हिसार। आम लोगों की लापरवाही के चलते डेंगू रोगियों की संख्या लगातार बढ़ती जा रही है। डेंगू के लिए जिम्मेदार मच्छर एडीज इजिप्टी इस सीजन में अब तक शतक लगा चुका है। जिले भर में 106 रोगी मिल चुके हैं। पंचकूला के बाद यह सर्वाधिक संख्या है। उधर, डेंगू के बढ़ते मामलों को रोकने में स्वास्थ्य विभाग के पसीने छूट रहे हैं। रोगियों के घरों के आसपास मच्छरनाशी रसायन का छिड़काव, तालाबों में काला तेल और गंबुजिया मछली छोड़ने जैसे एहतियाती उपायों के बावजूद रोगियों की बढ़ती संख्या चिंता का सबब बनती जा रही है। राहत की बात यह है कि अब तक कोई गंभीर रोगी सामने नहीं आया है।
स्वास्थ्य विभाग की माने तो बारिश के बाद से आमजन की लापरवाही के कारण डेंगू के मामले बढ़ रहे हैं। डेंगू रोगियों के अलावा मलेरिया के भी 18 केस सामने आ चुके हैं। हालांकि पिछले साल के मुकाबले इस साल डेंगू के मामले कम है। पिछले वर्ष सितंबर तक 230 मामले सामने आए थे। उधर, जिला मलेरिया विभाग की तरफ से डेंगू और मलेरिया पर अंकुश के लिए शहर में फॉगिंग करवाई जा रही है। गांवों में तालाबों में गंबूजिया मछली डाली गई हैं।
इन जगहों पर पनप रहा डेंगू का लारवा
जिला स्वास्थ्य विभाग ने डेंगू और मलेरिया पर अंकुश लगाने के लिए 35 टीमों का गठन किया हुआ है। ये टीमें घर-घर जाकर लारवा की जांच कर रही हैं। टीमों को घरों के अंदर पानी ही हौदी, कूलर और पशुओं के लिए घर के बाहर रखी पानी की टंकी में डेंगू का लारवा मिल रहा हैं। इससे स्पष्ट है कि लोग घरों के आसपास और अंदर साफ पानी को इकट्ठा होने दे रहे हैं, जो डेंगू मच्छर के पनपने का बड़ा कारण है।
4 हजार को थमाए जा चुके हैं नोटिस
लारवा मिलने पर अब तक 4000 लोगों को चेतावनी नोटिस दिए जा चुके हैं। दोबारा से इन घरों में लारवा मिलता है तो उनका चालान भी किया जा रहा है। जो टीमें घर-घर जा रही हैं, वे लोगों को डेंगू और मलेरिया के लक्षण और बचाव के बारे में बता रही हैं। अब तक 250 से अधिक तालाबों में गंबूजिया मछली डाली जा चुकी हैं। यह मछली पानी में पनपने वाले डेंगू और मलेरिया फैलाने वाले मच्छर के लारवा को नष्ट करती है। अधिकारियों के मुताबिक अगर किसी घर के आसपास पानी एकत्रित है तो उसमें काला तेल डाल दें, ऐसा करने से लारवा नष्ट हो जाता है।
अस्पताल में अलग से बनाया है वार्ड
नागरिक अस्पताल के डॉ. सुभाष खतरेजा ने बताया कि जहां-जहां डेंगू के मामले सामने आ रहे हैं, वहां जाकर टीम लोगों के खून के सैंपल ले रही हैं। इन सैंपल को जांच के लिए लैब में भेजा जाता है। रोजाना 50 के करीब सैंपल लैब में भेजे जा रहे हैं। वहीं नागरिक अस्पताल में डेंगू मरीजों के लिए अलग से वार्ड बनाया हुआ है। इस वार्ड में मच्छरदानी वाले चार बेड लगाए गए हैं। इसके अलावा अस्पताल में भर्ती मरीजों को निशुल्क प्लेटलेट्स चढ़ाई जाती है।
डेंगू के लक्षण
- आंखों का पिछला हिस्सा, जोड़, पीठ, पेट, मांसपेशी, या हड्डियां में दर्द होना
- ठंड लगना, थकान, बुखार, या भूख न लगना
- उल्टी आना
- शरीर पर चकत्ते या लाल धब्बे पड़ना
- सिर में दर्द होना, शरीर में कमजोरी आना
- खून में प्लेटलेट्स की कमी होना
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कब कितने मिले डेंगू रोगी
वर्ष संख्या
2020 117
2021 1009
2022 1799
2023 625
2024 (अब तक) 106
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कैसा होता है डेंगू का मच्छर
डेंगू के मच्छर को मादा एडीज मच्छर कहते हैं। चीते जैसी धारियों वाले मादा एडीज इजिप्टी मच्छर के काटने से शरीर में डेंगू फैलता है। यह मच्छर अक्सर सुबह के समय ही काटते हैं। एडीज इजिप्टी मच्छर बहुत ऊंचाई तक नहीं उड़ पाते, इंसान के घुटने के नीचे तक ही पहुंच पाते हैं। इसलिए शरीर को पूरी तरह से ढकने वाले कपड़े ही पहनें ताकि मच्छर से बच सकें। सुबह के वक्त भी पांव और हाथों को ढककर रखें। डेंगू के मच्छर गंदी नालियों में नहीं बल्कि साफ सुथरे पानी में पनपते हैं, साफ सुथरे शहरी इलाकों में रहने वाले लोगों को इसका ज्यादा खतरा रहता है।
बचाव के उपाय
- अपने घर के आस-पास स्थिर पानी और संभावित प्रजनन स्थलों को हटा दें। खिड़कियों और दरवाजों पर मच्छरदानी और स्क्रीन का प्रयोग करें।
- बाहर जाते समय लंबी बाजू के कपड़े, पैंट और मोजे पहनें। हल्के रंग के कपड़े भी मच्छरों को भगाने में मदद कर सकते हैं।
- सुबह जल्दी और दोपहर में बाहरी गतिविधियों को सीमित करें जब मच्छर सबसे अधिक सक्रिय होते हैं।
- अपने रहने की जगह को साफ रखें और कचरे का उचित तरीके से निपटान करें। मच्छरों की शरणगाह वाले क्षेत्रों को कम करने के लिए झाड़ियों का काट दें।