राखीगढ़ी में टीला नंबर दो पर शाम का दृश्य, फोटो-अमर उजाला
हिसार। राखीगढ़ी में भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग की टीम जनवरी से लगातार खोदाई कर रही है। इसका मुख्य उद्देश्य हड़प्पा काल में नगरों की संरचना और टाउन प्लानिंग को समझना है। टीम खोदाई को गर्मी के चलते अप्रैल के बाद अस्थायी रूप से रोक देगी। फिर मौसम ठीक होने और तापमान कम होने पर टीम खोदाई शुरू करेगी। यह खोदाई अगले तीन साल तक जारी रहेगी, लेकिन गर्मी और बारिश में इसे बंद रखा जाएगा।
खोदाई से विभाग का उद्देश्य सिर्फ अवशेष जुटाना नहीं है, बल्कि उस समय के सामाजिक, आर्थिक और सांस्कृतिक जीवन को समझना भी है। आने वाले सालों में खोदाई के परिणामों से हड़प्पा काल के विकास और पतन से जुड़े महत्वपूर्ण रहस्यों का खुलासा हो सकता है, जो कि भारतीय इतिहास के नए अध्याय को जन्म देंगे।
टीम की ओर से खोदी जा रहीं साइटें राखीगढ़ी के तीन प्रमुख टीलों – टीला नंबर एक, दो और तीन पर केंद्रित हैं। अब तक की खोदाई में शोधकर्ताओं को हड़प्पा काल के मैच्योर (परिपक्व) और प्री-मैच्योर (प्रारंभिक) अवशेष प्राप्त हुए हैं। इन अवशेषों में मिट्टी के बर्तन, मनके, आभूषण, संरचनाओं के अवशेष और रोजाना उपयोग की वस्तुएं शामिल हैं। खोदाई के दौरान शंख, तांबा, टेराकोटा मिट्टी और फियां से बनी चूड़ियां और कंगन भी मिले हैं, जिन्हें विभाग ने रिसर्च के लिए सुरक्षित रखा है।
राखीगढ़ी में अप्रैल तक खोदाई जारी रहने की संभावनाएं हैं। इस बार टीलों के समतल हिस्सों में खोदाई की जा रही है, जिसमें उस समय की टाउन प्लानिंग को समझने की कोशिश की जा रही है। - मनोज सक्सेना, सुपरिंटेंडिंग आर्कियोलॉजिस्ट , पंडित दीन दयाल उपाध्याय पुरातत्व संस्थान, ग्रेटर नोएडा