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Hisar News: सावधान! ई-सिम बना मोबाइल फोन से डाटा चुराकर खाता खाली कर रहे साइबर ठग

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हिसार। साइबर ठग रोज नए-नए तरीके अपना लोगों को अपने जाल में फंसा कर धोखाधड़ी कर रहे हैं। शेयर ट्रेडिंग, सोशल मीडिया पर लिंक भेज कर, टेलीग्राम पर टास्क पूरा करने, दूसरे शहर या विदेश में गए बेटे को पुलिस गिरफ्तारी का डर दिखाकर ठगी करते हैं। अब ट्राई और आरबीआई की ओर से कॉल बताकर ठगी की जा रही है। नए पैन कार्ड के नाम पर लिंक भेजकर भी खाते खाली किए जा रहे हैं। पिछले कुछ समय से साइबर अपराधी डिजिटल अरेस्ट के माध्यम से साइबर ठगी कर रहे हैं। इन अपराधियों के तार विदेश में बैठे साइबर ठगों से जुड़े हैं। धोखाधड़ी का 80 प्रतिशत रुपये क्रिप्टो करंसी के माध्यम से उनके खातों में जा रहा है। इन ठगों को पकड़ने के लिए पुलिस के सामने कई चुनौतियां हैं।
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कैसे करते हैं डिजिटल अरेस्ट से धोखाधड़ी
साइबर अपराधी लोगों के पास कॉल करते हैं और उनको कहा जाता है कि आतंकवादी पकड़े गए हैं और उनके पास एक कोरियर मिला है, जिस पर तुम्हारा नाम लिखा हुआ है। इस बारे में पुलिस के बड़े अधिकारी बात करेंगे। उसके बाद कॉल फारवर्ड कर दी जाती है और व्हाट्सएप पर कॉल आती है, जिसमें एक पुलिस स्टेशन दिखाया जाता है। बात करने वाला पुलिस की वर्दी में होता है। किसी को वह पुलिस का बड़ा अधिकारी बताता है तो किसी को सीबीआई का अधिकारी। उसके बाद पुलिस की वर्दी पहनने वाला अधिकारी कहता है कि आतंकवाद से जुड़े मामले में आपकी गिरफ्तारी डालनी है और शहर से दूर बुलाया जाता है। वह आने में आनाकानी करता है तो कहते हैं कि आपके घर के बाहर सादी वर्दी में पुलिस वाले घूम रहे हैं वे कभी भी गिरफ्तार कर सकते हैं। उसके बाद साइबर अपराधी उससे बैंक अकांउट की डिटेल मांगते हैं। डिटेल देने के बाद कहा जाता है कि खाते में जो रुपये हैं रिजर्व बैंक में ट्रांसफर करने होंगे। ये रुपये बाद में मिल जाएंगे। उसके बाद घबराया हुआ व्यक्ति डिटेल दे देता है और साइबर अपराधी उसके खाते में सारी नकदी निकाल लेते हैं।

कैसे बनाते हैं ई-सिम
साइबर अपराधी कंप्यूटर के माध्यम से कॉल करता है। कॉल करने वाला कहता है कि आपकी केवाईसी अपडेट नहीं है। अगर, नहीं करवाई तो खाता बंद कर दिया जाएगा। बैंक खाता चालू रखना है तो वह एक नंबर दबाने के लिए कहता। जैसे ही वो नंबर दबाते हैं तो फोन का पूरा डाटा उनके पास चला जाता है और आपके मोबाइल में जो सिम चल रहा होता है उसका ई-सिम साइबर अपराधी के पास बन जाता है। उसके बाद साइबर अपराधी के पास आधार कार्ड और अन्य दस्तावेजों की जानकारी चली जाती है और वह खाते से रुपये निकाल लेता है। ई-सिम बनने के बाद आपके मोबाइल में जो सिम चल रहा होता है वह बंद हो जाता है। इसके अलावा आधार कार्ड भी बंद हो जाता है। जब आप आधार कार्ड को चालू करवाने के लिए जाते हैं और वहां पर अंगूठा लगाते हैं तो साइबर अपराधी को पता चल जाता है। वह दोबारा से आधार कार्ड को बंद करवा देता है।
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ऑनलाइन गेम के माध्यम से धोखाधड़ी
छोटे बच्चे अपने अभिभावकों के फोन में ऑनलाइन गेम डाउनलोड करते हैं। डाउनलोड करने के बाद साइबर अपराधियों द्वारा जानकारी मांगी जाती है बच्चों को पता नहीं होता तो जैसे पूछा जाता है वैसे करते जाते हैं। उसके बाद फोन का पूरा डाटा साइबर अपराधी के पास चला जाता है और वह बैंक खाते से रुपये अपने खातों में ट्रांसफर कर लेता है। बच्चे अगर गेम को अनइंस्टॉल भी कर देते हैं तो भी साइबर अपराधियों के पास डाटा सुरक्षित रहता है।

साइबर अपराधी आए दिन ठगी के नए-नए तरीके अपना रहे हैं। साइबर ठगी से बचने के लिए व्हाट्सएप पर जो लिंक आते हैं उन्हें खोले नहीं। फोन पर जो कंप्यूटर के जरिये कॉल आती है और कहा जाता है कि एक नंबर दबाएं दो नंबर दबाएं। उनका जवाब नहीं देना चाहिए। इसके अलावा फोन में व्हाट्सएप में आने वाले लिंक डॉट एपीके फाइल को न खोले। इस पर क्लिक करते हैं तो फोन का पूरा डाटा साइबर अपराधी के पास चला जाता है। बच्चों को फोन में ऑनलाइन गेम डाउनलोड न करने दें। फोन में जिन एप की जरूरत नहीं है उन्हें डिलीट कर दें। -निरीक्षक, विकास, साइबर थाना प्रभारी, हिसार



ये वारदात सुलझाई
केस एक
घर बैठे रुपये कमाने का झांसा देकर 54 लाख कर धोखाधड़ी करने वाला आरोपी पकड़ा
साइबर थाना पुलिस ने घर बैठे रुपये कमाने का झांसा देकर शहर के रहने वाले एक युवक से 54 लाख रुपये की धोखाधड़ी करने के मामले में बैंक अकाउंट उपलब्ध करवाने वाले आरोपी कैथल के रामथली निवासी गुरप्रीत को गिरफ्तार किया है। पुलिस इस मामले में 6 आरोपियों को पहले पकड़ चुकी है। पुलिस धोखाधड़ी के इस मामले में अभी तक 50 हजार की नकदी और एक फोन बरामद कर पाई है। उप निरीक्षक नरेंद्र ने बताया कि उपरोक्त आरोपी गुरप्रीत अपने भाई के साथ मिलकर साइबर धोखाधड़ी करने वालों को ठगी की राशि ट्रांसफर करवाने के लिए बैंक अकाउंट उपलब्ध करवाता है। बता दें कि 9 दिसंबर 2024 को घर पर बैठ कर काम करने का झांसा देकर युवक से 54 लाख 11 हजार 110 रुपये की ठगी की थी। उक्त मामले में सातवें आरोपी गुरप्रीत को गिरफ्तार किया है।
केस नंबर दो
ऑनलाइन काम करने के नाम पर 3 लाख ठगी करने के तीन आरोपी गिरफ्तार

साइबर थाना पुलिस ने ऑनलाइन काम करने के नाम पर 3,06,998 रुपये की ठगी करने के मामले में तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया है। पकड़े गए आरोपी जयपुर निवासी सुरेश यादव, सीकर निवासी अमन पंवार और जयपुर निवासी सोनू यादव शामिल है। जांच अधिकारी एएसआई संदीप ने बताया कि एक विभाग के कर्मचारी ने ऑनलाइन वर्क के नाम पर 3,06,998 रुपये की ठगी होने की शिकायत दी थी। उसने बताया था कि 18 नवंबर को फोन पर ऑनलाइन काम करने का मैसेज आया था। टेंडर का काम करने के लिए साइबर अपराधियों ने वेबसाइट पर आईडी बना दी थी। इसके बाद साइबर अपराधियों ने कुल 3,06,998 रुपये खाते में डलवाए। बाद में धोखाधड़ी का पता चला। जांच में सामने आया कि धोखाधड़ी की राशि आरोपी सुरेश यादव के खाते में ट्रांसफर की गई थी। तीनों आरोपियों को अदालत में पेश कर जेल भेज दिया।

दो लाख रुपये की धोखाधड़ी के मामले में दो आरोपी जांच में शामिल

हांसी। थाना साइबर क्राइम पुलिस ने यू ट्यूब पर गाय खरीदने के नाम पर दो लाख रुपये की धोखाधड़ी करने के मामले में दो आरोपियों को जांच में शामिल किया है। आरोपियों ने उच्च न्यायालय चंडीगढ़ से अग्रिम जमानत ले रखी थी। आरोपियों के कब्जे से 20,000 रुपये बरामद हुए है। मामले में तीन आरोपियों को पहले ही गिरफ्तार कर जेल भेज दिया था। शामिल जांच किए गए आरोपियों की पहचान संगरूर के लाहल कलां निवासी युसूफ अली उर्फ जोसफ व मोहम्मद रफी के रूप में हुई। पुलिस प्रवक्ता ने बताया कि आरोपियों ने अपने दोस्तो के साथ मिलकर ढाणा खुर्द रत्न सिंह से गाय खरीदने के बहाने व घोड़ी बेचने के बहाने दो लाख रुपये की धोखाधड़ी की थी।

दुधवा पार्क के नकउहा नाले में धूप सेंकते मगरमच्छ। संवाद

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