हिसार। लाला लाजपतराय पशुचिकित्सा एवं पशुविज्ञान विश्वविद्यालय (लुवास) के डेयरी विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी महाविद्यालय के अनुसूचित जाति उपयोजना के अंतर्गत किसानों के लिए उन्नत दूध और दूध उत्पाद प्रसंस्करण पर एक व्यापक प्रशिक्षण कार्यक्रम शुरू हुआ। कुलपति डॉ. विनोद कुमार वर्मा ने कहा कि डेयरी उद्योग ग्रामीण क्षेत्रों में पशुपालकों की जीविका को बढ़ावा देने में अत्यधिक महत्व रखता है।
इस दौरान किसानों के लिए उन्नत दूध और दूध उत्पाद प्रसंस्करण नामक पुस्तिका का लोकार्पण किया गया। तीन दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम 6 मार्च तक चलेगा। कार्यक्रम का आयोजन भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद, केंद्रीय भैंस अनुसंधान संस्थान के साथ संयुक्त रूप से किया गया है। कार्यक्रम में विभिन्न क्षेत्रों से 30 प्रतिभागियों हिस्सा ले रहे है। इस अवसर पर विश्वविद्यालय के अनुसंधान निदेशक डॉ. नरेश जिंदल, एचआरएम निदेशक डॉ. राजेश खुराना, विस्तार शिक्षा निदेशक डॉ. वीएस पंवार, छात्र कल्याण निदेशक डॉ. पवन कुमार, स्नातकोत्तर अधिष्ठाता डॉ. मनोज रोज आदि मौजूद रहे।
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दुनिया भर में बढ़ रहा सुअर पालन
हिसार। लुवास के पशुधन फार्म परिसर विभाग में आयोजित वैज्ञानिक पद्धति से सुअर पालन के विषय में तीन दिवसीय राष्ट्रीय कार्यशाला एवं प्रशिक्षण का शुभारंभ मुख्य अतिथि लुवास के कुलपति डॉ. विनोद कुमार वर्मा द्वारा किया गया। उन्होंने सुअर पालन इकाई का उद्घाटन भी किया। डॉ. विनोद कुमार वर्मा ने कहा कि सुअर पालन दुनिया भर में बढ़ रहा है।
उन्होंने कहा कि सुअर की उच्च प्रजनन क्षमता और उच्च चारा रूपांतरण अनुपात के कारण सुअर पालन हमेशा से लाभदायक रहा है। इस इकाई का उद्देश्य प्रदेश के युवाओं को प्रशिक्षण देना व् उन्हें सुअर पालन में व्यवसाय स्थापित करने के लिए प्रेरित करना रहेगा। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय के वैज्ञानिक, किसानों की मदद कर सुअर पालन के अर्थशास्त्र पर काम करेंगे। पशुधन फार्म परिसर विभाग के अध्यक्ष डॉ. वीरेंद्र सिंह पंवार ने बताया कि कुल 12 प्रतिभागियों को प्रशिक्षण दिया जाएगा।