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ढंढूर के कचरे के पहाड़ से बनेगी बिजली, एजेंसी ने 1500 टन आरडीएफ मुरथल भेजा

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ढंढूर की साइट पर कचरे के सेग्रीगेशन को लेकर लगाई गई मशीन। - फोटो : Hisar
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हिसार। ढंढूर में लगे कचरे के पहाड़ (लीगेसी वेस्ट) से कचरे का उठान शुरू हो गया है। इस कचरे का निपटान करने वाली एजेंसी ने करीब 1500 टन आरडीएफ (रिफ्यूज्ड डिराइव्ड फ्यूल) को मुरथल स्थित जीबीएम वेस्ट एनर्जी को भेजा है, जहां इस कचरे से बिजली बनाई जाएगी। ढंढूर की इस साइट पर 1 लाख 30 हजार टन कचरा पड़ा है। इस कचरे के निपटान से ढंढूर गांव की 25 हजार की आबादी को राहत मिलेगी।
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बता दें कि नगर निगम की तरफ से कई वर्षों तक ढंढूर गांव के पास कई एकड़ जमीन पर कचरा डाला जाता रहा। चूंकि यहां कचरा निस्तारण की कोई व्यवस्था नहीं थी तो धीरे-धीरे कचरे का पहाड़ बनता गया। इस कचरे के ढेर में काफी बार आग लगने की घटनाएं होती रहती थी, जिससे ढंढूर के लोगों को काफी परेशानी झेलनी पड़ती थी। ग्रामीण काफी समय से इस कचरे के ढेर को खत्म करने की मांग उठा रहे थे। इसके अलावा एनजीटी की गाडनलाइन के अनुसार लीगेसी वेस्ट का निपटान किया जाना जरूरी है। साथ ही अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट के निर्माण में भी यह कचरे का पहाड़ बाधा बन रहा था।
गुरुग्राम की एजेंसी के पास है कचरे के निपटान का टेंडर
इस कचरे के पहाड़ को खत्म करने का टेंडर गुरुग्राम की आईएनडी सैनिटेशन कंपनी को सौंपा हुआ है। इस टेंडर की लागत 6 करोड़ 37 लाख रुपये है। एनजीटी ने शुरुआत में इस कचरे को वर्ष 2020 तक खत्म करने की डेडलाइन दी थी, लेकिन एजेंसी ने काम ही शुरू नहीं किया। इसके बाद अप्रैल 2021 की डेडलाइन दी गई। मगर निपटान नहीं हुआ। अभी कुछ दिनों पहले शहर पहुंचे एनजीटी के चेयरमैन ने 31 मार्च को इस कचरे का निपटान करने के आदेश दिए।
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एजेंसी ने सितंबर 2021 में शुरू किया था काम
उक्त एजेंसी ने पिछले वर्ष सितंबर में इस कचरे के निपटान का काम शुरू किया था। एजेंसी की मानें तो वह अब तक 65 प्रतिशत कचरे को सेग्रीगेट कर चुकी है। कचरे को तीन वर्गों में सेग्रीगेट किया जा रहा है, जिसमें 50 एमएम से ऊपर, 50 से 10 एमएम के बीच व 10 एमएम से कम का आकार शामिल है। 50 एमएम से ज्यादा आकार वाले को आरडीएफ कहा जाता है, जिसमें कपड़ा, प्लास्टिक आदि शामिल है। इसे मुरथल स्थित जीबीएम वेस्ट एनर्जी को भेजा जा रहा है, जहां इससे बिजली बनेगी। वहीं 50 से 10 एमएम के बीच के आकार वाले को इनर्ट कहा जाता है। इसका इस्तेमाल सड़क निर्माण में किया जाता है। 10 एमएम से कम आकार वाले को कंपोस्ट के रूप में इस्तेमाल किया जाता है।
ढंढूर के साथ शहरवासियों को भी होगा फायदा
इस कचरे के पहाड़ के खत्म होने से ढंढूर गांव की 25 हजार की आबादी को फायदा मिलेगा। इसके अलावा इस कचरे में आग लगने से जहरीला धुआं शहर की तरफ भी आता था, जिससे शहरवासियों को परेशानी का सामना करना पड़ता था।
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एजेंसी ने कचरे को बाहर भेजना शुरू कर दिया है। अगर इसी रफ्तार से काम चलता रहा तो जल्द ही इस कचरे से मुक्ति मिल जाएगी। - प्रदीप दहिया, निगमायुक्त
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