हिसार। प्रदेश सरकार जिले को मेडिकल हैब बनाने की तैयारी में जुटी है। वहीं जिले के सबसे बड़े नागरिक अस्पताल के हालत ये हैं कि 67 साल बीत जाने के बाद भी अस्पताल में बर्न और हृदय रोग विशेषज्ञ की नियुक्ति नहीं हो पाई है। अस्पताल में आने वाले मरीजों को प्राथमिक उपचार के दौरान मेडिकल कॉलेज अग्रोहा या पीजीआई रोहतक रेफर कर दिया जाता है। ऐसे में मरीज और उनके तीमारदारों को मुश्किलों का सामना करना पड़ता है। हालत इतने खराब है कि वेंटिलेटर होने के बावजूद भी आपातकालीन कक्ष में इनका इस्तेमाल नहीं किया जा रहा।
दिल से संबंधित बीमारी के आते हैं मरीज
आजादी के 10 साल बाद नागरिक अस्पताल की शुरुआत की गई थी। पहले 100 बेड की व्यवस्था थी। कुछ समय बाद नई बिल्डिंग का निर्माण कर 100 बेड की संख्या और बढ़ा दी गई। सरकारी अस्पताल में शुरुआत से ही बर्न और हृदय रोग विशेषज्ञ की नियुक्ति नहीं की गई। जबकि सर्दी के मौसम में हर रोज 10 के करीब दिल की बीमारियों से संबंधित मरीज दवा लेने के लिए आते हैं, लेकिन हृदय रोग विशेषज्ञ न होने से फिजिशियन उनका प्राथमिक उपचार करते हैं और गंभीर हालत को देखते हुए मेडिकल कॉलेज अग्रोहा रेफर कर दिया जाता है।
न बर्न का चिकित्सक न ही अलग से कोई वार्ड
अस्पताल में बर्न स्पेशलिस्ट की नियुक्ति भी नहीं है और न ही जले हुए मरीजों के लिए अलग से कोई वार्ड की सुविधा है। आपातकालीन कक्ष में बर्न केस आने पर वहां पर तैनात मेडिकल ऑफिसर द्वारा उसका प्राथमिक उपचार किया जाता है। उसको दवा लगाई जाती है। उसके बाद उसे बेड पर लिटा दिया जाता है। जबकि जले हुए मरीज को अन्य मरीजों से अलग रखना चाहिए। ऐसा न करने से अन्य मरीजों में इंफेक्शन फैलने का खतरा बना होता है।
एमओ के 55 पद है
55 पद एमओ, एसएमओ के 5 पद, डीएमएस के दो पद, डेंटल सर्जन के 3 पद, सलाहकार चिकित्सक के 7 पद हैं।
नागरिक अस्पताल में बर्न और हृदय रोग विशेषज्ञ की कोई नियुक्ति नहीं है। केस आने पर चिकित्सकों द्वारा मरीज को प्राथमिक उपचार दिया जाता है। हालत गंभीर है तो उसे मेडिकल कॉलेज अग्रोहा भेज देते है।
-डॉ. रत्ना भारती, पीएमओ, नागरिक अस्पताल।