओं के अनुसार इस खोदाई में बड़ी संख्या में विभिन्न प्रकार के मनके (बीड्स) और पत्थर मिले हैं। इससे यह अनुमान लगाया जा रहा है कि यहां मनकों को पकाने और तैयार करने का काम बड़े पैमाने पर होता था। संभव है कि इन्हें तैयार कर व्यापार के लिए अन्य क्षेत्रों में भेजा जाता रहा हो। इतिहासकारों के मुताबिक उस समय सिंधु घाटी सभ्यता में व्यापार काफी विकसित था। राखीगढ़ी से मिले साक्ष्य बताते हैं कि यहां निर्मित वस्तुओं का दूरदराज तक आदान-प्रदान होता था। उस दौर में मुद्रा के बजाय वस्तु विनिमय प्रणाली प्रचलित थी। इसके तहत सामान के बदले सामान दिया जाता था।
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आगामी जांच से खुलेंगे और राज
भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) विभाग की उत्खनन शाखा के अधीक्षक पुरातत्वविद मनोज सक्सेना के अनुसार खोदाई के दौरान मिली भट्ठियां इस बात का प्रमाण हैं कि यहां उच्च तापमान पर वस्तुओं को पकाने की उन्नत तकनीक मौजूद थी। इन भट्ठियों का उपयोग मनकों, पत्थरों या अन्य सामग्रियों को तैयार करने में किया जाता रहा होगा। इससे यह भी संकेत मिलता है कि यह स्थल केवल आवासीय नहीं बल्कि एक विकसित औद्योगिक केंद्र था। इन अवशेषों का वैज्ञानिक परीक्षण जारी है। आने वाले समय में इनके उपयोग और महत्व संबंधी स्पष्ट जानकारी सामने आने की उम्मीद है। आगामी जांच से और राज खुलेंगे। फिलहाल राखीगढ़ी की यह खोज प्राचीन भारतीय सभ्यता की उन्नत तकनीक, संगठित उत्पादन और मजबूत व्यापारिक व्यवस्था की झलक पेश कर रही है।
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