हिसार। पराली जलाने, वाहनों का धुआं, सड़कों की सफाई में लापरवाही और औद्योगिक प्रदूषण की वजह से फेफड़ों का दम निकल रहा है। सिर्फ पराली जलने की वजह से ही करीब तीन माह तक हर दिन सांसों पर संकट रहता है। वायु प्रदूषण की वजह से लोग कई गंभीर दीर्घकालिक बीमारियों के शिकार हो रहे हैं। शहर में अक्तूबर से दिसंबर तक वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 200 से 400 के बीच रहता है। इस अवधि में सरकारी और निजी अस्पतालों में प्रदूषण के असर से आखों व सांस के मरीजों की ओपीडी बढ़ जाती है।
दरअसल प्रदूषण पर नियंत्रण के लिए कागजी कार्रवाई तो खूब होती है, धरातल में कोई काम नहीं दिखता। सरकार के तमाम आदेशों के बावजूद पराली जलाने संबंधी गाइडलाइन का पालन नहीं होता। शाम होते ही शहर में चिमनियां धुआं उगलने लगती हैं। सड़कों पर अनफिट वाहन सरेआम धुआं छोड़ते जाते है, लेकिन इन पर लगाम लगाने की जिम्मेदारी जिनके कंधों पर है, उन्होंने आंखें बंद कर रखी हैं।
ये हैं वायु प्रदूषण के मुख्य कारण
- वाहनों का धुआं
- औद्योगिक इकाइयों का धुआं
- ईंट-भट्ठों से निकलने वाला धुआं
- सफाई के दौरान सड़कों से उड़ती धूल व मिट्टी
- निर्माण स्थलों से उड़ती धूल
- फसल अवशेषों को जलाना
- कचरे को जलाना
डस्ट फ्री सड़कों का सपना अधूरा
निगम के सफाई कर्मचारी प्रतिदिन सड़कों की सफाई करते हैं। इस कारण खूब धूल व मिट्टी उड़ती है। शहर की कोई ऐसी सड़क नहीं है, जिसे डस्ट फ्री कहा जा सके। डाबड़ा चौक से जिंदल ओवरब्रिज तक डिवाइडर मिट्टी से अटे हैं। इन पर लगाए गए पौधों की मिट्टी निकालकर पास ही ढेरी लगा रखी है। वाहनों के चलने या तेज हवा चलने पर ढेरियों से दिन भर मिट्टी उड़ती रहती है। इससे निगम अनजान नहीं है, फिर भी डिवाइडर की सफाई नहीं करवाई जा रही। नगर निगम के पास पानी का छिड़काव करने वाली चार मशीनें हैं, लेकिन कभी-कभार ही इनका इस्तेमाल किया जाता है।
प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड भी निष्क्रिय
प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की तरफ से भी कोई खास कदम नहीं उठाए जाते। शहर के औद्योगिक क्षेत्र में अनेक इकाइयां प्रदूषण नियंत्रण मानकों को पूरा नहीं करती। निर्माण स्थलों पर दिन भर धूल मिट्टी उड़ती रहती है। बावजूद इसके कोई कार्रवाई नहीं की जाती है।
धड़ल्ले से जलाए जा रहे फसल अवशेष व कूड़ा
ग्रामीण क्षेत्रों में धड़ल्ले से फसल अवशेष जलाए जा रहे हैं, लेकिन जिला प्रशासन इन पर लगाम कसने में नाकारा साबित हुआ है। शहर में सुबह और शाम को कई पॉश इलाकों में सरेआम कचरा जलता देखा जा सकता है।
पराली जलाने के मामले
वर्ष-मामले
2021-245
2022-115
2023-111
2024-49
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प्रदूषण अधिक होने पर मशीनों से पानी का छिड़काव किया जाता है। कितनी मशीनें चल रही हैं और कितनी मशीनों का इस्तेमाल नहीं किया जा रहा है। इस बारे में अधिकारियों से जानकारी ली जाएगी। मुख्य सड़कों पर नियमित और मशीनों से सफाई हो इसको कड़ाई से लागू करेंगे। - नीरज, निगमायुक्त