अलखपुरा से 12 अप्रैल को लापता हुए युवक राजपाल मजीठिया (30) का शव बरामद किया गया है। राजपाल की हत्या कर शव को प्लास्टिक के कट्टे में डालकर नहर में फेंका गया था। पुलिस ने पुट्ठी मंगल खां के नजदीक उमरा माइनर से शव को निकालकर मामले की जांच शुरू कर दी है।
मृतक के गले पर निशान मिले हैं। पुलिस की फोरेंसिक टीम ने जांच शुरू कर दी है। मामले की जांच कर रहे बवानीखेड़ा पुलिस के सब इंस्पेक्टर टेक राम ने बताया कि चूंकि राजपाल मजीठिया की गुमशुदगी का मामला पहले से दर्ज था। लिहाजा, उस मामले को अब हत्या में तब्दील कर दिया है।
जांच के बाद किसी को नामजद किया जाएगा। पोस्टमार्टम के लिए शव को यहां सिविल अस्पताल में लाया गया है, जहां से उसे रोहतक मेडिकल कॉलेज के लिए रेफर किया गया है।
राजपाल 12 अप्रैल को कुंगड़ में मोनू से अपने रुपये लेने के लिए गया था, लेकिन लौटकर नहीं आया। दो दिन पूर्व ही उसके परिजनों ने बवानीखेड़ा थाने में गुमशुदगी की रपट दर्ज करवाई थी। पुलिस को दिए बयान में मृतक के भाई जोगी राम ने कहा है कि राजपाल ने करीब दो महीने पहले कुंगड़ गांव निवासी मोनू को 95 हजार रुपये में भैंस बेची थी।
मोनू एक महीने में रुपए चुकाने की बात कहकर उधार में भैंस ले गया था। एक महीने बाद राजपाल ने मोनू को फोन कर रुपये लौटाने के लिए कहा तो उसने 15 दिन की मोहलत मांगी। इसके बाद दो बार फिर से राजपाल ने रुपये लौटाने के लिए फोन किया।
जोगी राम ने पुलिस को बताया कि 12 अप्रैल को जब राजपाल अपने खेत में फसल काट रहा था तो उसके पास मोनू का फोन आया और उसे रुपये ले जाने के लिए कहा। इस पर राजपाल अपने खेत से ही कुंगड़ के लिए रवाना हो गया। घर नहीं लौटा तो राजपाल के परिजनों ने उसके मोबाइल पर फोन मिलाने की कोशिश की, लेकिन वह स्विच ऑफ मिला।
मोनू से संपर्क किया गया तो उसने कहा कि राजपाल उसके पास आया ही नहीं। इसके बाद राजपाल के परिजनों ने उसकी थाने में गुमशुदगी की रपट दर्ज करवा दी।
मंगलवार को कुछ लोगों ने पुलिस को सूचना दी कि पुट्ठी मंगल खां के नजदीक उमरा माइनर में एक प्लास्टिक की सफेद बोरी में किसी का शव है। मौके पर पहुंची हांसी सदर पुलिस ने बोरी खोलकर शव बाहर निकाला। तीन घंटे की मशक्कत के बाद मृतक की शिनाख्त अलखपुरा निवासी राजपाल के रूप में हुई।
फिलहाल पुलिस की एफएसएल टीम मामले की जांच कर रही है। मामले की जांच कर रहे सदर थाना के एएसआई मोहनलाल ने बताया कि चूंकि राजपाल के लापता होने का मामला बवानीखेड़ा थाने में दर्ज है, इसलिए अब शव मिलने के बाद यह मामला बवानीखेड़ा पुलिस के साथ मिलकर हल किया जाएगा।
बोरी खोलने पर सदर थाना के एएसआई मोहनलाल को जब मरने वाले के बारे में कोई सुराग नहीं लगा तो उसकी नजर मृतक के गले में टंगे सच्चा सौदा डेरा के लॉकेट पर गई। एएसआई ने लॉकेट पर गुदे नंबर नोट कर गढ़ी स्थित डेरे पर संपर्क किया।
गढ़ी के नुमाइंदों ने सिरसा डेरे पर संपर्क साधा तो पता चला कि यह लॉकेट अलखपुरा के राजपाल मजीठिया को जारी किया गया था। इसके बाद राजपाल के परिवार से संपर्क साधकर उन्हें मौके पर बुलाया गया।
दरअसल हर लॉकेट पर डेरे पर एक नंबर अंकित होता है, जिसका रिकॉर्ड डेरे के पास रहता है। जिसे भी डेरे द्वारा यह लॉकेट पहनाया जाता है, उसका नंबर उसके नाम के साथ दर्ज कर लिया जाता है।
मामले की जांच कर रहे बवानीखेड़ा पुलिस के सब इंस्पेक्टर टेक राम ने बताया कि चूंकि राजपाल मजीठिया की गुमशुदगी का मामला पहले से दर्ज था, लिहाजा, उस मामले को अब हत्या में तब्दील कर दिया है।
जांच के बाद किसी को नामजद किया जाएगा। पोस्टमार्टम के लिए शव को यहां सिविल अस्पताल में लाया गया है, जहां से उसे रोहतक मेडिकल कॉलेज के लिए रेफर किया गया है।