हिसार। प्रदेश सरकार की घोषणा के दो साल बाद भी शहर में जीएसटी ट्रिब्यूनल बैंच स्थापित नहीं हो सकी है। हालात यह है कि अभी तक अधिकारी बैंच के लिए कार्यालय भी नहीं ढूंढ सके हैं। उधर बैंच के शुरू न होने से जीएसटी से संबंधित विवादित मामले लटके पड़े हैं जिस कारण से कारोबारियों को परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।
हिसार में जीएसटी ट्रिब्यूनल बैंच स्थापित की जानी है। सीजीएसटी मुख्यालय ने स्थानीय अधिकारियों को ट्रिब्यूनल के लिए कोई सरकारी जगह ढूंढने को कहा था। स्थानीय अधिकारियों ने सेक्टर-13 में दूरदर्शन भवन का चयन किया था लेकिन यह सिरे नहीं चढ़ सका। इस पर अधिकारियों ने मुख्यालय से निजी भवन को किराये पर लेने की अनुमति मांगी। मगर फिर भी अधिकारी कार्यालय के लिए जगह फाइनल नहीं कर सके। अब दोबारा से अधिकारी दूरदर्शन भवन के लिए प्रयास कर रहे हैं। हिसार के अलावा गुरुग्राम में भी यह बैंच स्थापित होनी है। वहां अधिकारी कार्यालय फाइनल भी कर चुके हैं।
ट्रिब्यूनल के चेयरमैन व सदस्यों की हो चुकी है नियुक्ति
ट्रिब्यूनल के लिए एक चेयरमैन व दो सदस्यों की नियुक्ति की जा चुकी है। अभी संभावना यह जताई जा रही है कि यह बैंच तीन दिन हिसार व तीन दिन गुरुग्राम में सुनवाई करेगी। इस बारे में कोई दिशा निर्देश न होने के कारण अभी स्पष्ट रूप से कुछ नहीं कहा जा सकता है।
जिले में 26 हजार से ज्यादा जीएसटी पहचान नंबर
जिले में 26 हजार से ज्यादा कारोबारियों के पास पास जीएसटी पहचान नंबर है। इनमें से 15 हजार से ज्यादा जीएसटी पहचान नंबर स्टेट जीएसटी कार्यालय के अधीन हैं और 11 हजार से ज्यादा जीएसटी पहचान नंबर सेंट्रल जीएसटी कार्यालय के अधीन हैं।
अपील की ये है व्यवस्था
जीएसटी की पहली अपील जीएसटी ट्रिब्यूनल के पास की जाती है। अभी यह शुरू होने न होने के कारण अपील लंबित पड़ी हैं। इसके बाद हाईकोर्ट व सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया जा सकता है। जीएसटी ट्रिब्यूनल के शुरू होने से जीएसटी से जुड़े कर धारकों के विवाद हल होने के अलावा राज्य के व्यापारियों और जीएसटी करदाताओं का समय बचेगा और उन्हें फायदा पहुंचेगा। उनके विवाद स्थानीय स्तर पर ही न्यायसंगत रूप से सुलझा दिए जाएंगे।
अभी जीएसटी ट्रिब्यूनल बैंच स्थापित नहीं हुई है। अधिकारी अभी कार्यालय ढूंढ रहे हैं। दूरदर्शन के भवन पर अभी विचार विमर्श किया जा रहा है। जितनी जल्द यह बैंच स्थापित होगी, उतनी जल्दी जीएसटी करधारकों को इसका फायदा मिलेगा।
- एडवोकेट कुलदीप जैन, प्रधान, टैक्स बार एसोसिएशन।
जीएसटी का सेकेंड वर्जन भी आ गया है लेकिन आज तक ट्रिब्यूनल की स्थापना नहीं हो सकी। बिना ट्रिब्यूनल के करदाताओं को न्याय कैसे मिलेगा।
- सीए पवन मित्तल, मेंबर, टैक्स बार एसोसिएशन।