हिसार। उत्तरी क्षेत्र फार्म मशीनरी प्रशिक्षण और परीक्षण संस्थान (टीटीसी) में बना ड्रोन प्रशिक्षण केंद्र तीन माह बाद भी शुरू नहीं हो पाया है। वजह यह कि इसके संचालन के लिए नागरिक उड्डयन महानिदेशालय (डीजीसीए) से अनुमति नहीं मिल पाई है। मार्च में इस सेंटर का उद्घाटन हुआ था। यहां प्रत्येक बैच में 20 लोगों को प्रशिक्षण देने की सुविधा है।
खेतों में कीटनाशकों के छिड़काव के लिए अब ड्रोन का इस्तेमाल होने लगा है। प्रयोग बढ़ने पर बड़े पैमाने पर युवाओं व किसानों के लिए रोजगार का सृजन होगा। ड्रोन उड़ाने के लिए प्रशिक्षित होना अनिवार्य है। अभी प्रशिक्षण की सुविधा कम ही केंद्रों पर उपलब्ध है। निजी क्षेत्र में ड्रोन प्रशिक्षण की फीस 80 हजार रुपये है। इसके चलते कम ही लोग अभी इसकी ट्रेनिंग ले पाए हैं। इसे देखते हुए कृषि व किसान कल्याण मंत्रालय ने सिरसा रोड स्थित उत्तरी क्षेत्र फार्म मशीनरी प्रशिक्षण एवं परीक्षण संस्थान में इसके ट्रेनिंग के लिए सेंटर विकसित करने का निर्देश दिया था।
टीटीसी से जुड़े कर्मचारियों के मुताबिक बीते मार्च में ही 20 लोगों के प्रशिक्षण क्षमता युक्त एक लैब की स्थापना का काम पूरा हो गया था। इस केंद्र का उद्घाटन भी हो चुका है। यहां कम्प्यूटर समेत सभी जरूरी उपकरण मौजूद हैं। केवल अनुुमति मिलने का इंतजार है। दरअसल ड्रोन पायलटों के प्रशिक्षण के लिए अनुमति नागरिक उड्डयन महानिदेशालय नई दिल्ली की तरफ से दी जाती है। संस्थान की तरफ से सभी औपचारिकताएं पूरी करते हुए आवेदन किया गया है, लेकिन अभी तक अनुमति नहीं मिली है।
एक सप्ताह का होगा प्रशिक्षण
टीटीसी में बने लैब में एक बैच में 20 लोगों को प्रशिक्षित करने की व्यवस्था है। ट्रेनिंग सत्र सात दिन का होगा, जिसमें सैद्धांतिक व व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया जाना है। इसका शुल्क भी निजी प्रशिक्षण केंद्रों के मुकाबले काफी कम होगा। यहां से प्राप्त प्रशिक्षण प्रमाण पत्र देश भर में मान्य होगा।
ड्रोन पायलट प्रशिक्षण के लिए लैब व कम्प्यूटर समेत सभी तैयारियां पूरी हो चुकी हैं। प्रशिक्षण केंद्र को अनुमति के लिए डीजीसीए में आवेदन किया गया है। उम्मीद है कि जल्दी ही इस केंद्र को अनुमति मिल जाएगी। यहां हरियाणा समेत देश भर के नौजवान ड्रोन पायलट का व्यावसायिक प्रशिक्षण ले सकेंगे।
-डॉ. मुकेश जैन, निदेशक-टीटीसी हिसार