एक नवंबर, 2002 को तत्कालीन केंद्रीय सूचना एवं प्रसारण मंत्री सुषमा स्वराज ने इस केंद्र का उद्धाटन किया था। तत्कालीन मुख्यमंत्री ओमप्रकाश चौटाला और सांसद सुरेंद्र सिंह बरवाला भी इसके साक्षी बने थे। तब से इस केंद्र ने कृषि की नवीनतम तकनीकों और बागवानी और डेयरी जैसे क्षेत्रों के बारे में शिक्षित करने के अलावा पूरे देश में क्षेत्रीय संस्कृतियों को बढ़ावा देने और इनके प्रसार में भी महत्वपूर्ण योगदान दिया। पर समय बीतने के साथ ही इसकी भूमिका सिमट गई। अब यह केंद्र केवल ढांचा मात्र रह गया है।
दूरदर्शन हरियाणा के मौजूदा प्रोग्राम डायरेक्टर पवन कुमार कहते हैं कि दूरदर्शन केंद्र के चंडीगढ़ जाने से सबसे अधिक हरियाणवी संस्कृति को नुकसान हुआ है। हिसार हरियाणवी संस्कृति का केंद्र बिंदु है, जबकि चंडीगढ़ पंजाबी संस्कृति का केंद्र है। केंद्र चंडीगढ़ शिफ्ट होने से हरियाणा के लोक कलाकारों के साथ अन्याय हुआ है। दूरदर्शन केंद्र बंद होने से किसान हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय के वैज्ञानिकों की सलाह का लाभ नहीं ले पा रहे हैं। वहीं, खिलाड़ियों को भी प्रोत्साहन नहीं मिल पा रहा है।
2002 में दूरदर्शन केंद्र पाने वाला हरियाणा देश का आखिरी राज्य था। यदि पुरजोर प्रयास नहीं हुए तो हिसार में अपना एकमात्र दूरदर्शन केंद्र खोने वाला हरियाणा पहला राज्य बन जाएगा। हिसार में दूरदर्शन कार्यालय और स्टाफ कॉलोनी परिसर आठ एकड़ में प्राइम लोकेशन पर है। स्टूडियो में महंगे डिजिटल उपकरण भी लगे थे, जो चंडीगढ़ शिफ्ट हो गए। अब तक इस परिसर के किसी और उपयोग की घोषणा नहीं की गई है, ऐसे में उम्मीद की किरण अब भी बनी हुई है। हिसार में तीन विश्वविद्यालय हैं, एक कृषि के लिए, दूसरा पशु चिकित्सा विज्ञान के लिए और तीसरा तकनीक के क्षेत्र में दूरदर्शन को विशेषज्ञ प्रदान करते थे। विशेषज्ञों की सलाह से किसान के साथ-साथ युवा भी वंचित हुए हैं। लोक कलाकारों को भी निराशा मिली है।
दूरदर्शन केंद्र के मुद्दे पर धरना अब भी जारी है। कांग्रेस सांसद दीपेंद्र हुड्डा इस मुद्दे को संसद में उठा चुके हैं। उन्होंने इसे चुनावी घोषणा पत्र में शामिल करने और हिसार वापसी का आश्वासन दिया है। इनेलो के नेता ओपी चौटाला भी धरनास्थल पर आकर समर्थन दे चुके हैं। जजपा के विधायक जोगीराम सिहाग इस मुद्दे को विधानसभा में उठा चुके हैं। तत्कालीन भाजपा सांसद बृजेंद्र सिंह भी दिल्ली में इस मुद्दे को लेकर संबंधित मंत्री से मिल चुके हैं। हमारी समिति हर स्तर पर प्रयास कर चुकी है, लेकिन आश्वासन के अलावा कुछ भी नहीं मिला। - नरेंद्र कौशिक, संयोजक, दूरदर्शन बचाओ संघर्ष समिति।
दूरदर्शन केंद्र हिसार का बंद होना केवल स्थानीय लोगों के लिए नौकरियों के नुकसान का मुद्दा मात्र नहीं है। यह एक ऐसे माध्यम की हानि भी है जो हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय के स्थानीय विशेषज्ञों से किसानों को कृषि संबंधी टिप्स प्रदान करता रहा है। पर यह भी मुख्य मुद्दा नहीं है। यह असल में राज्य की पहचान के एक महत्वपूर्ण मुद्दे के नुकसान की कहानी है। हिसार में डीडी केंद्र के बंद होने से हरियाणा इस माध्यम में सांस्कृतिक योगदान से वंचित हो गया। - अजीत सिंह, पूर्व समाचार निदेशक, दूरदर्शन हिसार।