हिसार। राज्य सरकार की ओर से सिरसा क्षेत्र में एक्वा पार्क एक्सीलेंस सेंटर बनाने के लिए छह माह बाद भी जमीन नहीं मिल सकी है। इसी प्रकार सफेद झींगा (लिटोपेनियस वन्नामेई) क्लस्टर बनाने संबंधी केंद्र सरकार की घोषणा भी जमीन पर नहीं दिखी। इस कारण किसान इन योजनाओं से वंचित हो रहे हैं जबकि विभागीय अधिकारी इसके लिए जरूरी हर प्रक्रिया पूरी कराने का हरसंभव प्रयास कर रहे हैं।
केंद्र सरकार ने इस साल एक फरवरी को आम बजट प्रस्तुत किया था। इसमें सफेद झींगा क्लस्टर बनाने की घोषणा की गई थी। इसी प्रकार राज्य सरकार ने 18 मार्च को बजट प्रस्तुत किया था। इसके तहत सिरसा में एक्वा पार्क एक्सीलेंस सेंटर बनाने की घोषणा की गई थी। इसके लिए खारे पानी की आपूर्ति, बिजली, परिवहन और प्रसंस्करण सुविधाओं जैसी बुनियादी ढांचे की जरूरत है।
इन घोषणाओं के छह माह बाद भी जमीन पर कोई असर नहीं दिख सका। इसके लिए जमीन नहीं मिल सकी है। जिला मत्स्य विकास अधिकारी भीमसेन बेनीवाल ने बताया कि इन दोनों योजनाओं का मुख्यालय सिरसा में होगा लेकिन यह दोनों योजनाएं प्रदेश स्तरीय हैं जबकि क्लस्टर की सीमा फतेहाबाद, हिसार, भिवानी, चरखी दादरी और रोहतक तक रहेगी। इन क्षेत्रों के एक मोबाइल वैन भी मिलने की उम्मीद है। मिट्टी, पानी और मछलियों की बीमारियों की जांच के बाद उपचार के लिए किसानों को तकनीकी जानकारी भी दी जाएगी।
विभागीय अधिकारियों ने बताया कि इस क्षेत्र में मछली पालन काफी हो रहा है लेकिन मछली के बीज, हैचरी और प्रसंस्करण लिए दक्षिण भारतीय राज्यों की मदद ली जाती है। इस कारण उत्तर भारत में नीली क्रांति की गति धीमी है जबकि इसको बढ़ावा देने के लिए हिसार में दिल्ली-सिरसा फोरलेन के किनारे राष्ट्रीय स्तर के दो प्रशिक्षण केंद्र भी खोले गए हैं। इनमें प्रदेशवासियों को पांच दिवसीय प्रशिक्षण के साथ 200 रुपये दैनिक भत्ता भी दिया जा रहा है जबकि अन्य प्रदेशों के किसान भी वहां मुफ्त प्रशिक्षण ले रहे हैं।
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एक्वा पार्क एक्सीलेंस सेंटर बनाने के लिए करीब 25 एकड़ पंचायती जमीन चाहिए। यह ऐेलनाबाद विकासखंड में प्रस्तावित है। इसके लिए ग्राम पांडका, कर्मशाना, रुपाणा खुर्द, मीठी सुरेरा में जमीन देखी गई है। इनमें से पांडका गांव की जमीन सर्वाधिक उपयुक्त बताई गई है। जमीन चयन प्रक्रिया अंतिम चरण में है।
- जगदीश चंद्र, जिला मत्स्य विकास अधिकारी, सिरसा।