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Hisar News: हिसार में डेंगू का डंक अब जानलेवा, पुष्टि होने के चौथे दिन युवक की मौत

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शहर में करवाई जा रही फॉगिंग। 
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हिसार। डेंगू का डंक अब जानलेवा साबित होने लगा है। हिसार के भारत नगर निवासी 28 वर्षीय अरुण की मंगलवार रात अग्रोहा मेडिकल कॉलेज में उपचार के दौरान मौत हो गई। यह जिले की इस सीजन में डेंगू से पहली मौत है। परिजनों ने बताया कि चार दिन पहले ही अरुण की रिपोर्ट में डेंगू की पुष्टि हुई थी। वहीं, अग्रोहा मेडिकल काॅलेज के प्रवक्ता अंकित ने बताया कि मरीज को छुट्टी दे दी थी। डेंगू ग्रस्त होने की जानकारी नहीं है।
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प्रदेश में डेंगू के सबसे अधिक केस हिसार में आए हैं। जिले में अब तक मरीजों का आंकड़ा 257 पहुंच चुका है। अरुण के चाचा राजेश बागड़ी का दावा है कि उसे करीब दस दिन से बुखार आ रहा था। नागरिक अस्पताल में टेस्ट कराने पर चार दिन पहले डेंगू की पुष्टि हुई। इसके बाद उपचार के लिए अग्रोहा मेडिकल कॉलेज में भर्ती किया था। प्लेटलेट्स बेहद कम होने के कारण उसकी मौत हो गई।
उप सिविल सर्जन डॉ. सुभाष खतरेजा ने बताया कि बुधवार को डेंगू के 5 नए मरीज सामने आए हैं। डेंगू के साथ वायरल भी बढ़ रहा है। सिविल अस्पताल में रोजाना 25 केस वायरल के आ रहे हैं। डेंगू का केस मिलने पर नगर निगम को रिपोर्ट भेजी जाती है, जिसके बाद निगम की टीम मरीज के क्षेत्र में फॉगिंग करवाती है। नागरिक अस्पताल में डेंगू मरीजों के लिए अलग से वार्ड बनाया गया है। सभी बेड पर मच्छरदानी की व्यवस्था है। सभी निजी अस्पतालों को निर्देश दिए हैं कि डेंगू की रिपोर्ट स्वास्थ्य विभाग को प्राथमिकता से भेजें। रोजाना करीब 50 सैंपल लैब में जांच के लिए भेजे जाते हैं।
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स्वास्थ्य विभाग को मिलीं 44 एसडीपी किट
स्वास्थ्य विभाग ने डेंगू मरीजों के लिए एसडीपी किट मांगी थी। फिलहाल नागरिक अस्पताल को 44 किट उपलब्ध कराई गई हैं। एसडीपी किट यानी सिंगल डोनर प्लेटलेट्स किट। यह डेंगू के इलाज में इस्तेमाल की जाती है। एसडीपी किट में एक मरीज से इतनी प्लेटलेट्स मिल जाती हैं कि मरीज को बचाया जा सकता है। एक मरीज से 50 हजार प्लेटलेट्स मिल सकती हैं। रैंडम डोनर प्लेटलेट्स (आरडीपी) में एक मरीज से सिर्फ 1 से 4 हजार प्लेटलेट्स मिलती हैं। 50 हजार प्लेटलेट्स चढ़ाने के लिए 10 से ज्यादा ब्लड डोनर की जरूरत पड़ती है।
पिछले 13 वर्षों में डेंगू केस का विवरण
वर्ष - मरीज
2011 - 02
2012 - 22
2013 - 199
2014 - 17
2015 - 1140
2016 - 496
2017 - 538
2018 - 282
2019 - 168
2020 - 117
2021 - 1009
2022 - 1799
2023- 625
2024 -257
लारवा मिलने पर 4 हजार लोगों को थमा चुके नोटिस
स्वास्थ्य विभाग ने लारवा की जांच के लिए 35 टीमों का गठन किया हुआ है। लारवा मिलने पर अभी तक 4 हजार से अधिक लोगों को चेतावनी नोटिस दिए जा चुके हैं। दोबारा से इन घरों में लारवा मिलता है तो उनका चालान किया जाएगा। स्वास्थ्य विभाग की टीमें लोगों को डेंगू और मलेरिया के लक्षण और बचाव के बारे में जागरूक कर रही हैं। अभी तक 250 से अधिक तालाबों में गंबूजिया मछली डाली जा चुकी हैं। यह मछली पानी में पनपने वाले लारवा को नष्ट करती है। अधिकारियों के मुताबिक अगर किसी घर के आसपास पानी एकत्रित है तो उसमें काला तेल डाल दें, ऐसा करने से लारवा नष्ट हो जाता हैं।
डेंगू के लक्षण
आंखों का पिछला हिस्सा, जोड़, पीठ, पेट, मांसपेशी, हड्डियां में दर्द होना, ठंड लगना, थकान, बुखार, या भूख न लगना, उल्टी आना, शरीर पर चकत्ते या लाल धब्बे पड़ना, सिर में दर्द होना, शरीर में कमजोरी आना, शरीर में प्लेटलेट्स की कमी होना।
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बचाव के उपाय

- अपने घर के आस-पास स्थिर पानी और संभावित प्रजनन स्थलों को हटा दें। खिड़कियों और दरवाजों पर मच्छरदानी और स्क्रीन का प्रयोग करें।

- बाहर जाते समय लंबी बाजू के कपड़े, पैंट और मोजे पहनें। हल्के रंग के कपड़े भी मच्छरों को भगाने में मदद कर सकते हैं।

- सुबह जल्दी और दोपहर में बाहरी गतिविधियों को सीमित करें जब मच्छर सबसे अधिक सक्रिय होते हैं।

- अपने रहने की जगह को साफ रखें और कचरे का उचित तरीके से निपटान करें। मच्छरों की शरणगाह वाले क्षेत्रों को कम करने के लिए झाड़ियों का काट दें।
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