हिसार। डीजी हेल्थ के आदेश के बावजूद नागरिक अस्पताल के चिकित्सक धड़ल्ले से ब्रांडेड दवाइयां लिख रहे हैं। न उन्हें मुख्यालय के आदेशों की परवाह है और न ही किसी का डर। हैरानी की बात यह है कि अब तो चिकित्सक जन औषधि केंद्र की दवाइयों को भी लौटा रहे हैं।
मुनाफे के चक्कर में चिकित्सक पहले ही ओपीडी पर्ची पर ब्रांडेड दवाइयां लिख रहे हैं। जब मरीज जन औषधि केंद्र में जाता है तो वहां पर उस नाम की दवाइयां नहीं मिलती। जिस कारण मजबूरी में मरीजों को बाहर से महंगे दामों पर दवाइयां खरीदनी पड़ रही हैं। सोमवार को इस मामले को लेकर संवाददाता ने पड़ताल की जिसमें ईएनटी, जनरल मेडिसिन व मनोरोग विभाग के चिकित्सक कुल पांच दवाइयों में से औसतन तीन ब्रांडेड दवाइयां ओपीडी पर्ची पर लिख रहे हैं।
जन औषधि केंद्र नहीं दे पा रहा मरीजों को राहत
नागरिक अस्पताल में आने वाले मरीजों को सस्ते दर पर जेनेरिक दवाइयां उपलब्ध करवाने के लिए जन औषधि केंद्र स्थापित किया है। ताकि अस्पताल में आने वाले मरीजों को अंदर डिस्पेंसरी से जो दवाएं निशुल्क नहीं मिल पाती वे सस्ती दर पर जन औषधि केंद्र पर मिल जाए। जिससे मरीजों को महंगे दामों में दवाइयां खरीदने के लिए बाहर न जाना पड़ेगा। लेकिन ब्रांडेड दवाइयां ओपीडी पर्ची में लिखे होने के कारण जन औषधि केंद्र मरीजों को राहत नहीं पहुंचा पा रहा है।
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ये है नियम
- नागरिक अस्पताल के चिकित्सक ब्रांडेड दवाइयां ओपीडी पर्ची पर नहीं लिख सकते।
- अस्पताल के चिकित्सक को ओपीडी पर्ची पर दवा का साल्ट लिखना होगा।
- सभी चिकित्सक को पता होना चाहिए कि उनकी शाखा से संबंधित किस बीमारी की कौन सी दवाइयां निशुल्क डिस्पेंसरी में उपलब्ध हैं। वे ही लिखेंगे, अगर नहीं है तो उसे स्टोरेज रूम से मंगवाएंगे।
- अगर निशुल्क डिस्पेंसरी में दवाइयां नहीं हैं तो ऐसी दवाइयां के साल्ट लिख सकते हैं, जो जन औषधि केंद्र से मिल जाए।
- समय-समय पर सभी चिकित्सकों को निशुल्क डिस्पेंसरी में रखी दवाइयों की सूची से अवगत कराना जरूरी है।
ये बोले मरीज
मैंने नागरिक अस्पताल में ईएनटी चिकित्सक से स्वास्थ्य जांच करवाई है। निशुल्क डिस्पेंसरी से कुल पांच में से एक ही दवा ही मिली। जबकि दो दवाइयां ब्रांडेड होने के कारण जन औषधि केंद्र से भी नहीं मिलीं। बाहर से दवाइयां खरीदनी पड़ेगी।
- 69 वर्षीय छोटूराम, निवासी आजाद नगर
मैंने नागरिक अस्पताल के चिकित्सक से गले से संबंधित रोग की जांच करवाई है। चिकित्सक ने कुल तीन दवाइयां लिखी, जिसमें से एक भी दवा निशुल्क डिस्पेंसरी से नहीं मिली। जबकि जन औषधि केंद्र से एक दवा मिली है। बाकि दवाइयां ब्रांडेड होने के कारण बाहर से खरीदनी पड़ेगी।
- रामनिवास, निवासी गांव न्याणा
मैंने अपनी धर्मपत्नी कृष्णा देवी की ईएनटी चिकित्सक से स्वास्थ्य जांच करवाई थी। ओपीडी पर्ची पर कुल 6 दवाएं लिखी हैं, जिसमें से तीन दवाइयां बाहर की लिखी हैं। जबकि तीन दवाइयां नागरिक अस्पताल से ही मिल गई थी। सरकार को ध्यान देना चाहिए।
- बच्चन सिंह, निवासी गांव पेटवाड़
मेडिसिन शाखा के चिकित्सक की ओपीडी से दवाइयां लिखवाई हैं। जिसमें कुल 4 दवाइयां लिखी हैं। इनमें दो दवाइयां बाहर की लिखी हैं, जबकि शेष दवाई जन औषधि केंद्र से मिल गई।
- केला देवी, निवासी खरड़