राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग ने आवासीय स्कूल में यौन शोषण के मामले में डीसी को समन भेजकर तलब किया है। डीसी को 5 जनवरी को आयोग के सामने व्यक्तिगत तौर पर हाजिर होने के लिए निर्देश दिए गए हैं। आयोग ने इस मामले में पूरा रिकॉर्ड भी तलब किया है।
एनसीपीसीआर ने यौन शोषण के मामले में डीसी निखिल गजराज के नाम समन जारी किए हैं, जिसमें डीसी को रिकॉर्ड सहित तलब किया गया है। आयोग के सदस्य यशवंत जैन की ओर से यह समन जारी किए गए हैं। आयोग ने सिविल कोर्ट की शक्तियों का उपयोग करते हुए समन जारी किया है। आयोग ने इस मामले में अब तक प्रशासन की ओर से की गई कार्यवाही की एक्शन टेकन रिपोर्ट भी मांगी है।
आयोग को एक सितंबर को भेजी थी शिकायत
आयोग को 1 सितंबर को एक पीड़िता ने शिकायत भेजी थी, जिसमें उसने अपने आवासीय स्कूल की दो महिला कुक पर आरोप लगाए थे। आयोग ने इस मामले में फैक्ट फाइंडिंग टीम का गठन कर मौके पर भेजा था, जिसके बाद टीम ने मौके पर जांच के बाद सिटी मजिस्ट्रेट को डीसी के नाम एक पत्र भी सौंपा था। आयोग ने इस मामले में पोक्सो के तहत केस दर्ज कर विस्तृत जांच के लिए कहा था। आयोग की ओर से 6 सितंबर को लेटर जारी किया था। इस पर प्रशासन ने 22 सितंबर, 27 अक्तूबर, 3 नवंबर तथा 17 नवंबर को एक्शन टेकन की जानकारी भेजी थी। आयोग को अब तक 6 सितंबर को जारी किए गए लेटर पर एक्शन टेकन रिपोर्ट नहीं मिल सकी है। आयोग ने इस मामले में 27 अक्तूबर को भी समन जारी किए थे। अब आयोग ने दोबारा से समन जारी किए हैं, जिसमें डीसी को 5 जनवरी को आयोग के समक्ष हाजिर होना होगा। आयोग ने डीसी को एक्शन टेकन रिपोर्ट भी साथ लाने के निर्देश दिए हैं।
वार्डन पर भी लगे आरोप
इस मामले में स्थानीय टीम ने जांच की तो पाया कि इस मामले में आवासीय विद्यालय की वार्डन को शामिल होने की रिपोर्ट मिली। टीम ने बताया कि वार्डन ने दो महिला कुक के खिलाफ शिकायत दिलाने के लिए लड़की व उसके परिजनों को उकसाया था। आरोप है कि वार्डन ने स्कूल के लेटर हेड पर शिकायत लिखवाकर इसे वेब पोर्टल पर अपलोड कराया था।
बेवपोर्टल की पहली शिकायत
केंद्रीय मंत्री मेनका गांधी की ओर से जारी किए गए पोक्सो वेब पोर्टल पर यह पहली शिकायत थी। इस कारण आयोग की ओर से इसे गंभीरता से लिया गया। एक सितंबर को शिकायत अपलोड करते ही दो सितंबर को आयोग की टीम हिसार के इस आवासीय स्कूल में पहुंच गई थी।
एजेंडा से हटाई शिकायत
वार्डन ने इस मामले में न्याय के लिए जन परिवाद समिति की बैठक में भी शिकायत दी थी, जिसमें वार्डन ने कहा कि इस मामले का खुलासा किया था इस कारण उन्हें प्रताड़ित किया जा रहा है। 12 दिसंबर को प्रस्तावित मीटिंग के एजेंडा में भी इस शिकायत को शामिल कर लिया गया था। यह बैठक 21 दिसंबर को हुई तो एजेंडा से यह शिकायत हटा ली गई।
पंचायत ने आयोग के समक्ष रखा पक्ष
इस मामले में गांव की पंचायत ने दोनों महिला कुक का समर्थन करते हुए वार्डन को ही गलत बताया था। पंचायत ने इस आयोग की टीम के सामने भी अपना पक्ष रखा था। पुलिस में दर्ज एफआईआर के बाद जांच हुई। जिसमें पुलिस ने इस मामले में साक्ष्य न मिलने पर केस को फाइल यानी बंद कर दिया था।