हिसार। प्रदेश में चारों तरफ से नशा तस्कर घुसपैठ कर रहे हैं। इन नशा तस्करों की प्रयास एप के जरिये मैपिंग की जा रही है और इनका पूरा रिकॉर्ड हॉक सॉफ्टवेयर पर उपलब्ध है। प्रदेश में पंजाब, राजस्थान, हिमाचल प्रदेश, उत्तर प्रदेश, ओडिशा, दिल्ली, आंधप्रदेश और झारखंड से मादक पदार्थ की तस्करी हो रहा है। नशा तस्करों का नेटवर्क तोड़ने के लिए नारकोटिक्स पुलिस कंट्रोल ब्यूरो प्रयासरत है और काफी हद तक कामयाब भी हो चुके हैं। यह कहना है हरियाणा स्टेट नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (एचएसएनसीबी) के चीफ एवं अंबाला रेंज के एडीजीपी श्रीकांत जाधव का। वे शनिवार को शहर के एक निजी होटल में पत्रकारों से बातचीत कर रहे थे।
उनका कहना है कि दिल्ली में नशा तस्करी करने वाले नाइजीरियन का नेटवर्क टूटा नहीं है। दिल्ली और हरियाणा की पुलिस टीम नेटवर्क तोड़ने मेें जुटी है। जल्द कामयाबी मिल जाएगी। वहीं साथी एप पर प्रतिबंधित दवाइयों का रिकॉर्ड होगा। श्रीकांत जाधव ने बताया कि फार्मासिस्ट को मॉनिटरिंग करने के लिए साथी एप बनाया है। इसे सोनीपत और रोहतक में टेस्ट किया जा चुका। एप्रूवल के लिए सरकार के पास प्रस्ताव भेजा जा चुका है। इसमें चिकित्सक की पर्ची स्कैन होगी, ताकि दवा लेने वाला कहीं और इसका इस्तेमाल न कर सकें। जिन फैक्टरी में ट्रामाजोल और अन्य प्रतिबंधित दवाइयां बनती हैं उनका पूरा रिकॉर्ड साथी एप पर होगा। फैक्टरी दवा कहां-कहां सप्लाई करती है और किस फार्मासिस्ट को दवा दी है ये पूरा रिकॉर्ड एप पर होगा। इसे सेंट्रल सॉफ्टवेयर हॉक से जोड़ा हुआ है।
वर्ष 2020 में बनाया था सॉफ्टवेयर
नारकोटिक्स पुलिस कंट्रोल ब्यूरो ने हॉक सॉफ्टवेयर तैयार किया है। इस सॉफ्टवेयर को 2020 में लॉन्च किया था। 2020 के बाद से जो भी मादक पदार्थ अधिनियम के केस दर्ज हुए हैं उनकी पूरी डिटेल यहां उपलब्ध है। अपराधी का नाम, गाड़ियां, मोबाइल नंबर, बैंक डिटेल, परिवार के लोग, आने-जाने का रूट, ड्रग सप्लाई का रूट सहित पूरा लेखा-जोखा मैपिंग किया जाएगा। इस सॉफ्टवेयर को प्रयास एप से लिंक किया जा रहा है।
35 करोड़ की प्रॉपर्टी पर चल चुका बुलडोजर
एडीजीपी जाधव ने बताया कि प्रदेश में नशा तस्करों की 35 करोड़ की प्रॉपर्टी पर बुलडोजर चलाया जा चुका है। नशा तस्करी करने वालों कुछ और तस्करों के नाम और उनकी संपत्ति को चिह्नित किया जा चुका है, उन पर जल्द बुलडोजर चलाया जाएगा। जब तक नशा तस्करों पर चोट नहीं पहुंचेगी तो वे नशा तस्कर करना छोड़ेंगे नहीं, इसलिए उनकी संपत्ति पर बुलडोजर चलाया जा रहा है।
ग्रामीण से जिला स्तर पर बनाई टीमें
जिला स्तर : 198 सदस्य
सब डिविजन : 374 सदस्य
कलेस्टर मिशन टीम : 2932 सदस्य
वार्ड स्तर : 14124 सदस्य
ग्रामीण स्तर : 59517 सदस्य
नशे की लत में पड़े लोगों की कराते हैं पहचान
पुलिस की ओर से बनाई कमेटियों के सदस्य शहर, वार्ड और गांवों में नशा करने वालों की पहचान कर रहे हैं। पहचान करने के बाद इनकी काउंसिलिंग करवाई जा रही है और संबंधित सरकारी अस्पताल पर उनका उपचार करवाया जा रहा है। इसके अलावा टीम के सदस्य नशा तस्करी करने वालों का रिकॉर्ड भी बना रहे हैं। करीब 40 हजार लोगों का डाटा आ चुका है जो नशे की लत में पड़े हैं।