दुराचार पीड़ित नाबालिग और उसके परिजनों को न तो डॉक्टरों से मदद मिल रही है और न ही प्रशासन से।
नाबालिग के गर्भपात के लिए हिसार के सामान्य अस्पताल से पीजीआई रोहतक रेफर किए जाने के बाद भी पीड़िता को राहत नहीं मिल सकी।
पीजीआई के चिकित्सक बोर्ड ने एमटीपी कानून (मेडिकल टर्मिनेशन ऑफ प्रेगनेंसी) आडे़ आने की बात कहकर नाबालिग के गर्भपात के लिए मना कर दिया और उसे वापस हिसार भेज दिया।
वहीं, उपायुक्त ने भी इस तरह के किसी मामले की जानकारी नहीं होने की बात कही है। कोर्ट के आदेश के बाद भी करीबन दो सप्ताह सरकारी व्यवस्था में गुजर गए हैं, जिससे नाबालिग के गर्भपात की उम्मीदें लगातार कम होती जा रही हैं।
गौरतलब है कि हिसार के सामान्य अस्पताल के चिकित्सकों ने शुक्रवार को दुराचार पीड़िता नाबालिग के गर्भपात के लिए रोहतक पीजीइआई रेफर कर दिया था।
नाबालिग को करीबन 24 सप्ताह का गर्भ हो गया है। ऐसे में एमटीपी कानून गर्भपात की अनुमति नहीं देता है। सामान्य अस्पताल के डॉक्टर शुरू से ही कानून का हवाला देते हुए पीड़िता का गर्भपात करने में आनाकानी कर रहे थे।
यहां तक कि सीएमओ भी इस मामले में कोई जानकारी नहीं होने की ही बात कहते रहे और पूरे मामले को पीएमओ पर डाल रहे थे।
ऐसी स्थिति में पीएमओ ने भी रोहतक पीजीआई में बेहतर सुविधा होने की बात कहकर नाबालिग को रोहतक रेफर कर दिया था।
बेटी को लेकर कहां जाऊं
पीड़िता के पिता से जब बात की गई तो उन्होंने बताया कि रोहतक के डॉक्टरों ने भी गर्भपात करने से मना कर दिया है। उन्हें वापस हिसार भेज दिया है।
मुझे कुछ समझ नहीं आ रहा है कि मैं अपनी बेटी को लेकर कहां जांऊ। हमारे साथ भेजे गए दो सरकारी लोगों ने ही डॉक्टरों से बात की थी। किसी भी डॉक्टर ने हमसे बात करनी की कोशिश भी नहीं की।
ऐसे मामले की मुझे जानकारी नहीं : डीसी
उपायुक्त डॉ. एमएल कौशिक से जब पीड़िता मामले में बात की गई तो उन्होंने जवाब दिया कि ऐसा कोई मामला उनके पास नहीं आया है।
यहां तक कि उसे इस मामले में कोई जानकारी नहीं है। इस मामले में सीएमओ को ही पता होगा। वही कुछ कर सकते हैं। ज्ञात रहे कि शुक्रवार को सीएमओ इस मामले में कोई जानकारी नहीं होने की बात कह चुके हैं।
एमपीपी कानून ही आया आडे़
पीएमओ दयानंद शर्मा ने बताया कानून के तहत 20 सप्ताह का गर्भपात करने के लिए बोर्ड की अनुमति ली जाती है। उसी के निर्णय के आधार पर गर्भपात होता है।
लेकिन पीड़िता का गर्भ 24 सप्ताह के करीब हो चुका है। ऐसे में एमटीपी कानून ही गर्भपात की अनुमति नहीं देता है।
यह कहता है एक्ट
मेडिकल टर्मिनेशन ऑफ प्रेगनेंसी (एमटीपी) एक्ट सन 1997 में बना था। इसके तहत 20 सप्ताह तक के गर्भपात की इजाजत दी गई है।
एमटीपी के चार कारणों के तहत गर्भपात कराने की अनुमति मिल सकती है।
- महिला को कोई गंभीर रोग है और गर्भ रखने से उसकी जान को खतरा है।
- गर्भ को धारण किए रहने से नवजात को जान का खतरा हो और उस गंभीर शारीरिक, मानसिक अपंगता की आशंका हो।
- दुष्कर्म के परिणाम स्वरूप गर्भधारण
- गर्भ निरोधक की असफलता, चाहे जिस भी माध्यम का प्रयोग किया हो।
यह है मामला
17 सितंबर को बरवाला क्षेत्र के एक गांव की 8वीं कक्षा की छात्रा ने अपने पड़ोसी 55 वर्षीय निहाल सिंह पर दुष्कर्म करने व जान से मारने की धमकी देने का आरोप लगाया था।
पीड़ित छात्रा का आरोप था कि निहाल सिंह पिछले छह महीने से उसके साथ दुष्कर्म कर रहा है। बरवाला पुलिस ने आरोपी निहाल सिंह के खिलाफ केस दर्ज कर उसे जेल भेज दिया था।
पीड़ित लड़की ने जब अपने परिजनों को पेट दर्द होने की शिकायत बताई, तो डाक्टरों द्वारा जांच में नाबालिग के गर्भवती होने का पता चला।