हिसार। हॉकी, बॉक्सिंग, कुश्ती या साइक्लिंग..हिसार के खिलाड़ियों ने इन खेलों में अंतरराष्ट्रीय स्तर तक पहचान बनाई है, लेकिन सुविधाओं की कमी बरकरार है। साइक्लिस्टों के लिए वैलोड्रम ट्रैक तक नहीं बन पाया है। मजबूरन खिलाड़ियों को हिसार-चंडीगढ़ हाईवे पर अभ्यास करना पड़ता है। इन खिलाड़ियों में स्टेट से लेकर नेशनल मेडलिस्ट तक शामिल हैं। हाईवे पर साइक्लिंग से हादसे का खतरा भी बना रहता है।
हिसार के गांव प्रभुवाला में खेल विभाग का राजीव गांधी खेल स्टेडियम बना है, जिसमें 400 मीटर लंबाई का मिट्टी का ट्रैक है, लेकिन वैलोड्रम ट्रैक न होने से खिलाड़ियों को अभ्यास में काफी परेशानी होती है। एक साइक्लिस्ट हर रोज 50 से ज्यादा किलोमीटर तक साइक्लिंग करता है। हाईवे पर प्रैक्टिस के दौरान खिलाड़ी अक्सर चोटिल हो जाते हैं। खिलाड़ियों का कहना है कि 20 किलोमीटर का वैलोड्रम ट्रैक होना चाहिए ताकि प्रैक्टिस बेहतर होने के साथ-साथ हादसों से भी बचा जा सके। साइक्लिंग कोच हैप्पी असीजा कहते हैं कि हरियाणा में किसी भी जिले में वैलोड्रम ट्रैक नहीं है। ऐसे में खिलाड़ी राजस्थान सहित अन्य राज्यों में अभ्यास करने जाते हैं। राजीव गांधी खेल स्टेडियम में मिट्टी का ट्रैक बना है। इस पर अभ्यास कर राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में वैलोड्रम ट्रैक पर साइक्लिंग में काफी मुश्किल आती है।
8 से 9 करोड़ का खर्चा
कोच असीजा बताते हैं कि लकड़ी का वैलोड्रम ट्रैक 250 मीटर का होता है। इस पर 15 करोड़ से ज्यादा की लागत आती है। वहीं, सीमेंट के ट्रैक पर 8 से 9 करोड़ रुपये खर्चा आता है। हिसार में दोनों में से एक भी ट्रैक नहीं है।
आठ साल पहले मैंने साइक्लिंग शुरू की थी। ऑल इंडिया इंटर यूनिवर्सिटी चैंपियनशिप में कांस्य पदक जीत चुकी हूं। खिलाड़ियों की सुविधा की ओर कोई ध्यान नहीं दिया जा रहा है। वैलोड्रम ट्रैक बन जाए तो बेहतर प्रैक्टिस होगी। रोड पर साइक्लिंग के लिए अलग से ट्रैक भी नहीं है। मैं पांच बार गिरकर चोटिल हो चुकी हूं। - पूजा, खिलाड़ी
मैंने सात साल पहले साइक्लिंग से कॅरिअर की शुरुआत की थी। वैलोड्रम ट्रैक की सुविधा नहीं मिल पाई है। हाईवे पर प्रैक्टिस करने को मजबूर हैं। हादसा होने पर जिम्मेदार कौन होगा। पहले के मुकाबले साइक्लिंग में खिलाड़ियों की रुचि बढ़ती जा रही है, फिर भी सुविधाएं नहीं मिल रही है। मैं नेशनल स्तर पर कांस्य पदक जीत चुकी हूं।
-रिंकी, खिलाड़ी
तीन साल से साइक्लिंग का प्रशिक्षण ले रहा हूं। वैलोड्रम ट्रैक नहीं होने से मिट्टी के ट्रैक पर अभ्यास करता हूं। इस कारण अच्छे से प्रैक्टिस नहीं हो पा रही। मजबूरी में हाइवे पर प्रैक्टिस करने जाना पड़ता है। इस दौरान हादसे का डर बना रहता है। मैं नेशनल चैंपियनशिप खेल चुका हूं। - सुमित, खिलाड़ी
वैलोड्रम ट्रैक की सुविधा मिल जाए तो न केवल खिलाड़ियों की संख्या बढ़ेगी, बल्कि पदक भी ज्यादा आएंगे। हिसार में यह सुविधा हो तो खिलाड़ियों को बाहर जाने की जरूरत भी नहीं पड़ेगी। आज कई खिलाड़ियों को मजबूरन बाहर जाकर अभ्यास करना पड़ रहा है। साइक्लिस्टों के लिए 20 किलोमीटर का अलग से ट्रैक बनना चाहिए।
-हैप्पी असीजा, कोच