डी प्लान के बजट को लेकर जताई गई आशंका सही साबित हुई। डी प्लान के कामों में देरी से शुरू होने के कारण करीब सवा तीन करोड रुपये का बजट लैप्स हो गया। वित्त वर्ष के आखिरी दिन 31 मार्च को लघु सचिवालय के कार्यालयों में अधिकारी कर्मचारी रात पौने बारह बजे तक काम करते रहे।
वित्त वर्ष के आखिरी दिन सरकारी कार्यालय रात तक खुले रहे। एग्रीकल्चर डिपार्टमेंट में कर्मचारी रात करीब 11 बजे तक काम करते नजर आए। जिसमें चालू वित्तवर्ष के बिल बनाए गए। इन बिल को आनलाइन सबमिट करते हुए मुख्यालय को भेजा गया। लघु सचिवालय प्रथम तल पर बने डीसी कार्यालय में भी रात पौने बारह बजे तक काम हुआ। कर्मचारियों के लिए यहां पर ही डिनर मंगाया गया था। काम पूरा करते करते बीच में भारत -वेस्ट इंडीज मैच का स्कोर भी जानते रहे।
इसी तरह लघु सचिवालय में प्लानिंग आफिस में रात 11 बजे तक काम हुआ। प्लानिंग आफिसर जोगेंद्र कालीरामना खुद भी कार्यालय में जुटे रहे। जानकारी के अनुसार सामान्य वर्ग को डी प्लान में करीब 8 करोड 37 लाख रुपये दिए गए थे। इसके अलावा अनुसूचित वर्ग को 5 करोड 54 लाख रुपये का बजट मिला था।
जिसमें इस वर्ष का 11 करोड तथा पिछले वित्त वर्ष का 2 करोड रुपये का बजट था। कुल 13 करोड रुपये के बजट में से सामान्य वर्ग के 1 करोड 63 लाख रुपये लैप्स हुए। अनुसूचित वर्ग के करीब 1 करोड 73 लाख रुपये लैप्स हो गए। डी प्लान के कुल सवा तीन करोड से अधिक लैप्स हो गए।
बैंक में रात 12 तक काम आज रहेगा अवकाश
लघु सचिवालय के भूतल पर बने स्टेट बैंक ऑफ इंडिया में रात पौने बारह बजे तक ट्रेजरी का काम हुआ। सरकारी विभाग रात तक बिल जमा कराते रहे। साढे बारह बजे कर्मचारी बैंक बंद करने के बाद अपने घर की ओर रवाना हुए। एक अप्रैल को बैंक में अवकाश रहेगा।
डाक विभाग में 10 बजे खुला कार्यालय
डाक विभाग के कार्यालय भी रात दस बजे तक खुले रहे। यहां बैंक खातों को अपडेट किया गया। डाक कर्मचारियों ने बृहस्पतिवार की देर रात तक काम किया।
लैप्स नहीं सरेंडर हुआ पैसा पांच तक वापस आ जाएगा
सरकारी विभाग के अधिकारियों ने कहा कि बजट लैप्स नहीं होगा। जो काम चल रहे हैं उनका बजट पांच अप्रैल तक फिर से वापस मिल जाएगा। 31 मार्च को क्लोजिंग के कारण एक बार बजट वापस जमा कराया जाता है। इसके बाद यह बजट फिर से जारी हो जाएगा। इसे बजट सरेंडर कहा जाता है।