जिले के गांव में दलितों के पुनर्वास को लेकर उपायुक्त एमएल कौशिक ने अधिकारियों के दल के साथ गांव का दौरा किया। वहां पर 100-100 गज के प्लाट के लिए मौैके का मुआयना किया। दलितों के मामलों को लेकर संवेदनशील गांव के पीड़ितों के पुनर्वास के लिए उपायुक्त एमएल कौशिक बुधवार को गांव पहुंचे।
उनके साथ पुलिस अधीक्षक विकास धनखड़, खंड विकास पंचायत अधिकारी सहित अन्य अधिकारी मौजूद थे। अधिकारियों ने पंचायत घर में गांव के लोगों की बैठक बुलाई। जिसमें दलितों के प्रतिनिधियाें ने भी हिस्सा लिया। उपायुक्त ने गांव के दलितों को 100-100 गज के प्लाट देने के लिए मौके का मुआयना किया।
तय किया गया कि गांव के दलितों के 222 परिवारों को 100-100 गज के प्लाट दिए जाएंगे। दलितों की मांग के अनुसार उनकी बस्ती के नजदीक यह प्लाट दिए जाएंगे। इसके लिए गांव की करीब 21 एकड़ जमीन चिह्नित की गई है। उपायुक्त ने ग्रामीणों को बताया कि 4 जुलाई को संबंधित विभागों के अधिकारी गांव पहुंचकर प्लाटों की पैमाइश कर देंगे।
उपायुक्त ने दलित समाज के लोगों से कहा कि वह अपने भाई बंधुओं, परिजनों को मनाएं। दिल्ली में जंतर मंतर पर दिए जा रहे धरने को समाप्त कराएं। गांव में एक बार फिर से भाईचारे के साथ रहने के लिए प्रेरित करें। जिस पर दलित समाज के लोगों ने कहा कि उनकी प्लाट की मांग पूरी हो जाएगी तो वह दिल्ली जाकर धरना देने वालों को मनाएंगे। उन्हें वापस लाने का पूरा प्रयास करेंगे।
इसी गांव के कुछ दलित परिवार पिछले दो साल से लघु सचिवालय परिसर पर धरना दे रहे हैं। उपायुक्त ने हिसार के लघु सचिवालय में धरना देने वालों को भी मनाकर वापस गांव में लाने के लिए कहा। जिस पर दलित परिवारों ने सहमति जाहिर कर दी।
23 मार्च को गांव की चार लड़कियों को नशीला पदार्थ सुंघाकर भटिंडा ले गए थे। लड़कियों ने पांच युवकों पर रेप व छेड़छाड़ का आरोप लगाया था। जिसमें ललित, संदीप, सुमित सहित दो अन्य शामिल थे। परिजनों ने 25 मार्च को लड़कियों को भटिंडा रेलवे स्टेशन से बरामद किया था। मामला दर्ज करवाने के दिन ही वे लघु सचिवालय में धरने पर बैठ गए थे।
तारीख की नजर में घटनाक्म
23 को हुआ दुष्कर्म व छेड़छाड़ ।
25 को भटिंडा से लड़कियों की बरामदगी।
26 को लघु सचिवालय में प्रदर्शन व धरना।
31 मार्च को धरने पर बैठ लोगों को धारा 144 का नोटिस।
1 अप्रैल को गांव से पलायन ।
15 अप्रैल को दलित नेता वेदपाल तंवर धरने पर पहुंचे और दिल्ली जाने की दी चेतावनी।
16 अप्रैल को हिसार से दिल्ली के लिए पलायन।
19 अप्रैल को सोनिया गांधी के आवास के बाहर प्रदर्शन।
21 अप्रैल को सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की।
24 अप्रैल जेएनयू के छात्रों ने निकाला कैंडल मार्च।
27 अप्रैल को गृह मंत्री सुशील शिंदे के घर के बाहर बेरीगेट्स तोड़ किया प्रदर्शन।
12 मई आयोग ने एसआईटी गठन की मांग की
30 जून आयोग ने एसआईटी गठन के लिए रिमांडर भेजा
इन मांगों पर हैं अडिग
लड़कियों ने इस मामले में पांच युवकों पर अपहरण कर रेप व छेड़छाड़ का आरोप लगाया था। इसके अलावा इस मामले में गांव के सरपंच व उसके परिवार के लोगों का हाथ बताया था। उन्होंने कहा कि पूरा मामला सरपंच व उसके परिवार के लोगों की जानकारी में था और उन्होंने आरोपियों को शह दी।
उन्होंने जिला प्रशासन से मांग की थी कि सरपंच व उसके परिवार के सदस्यों के खिलाफ मामला दर्ज कर उन्हें गिरफ्तार किया जाए। दूसरा लड़कियों को 15-15 लाख रुपये की आर्थिक सहायता दी जाए। पीड़ित परिवार को शहर में आवास उपलब्ध करवाया जाए। लड़कियों की पढ़ाई व मेडिकल खर्च प्रशासन व सरकार की तरफ से उठाया जाए। आरोपियों को फांसी की सजा हो। एफएसएल रिपोर्ट पीड़ित पक्ष को भी दे।
आयोग के सदस्य ईश्वर सिंह ने गांव का दौरा करने के लिए पहले 25 दिन का दिन तय किया था। इस बीच उपायुक्त एवं पुलिस अधीक्षक ने दिल्ली पहुंचकर हवाला दिया कि 27 जून को सीएम का कार्यक्रम है। इस कारण 5 जुलाई तक का अतिरिक्त समय मांगा। 30 जून को ईश्वर सिंह ने रिमाइंडर भेजा।