हिसार। शहर में 160 करोड़ रुपये की लागत से पेयजल व्यवस्था सुधारी जाएगी। जनस्वास्थ्य विभाग ने रफ कॉस्ट तैयार कर मुख्यालय मंजूरी के लिए भेज दिया है। इसके तहत पास हुईं नई कॉलोनियों में पेयजल लाइन बिछाई जाएगी। इसके अलावा 40 साल पुरानी लाइनों को भी बदला जाएगा।
इससे पहले, जनस्वास्थ्य विभाग ने अमृत टू योजना के तहत शहर में पेयजल कार्यों के लिए 237 करोड़ रुपये का एस्टीमेट तैयार कर मंजूरी के लिए भेजा था। राज्यस्तरीय तकनीकी कमेटी ने 198 करोड़ रुपये मंजूर किए थे। चूंकि इसमें केंद्र सरकार का भी हिस्सा था और केंद्र ने इसे मंजूरी नहीं दी। हालांकि इसके बाद मुख्यालय ने जिला अधिकारियों को नए सिरे से एस्टीमेट तैयार करने के निर्देश दिए। इस निर्देशों के अनुसार अब अधिकारियों ने यह नया एस्टीमेट तैयार किया है।
बिछाई जाएगी 50 किलोमीटर लंबी नई पेयजल लाइन
इसके तहत शहर की विभिन्न कॉलोनियों में 50 किलोमीटर नई पेयजल लाइन बिछाई जाएंगी। इनमें वैध हुईं 9 कॉलोनियां भी शामिल हैं। इन कॉलोनियों में शहीद भगत सिंह कॉलोनी, शहीद भगत सिंह कॉलोनी फेज-1, आरएस कॉलोनी, श्री कृष्णा एनक्लेव, न्यू कृष्णा एनक्लेव व न्यू कृष्णा एनक्लेव फेज टू, शिव कॉलोनी पार्ट टू, विश्वासपुरम कॉलोनी, हनुमान कॉलोनी एक्सटेंशन व बालाजी कॉलोनी कॉम्प्लेक्स, आदर्श कॉलोनी कैंट के पास व सैनिक विहार कॉलोनी टीसीपी तीन के सामने और साउथ सिटी, तारा नगर व जय श्री श्याम विहार कॉलोनी शामिल हैं। इसके अलावा जिन कॉलोनियों में 40 साल से पुरानी लाइन हैं, उन लाइनों को भी बदला जाएगा। पुरानी सीआई व प्लास्टिक पाइप की जगह डीआई पाइप बिछाए जाएंगे। इनमें 4, 6 व 8 इंच की पाइप शामिल हैं।
जलघरों में बनाए जाएंगे नए टैंक
स्काडा जलघर में नए स्टोरेज टैंक बनाया जाएगा। इसके अलावा सातरोड जलघर में पुराने स्टोरेज टैंक तोड़कर उनकी जगह बड़े साइज के टैंक बनाए जाएंगे। पुरानी पंपिंग मशीन भी बदली जाएगी। साथ ही अग्रसेन कॉलोनी, शिव कॉलोनी, टिब्बा दानाशेर व विश्वासपुरम में बूस्टिंग स्टेशन का निर्माण किया जाएगा।
एस्टीमेट से आजाद नगर एरिया हटाया
अब नए एस्टीमेट में आजाद नगर एरिया को शामिल नहीं किया गया है। अधिकारियों की मानें तो पहले करीब 199 करोड़ रुपये का एस्टीमेट था, जो अमृत टू के तहत तैयार किया गया था। इसमें 50 करोड़ के कार्य आजाद नगर एरिया के थे। अब उन्हें कार्यों को नए एस्टीमेट में शामिल नहीं किया गया है।
हमने अपनी जरूरतों के हिसाब से एक रफ कॉस्ट एस्टीमेट तैयार करके मुख्यालय भिजवाया है। अब यह मुख्यालय पर निर्भर करेगा कि वह कितनी राशि मंजूर करता है। मुख्यालय के मंजूरी मिलने के बाद ही आगे प्रक्रिया शुरू की जाएगी।
विकास सिंगरोहा, एसई, जनस्वास्थ्य विभाग