हिसार। चौधरी चरण सिंह हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय (एचएयू) में आयुर्वेद दिवस-2026 के उपलक्ष्य में आयोजित कार्यशाला में औषधीय एवं सुगंधित पौधों की खेती, अनुसंधान और प्रसंस्करण को किसानों की आय बढ़ाने का प्रभावी माध्यम बताया गया।
मौलिक विज्ञान एवं मानविकी महाविद्यालय के सभागार में आयोजित कार्यक्रम में मुख्य अतिथि कुलसचिव डॉ. पवन कुमार ने कहा कि आयुर्वेद का उद्देश्य केवल रोगों का उपचार करना नहीं, बल्कि स्वस्थ व्यक्ति के स्वास्थ्य की रक्षा करना और रोगों की जड़ को समाप्त करना है। उन्होंने औषधीय पौधों और प्राकृतिक संसाधनों के महत्व पर प्रकाश डाला।
औषधीय, सुगंध एवं क्षमतावान फसल अनुभाग, अनुवांशिकी एवं पौध प्रजनन विभाग की ओर से आयोजित कार्यशाला में ऑल अल्टरनेटिव मेडिकल काउंसिल के चेयरमैन डॉ. महिपाल सिंह ने कहा कि आहार और दिनचर्या का स्वास्थ्य पर सीधा प्रभाव पड़ता है। प्राकृतिक जीवनशैली, संतुलित आहार, नियमित दिनचर्या, योग, व्यायाम और पर्याप्त नींद से स्वस्थ जीवन प्राप्त किया जा सकता है।
अनुसंधान निदेशक डॉ. राजबीर गर्ग ने किसानों से पारंपरिक फसलों के साथ औषधीय एवं सुगंधित फसलों को भी कृषि में शामिल करने का आह्वान किया। इस अवसर पर सामाजिक कार्यकर्ता सुमित्रा मंगाली, डॉ. एएस. ढांडा, विभागाध्यक्ष डॉ. एसके पाहुजा, डॉ. राजेश आर्य, डॉ. नरेश कौशिक, डॉ. राजेश, डॉ. अजय और डॉ. कृष्ण उपस्थित रहे।
औषधीय जड़ी-बूटियों से 200 तरह के अचार-मुरब्बे बना रहे नरेश :
आयोजन स्थल पर गांव खेड़ी बर्की निवासी नरेश कुमार ने औषधीय जड़ी-बूटियों से बने 17 तरह के अचार का स्टॉल लगाया। नरेश ने बताया कि उन्होंने 2022 में एचएयू के साइना कॉलेज से प्रशिक्षण लेकर अचार-मुरब्बा बनाने का काम शुरू किया और अब 200 तरह के उत्पाद बना रहे हैं। उनका कहना है कि आंवला का अचार व कैंडी त्वचा, बालों, आंखों और हृदय के लिए लाभकारी तथा इम्यूनिटी मजबूत करने में सहायक है। कच्ची हल्दी में एंटीबैक्टीरियल, एंटीफंगल व एंटीऑक्सीडेंट गुण बताए। बांस का अचार-मुरब्बा बच्चों की लंबाई बढ़ाने में उपयोगी बताया। एलोवेरा का अचार पाचन, जोड़ों के दर्द व वजन नियंत्रण में सहायक है। लहसुन, करौंदा, करेला, अदरक, गड़तुंबा और हरड़ के अचार-मुरब्बे भी बनाए हैं। सभी उत्पाद देसी खांड से तैयार किए जाते हैं और इनमें रासायनिक पदार्थों का उपयोग नहीं होता।